Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 16 अगस्त 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 16 अगस्त 2025
16 अगस्त 2025 दिन शनिवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष कि अष्टमी तिथि है। आज उदयातिथि से लेकर दिनभर अष्टमी तिथि रहेगा। आज रोहिणी नक्षत्र तो नहीं है हा भरणी नक्षत्र है इसलिए आज ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। आज असंख्य कोटी ब्रह्माण्ड नामक पतित पावन पारब्रम्ह परमेश्वर, चिद्धनचैतनय, परमपिता परमात्मा श्रीमन्नारायण के सबसे नटखट स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण का जन्म दिवस है। जिससे जन्माष्टमी कहा जाता है। वैसे तो अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं, परन्तु भगवान बलरामजी,भगवान श्रीकृष्ण यहां तक कि रुक्मिणी और राधा जी का जन्म भी अष्टमी को ही हुआ था। अंतर इतना ही है, कि किसी का शुक्ल पक्ष तो किसी का कृष्ण पक्ष, किया का दिन में तो किसी का रात्रि को, परन्तु हुआ अष्टमी को ही है। कालाष्ठमी भी आज ही हैं। आज ही गोकुलाष्टमी और गोकुल में नन्दौत्सव भी मनाया जाएगा। आज सन्त ज्ञानेश्वर महाराज जी की जन्म जयंती भी है। आज श्री जयन्ती (रामानुज) जी की जयन्ती भी है। आप सभी सनातनियों को “श्रीकृष्ण जी की जन्म महोत्सव जन्माष्टमी के पावन पर्व” की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में भी धन – धान्य एवं हर प्रकार के खुशियों का सदैव निवास हो ऐसी हमारी शुभकामना है।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 09:34 PM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र कृत्तिका 04:38 AM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। कृतिका नक्षत्र का नाम भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय से जुड़ा हुआ है। कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं।
⚜️ योग – वृद्धि योग 07:21 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग 04:28 AM तक, उसके बाद व्याघात योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 10:41 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 09:34 पी एम तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:31:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:29:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:24 ए एम से 05:07 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:46 ए एम से 05:51 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:37 पी एम से 03:29 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:59 पी एम से 07:21 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:59 पी एम से 08:05 पी एम
💧 अमृत काल : 02:23 ए एम, अगस्त 17 से 03:53 ए एम, अगस्त 17
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, अगस्त 17 से 12:47 ए एम, अगस्त 17
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 04:38 ए एम, अगस्त 17 से 05:51 ए एम, अगस्त 17
🌊 अमृत सिद्धि योग : 04:38 ए एम, अगस्त 17 से 05:51 ए एम, अगस्त 17
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-श्रीकृष्ण मंदिर में माखन मिश्री चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जन्मोत्सव (वैष्णव)/ भगवान बलरामजी जयन्ती/ रुक्मिणी जयन्ती/ राधा रानी जी जन्म दिवस/ कालाष्ठमी/ गोकुलाष्टमी/ गोकुल में नन्दौत्सव/ श्री जयन्ती (रामानुज) जी की जयन्ती/ महान सन्त ज्ञानेश्वर जी महाराज जयन्ती, भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि देव जयन्ती, भारत के एक महान संत, आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस स्मृति दिवस, दिल्ली के भुतपूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी सुभद्रा कुमारी चौहान जन्म दिवस, भारतीय अभिनेता सैफ अली खान जन्म दिवस, अभिनेत्री मनीषा कोइराला जन्म दिवस, पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति दिवस, इन्द्र कुमार गुजराल स्मृति दिवस, राष्ट्रीय ब्रैटवुर्स्ट दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🐚 Vastu tips 🦚
कहां स्थापित करें प्रतिमा और झूला
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पुण्य अवसर पर आपको भगवान कृष्ण की प्रतिमा और झूला उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में स्थापित करना चाहिए। वास्तु के अनुसार, दक्षिण-पूर्व दिशा ईश्वर का स्थान है। इस दिशा में भगवान कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर और झूला रखने से आपके घर में सकारात्मकता आती है। आपको झूला इस तरह से लगना चाहिए कि झूले में बैठे कृष्ण भगवान का मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर हो। लकड़ी का झूला बेहद शुभ होता है लेकिन लकड़ी का झूला न हो तो आप लोहे या फिर स्टील का झूला भी लगा सकते हैं। इस बात का भी ध्यान रखें कि झूला किसी ऊँचे स्थान पर हो। आप झूले को रखने के लिए चौकी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। जो लोग लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं उनको जन्माष्टमी के अवसर पर दिन में 4 बार लड्डू गोपाल को झूला झुलाना चाहिए और साथ ही चार बार भोग भी लगाना चाहिए।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
