गौरझामर मे स्वास्थ्य सुविधाओ की उड रही है धज्जियां

इलाज के लिए लोग हो रहे परेशान, शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना शोपीस
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । स्वास्थ्य सुविधाओ को लेकर गौरझामर हांसिये पर है शासन ने यहां पर पूर्व मे खुली शासकीए आयुर्वैदिक अस्पताल को हटाकर उसके स्थान पर पहले एलोपैथिक डिस्पेंसरी की स्थापना की गई फिर उसके बाद उसका नाम बदलकर शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गौरझामर कर दिया गया इसके लिये शाला मुहल्ला मे करोडो रुपयो की लागत से आलीशान अस्पताल बिल्डिंग का निर्माण किया गया तथा पर्याप्त स्टाफ व चार एमबीबीएस डिग्रीधारी डाक्टर पदस्थ किये गये जो गौरझामर की बीस हजार आबादी और आसपास के दो दर्जन गांव के बीमार लोगो का इलाज करेगे इस अपेक्षा मे अस्पताल प्रबंधन खरा नही उतर रहा है लोगो का कहना है की अस्पताल मे चार चार डाक्टरो के पदस्थ होते हुए एक भी डाक्टर संतोषजनक सेवाये नही दे रहा है अस्पताल एक फार्मासिस्ट के भरोसे पर टिकी हुई है लोग पेसेन्ट को लेकर बडी मुश्किल से अस्पताल जाता है लेकिन उसे घंटो इंतजार के बाद निराशा ही हाथ लगती है जिला व ब्लाक मे बैठे बरिष्ठ अधिकारियो ने गौरझामर की अस्पताल के विषय मे कोई भी जांच पडताल नही की और न ही यह जाना की जिन्हे गौरझामर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लाखो रुपये वेतन दिया जा रहा है वह आखिर अपनी सेवाये गौरझामर मे नही देकर कहां पर दे रहे है इस विषय मे न कलेक्टर न जिले के प्रभारी मंत्री व जनप्रतिनिधियो ने कोई औचक निरीक्षण किया की आखिर माजरा क्या है इस समय गौरझामर की अस्पताल शोपीस बनकर रह गई है जहां अस्पताल तो है पर डाक्टर नदारत है इतने बडे गौरझामर कस्बा व बीसो आसपास के गांवो के लोगो को इसी अस्पताल का सहारा व भरोसा रहता है जिस पर वह खरा नही उतर रही है गौरझामर एवं समीपस्थ ग्रामीण अंचलो के बुध्दीजीबी वर्ग के लोगो का कहना है की वरिष्ट अधिकारी जन आंदोलन के पहले गौरझामर की अव्यवस्थित व लापरवाही मनमानी व भृष्टाचार के साये मे चल रहे शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गौरझामर मे सभी पदस्थ डाक्टरो की सेवाये बेनागा सुचारु रुप से अनिवार्य करे जिससे यहां के लोगो को उपचार को लेकर हो रही परेशानी से निजात मिल सके।