विद्यार्थियों के लिए चूना बहुत अच्छी है जो लम्बाई बढाती है – गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिलाके खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिलाके खाओ, दाल नही है तो पानी में मिलाके पियो – इससे लम्बाई बढने के साथ साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छा होता है । जिन बच्चो की बुद्धि कम काम करती है मतिमंद बच्चे उनकी सबसे अच्छी दावा है चूना, जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे ।
बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अछि दावा है चूना । और हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म बंध हुआ उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना; गेहूँ के दाने के बराबर चूना हरदिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना । जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्यूकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा कैल्सियम की जरुरत होती है और चूना कैल्सियम का सब्से बड़ा भंडार है ।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
बेल पत्ते कब और क्यों खाने चाहिए? 🍃
📅 कब खाना चाहिए —गर्मियों में सुबह खाली पेट बेल का शरबत या बेल का गूदा खाना ठंडक और डिटॉक्स के लिए उत्तम है।
पूजा के समय शिवलिंग पर अर्पित बेल पत्ते प्रसाद रूप में खाने की परंपरा भी है, जो धार्मिक और औषधीय दोनों दृष्टिकोण से लाभकारी है।
पेट या पाचन से जुड़ी समस्याओं में डॉक्टर/वैद्य की सलाह से सुबह सेवन करना अच्छा है।
💡 क्यों खाना चाहिए — पाचन तंत्र का रखवाला – बेल पत्तों और फल में टैनिन्स और पेक्टिन होते हैं, जो दस्त, आंतों की सूजन और गैस्ट्रिक प्रॉब्लम्स में मदद करते हैं।
शरीर की गर्मी कम करना – यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है, खासकर गर्मी के मौसम में।
डिटॉक्सिफिकेशन – बेल के पत्तों में मौजूद प्राकृतिक तत्व लिवर को साफ रखने में मदद करते हैं।
ब्लड शुगर कंट्रोल – बेल पत्तों का रस डायबिटीज कंट्रोल में सहायक माना जाता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कृष्ण जन्माष्टमी उपवास नियम): जन्माष्टमी का व्रत इस साल 16 अगस्त को रखा जाएगा। इस व्रत की शुरुआत सुबह सूर्योदय के साथ हो जाती है और इसका समापन कई लोग रात 12 बजे के बाद कर लेते हैं तो वहीं कई श्रद्धालु अगले दिन अपना व्रत खोलते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो कोई जन्माष्टमी का व्रत श्रद्धा-भाव से रखता है उसकी समस्त मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। साथ ही उस पर राधा-कृष्ण की विशेष कृपा बरसती है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर जन्माष्टमी का व्रत रखा कैसे जाता है। यहां हम इस बारे में ही आपको विस्तार से बताएंगे।
👉🏼 कृष्ण जन्माष्टमी उपवास नियम)
जन्माष्टमी व्रत के नियम एक दिन पहले से शुरू हो जाते हैं।
जन्माष्टमी से एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि को सात्विक भोजन करें और मन शांत रखें।
व्रती को पूरे दिन अपनी इच्छानुसार निर्जला या फलाहार उपवास रखना चाहिए।
इस दिन प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, तंबाकू इत्यादि चीजों का भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए।
व्रत वाले दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्री कृष्ण के समक्ष घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।
पूरे दिन अपना मन भगवान की भक्ति में लगाएं रखें।
इस व्रत में अन्न का सेवन बिल्कुल भी न करें। आप फलाहारी भोजन ले सकते हैं।
रात के समय भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और परिवार सहित उनकी आरती करें।
इसके बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद सभी में बांट दें।
जन्माष्टमी का व्रत अपने यहां की परंपरा के अनुसार उसी दिन रात 12 बजे के बाद या फिर अगले दिन सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए।
इस दिन भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन जरूर करने चाहिए।
☸️ कृष्ण जन्माष्टमी व्रत पारण मुहूर्त
जो लोग जन्माष्टमी के दिन ही व्रत पारण करते हैं वो रात 12 बजे की पूजा के बाद अपना व्रत खोल सकते हैं।
वहीं जो अगले दिन व्रत खोलते हैं वो 17 अगस्त की सुबह 05:51 के बाद अपना उपवास खोल सकते हैं।
🍱 कृष्ण जन्माष्टमी की रात में व्रत कैसे खोलें
जन्माष्टमी की रात में व्रत खोलने से पहले भगवान कृष्ण की विधि विधान पूजा करें और उन्हें उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाएं। इसके बाद पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद को खाकर अपना व्रत खोल लें। रात की पूजा के बाद आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।



