धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 25 सितम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 25 सितम्बर 2025
25 सितम्बर 2025 दिन गुरुवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्थी तिथि है। आज शारदीय नवरात्र का चतुर्थी दिन है और चौथे दिन माता कुष्मांडा के दर्शन और पूजन का दिन होता है। आप सभी सनातनियों बंधुओं को शारदीय नवरात्रा के चौथे दिन माता कुष्मांडा को प्रसन्न करने हेतु एक विशेष उपाय बताता हूं। आज माता चंडी की चौथी स्वरूप मां कुष्मांडा की उपासना में माता के मस्तिष्क पर तिलक हेतु चांदी का टुकड़ा उपयोग करें। नेत्रों में अंजन लगाएं और माता को मधूपर्क (दही, मधु और घी) भोग हेतु समर्पित करें। आज वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत भी है। इस चतुर्थी को मानव चतुर्थी भी कहा जाता है। आज रवि योग भी है। आप सभी को मां कुष्मांडा के उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं एवं अनन्त अनन्त बधाइयां। माताराणी से हमारी प्रार्थना यही है कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।* गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_

✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 07:06 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 07:08 PM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र के देवता वायु देवता (पवन देव) हैं, और इसके साथ ही विद्या की देवी सरस्वती को भी इससे जोड़ा जाता है
⚜️ योग – वैधृति योग 09:53 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : गर – 07:06 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 08:18 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:00:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:00:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:36 ए एम से 05:23 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:59 ए एम से 06:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:37 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:13 पी एम से 03:01 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:14 पी एम से 06:38 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:14 पी एम से 07:26 पी एम
💧 अमृत काल : 09:17 ए एम से 11:05 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:49 पी एम से 12:37 ए एम, सितम्बर 26
❄️ रवि योग : 06:11 ए एम से 07:09 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को पीले वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ विनायक चतुर्थी/ माना चतुर्थी (बंगाल उड़ीसा)/अंत्योदय दिवस/ राजनेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, विश्व फार्मासिस्ट दिवस, राष्ट्रीय बेटी दिवस | राष्ट्रीय क्वेसाडिला दिवस (डिया डे ला क्वेसाडिला), विश्व घने स्तन दिवस, राष्ट्रीय जादू खोलो दिवस, राष्ट्रीय अनुसंधान प्रशासक दिवस, राष्ट्रीय ट्यून-अप दिवस, महिला स्वास्थ्य और फिटनेस दिवस, लॉबस्टर दिवस, कॉमिक बुक दिवस, गणित कहानी सुनाने का दिन, वन-हिट वंडर दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।_
🗼 Vastu tips 🗽
झाडू और कूड़ेदान सुबह के समय झाडू या कूड़ेदान का दिखना भी अच्छा संकेत नहीं माना गया है। वास्तु के अनुसार इसकी वजह से आपके जीवन में आर्थिक तंगी आ सकती है।
जूठे बर्तन अगर आप सुबह उठते ही सबसे पहले जूठे बर्तन देखते हैं तो वास्तु में इसे भी शुभ संकेत नहीं माना जाता है। इसकी वजह से शरीर में नकारात्मकता आ सकती है। इसीलिए कहा जाता है कि कभी भी रात को घर में जूठे बर्तन नहीं छोड़ने चाहिए।
*तेल का बर्तन ज्योतिष में तेल को शनि ग्रह से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए सुबह के समय कभी भी तेल से भरा बर्तन आपको नहीं देखना चाहिए। ऐसा होने पर मानसिक पीड़ाएं आपको दिनभर झेलनी पड़ सकती हैं। परछाई सुबह के समय अपनी परछाई को देखना भी अच्छा नहीं माना जाता। सुबह उठते ही परछाई देखने से दिन भर आप अशांत रह सकते हैं। इसकी वजह से आपकी एकाग्रता पर भी बुरा असर पड़ सकता है। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ पत्तियों की बनावट: जैसा कि नाम से पता चलता है, इस जड़ी-बूटी की पत्तियों में चित्तीदार या बदरंग धब्बे होते हैं। ये धब्बे सफेद, हल्के हरे या अन्य हल्के रंगों के हो सकते हैं, जो पत्तियों के मुख्य हरे रंग के विपरीत होते हैं।
वानस्पतिक नाम की आवश्यकता: “चितबदला जड़ी” एक स्थानीय या आम बोलचाल का नाम हो सकता है। इसकी सही पहचान के लिए, इसके वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम की जानकारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में विभिन्न औषधीय पौधों के ऐसे ही चितकबरे रंग-रूप वाले कई प्रकार हो सकते हैं।
औषधीय उपयोग: चितबदला जड़ी का उपयोग पारंपरिक रूप से विभिन्न औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता है, लेकिन इसके विशिष्ट स्वास्थ्य लाभ इसकी पहचान पर निर्भर करते हैं।
सही “चितबदला जड़ी” की पहचान करने के लिए, चितकबरी पत्तियों वाले किसी भी पौधे के लिए उसके वानस्पतिक नाम को जानना आवश्यक है। यदि आप किसी विशिष्ट चितकबरी जड़ी-बूटी के बारे में जानना चाहते हैं, तो उसका वानस्पतिक नाम जानना मददगार होगा, क्योंकि उसी के आधार पर उसके गुणों और पहचान की पुष्टि की जा सकती है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
असरदार आयुर्वेदिक नुस्खे
_1. हल्दी वाला दूध (गोल्डन मिल्क) 1 कप दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर डालें।

थोड़ा काली मिर्च का पाउडर मिलाएँ।
चाहे तो दालचीनी, अदरक या शहद भी डाल सकते हैं।
👉 रात को सोने से पहले पीने से सुन्नपन और सूजन में आराम मिलता है।
2. अदरक की चाय 1–2 इंच अदरक का टुकड़ा कद्दूकस करें।
2 कप पानी में डालकर 5–10 मिनट उबालें।
चाहें तो नींबू या शहद डाल सकते हैं।
👉 सुबह-शाम पीने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और झनझनाहट कम होती है।
3. दालचीनी की चाय एक कप पानी में दालचीनी का छोटा टुकड़ा डालकर 5 मिनट उबालें।
चाहें तो शहद डालकर पिएं।
👉 ब्लड सर्कुलेशन और डायबिटीज कंट्रोल के लिए बेस्ट।
4. मेथी का पानी रात में 1 चम्मच मेथी के बीज पानी में भिगो दें।
सुबह बीज चबाकर पानी पी लें।
👉 नर्व हेल्थ को मजबूत बनाता है, खासकर डायबिटीज मरीजों के लिए असरदार।
5. लहसुन वाला दूध 2–3 लहसुन की कलियाँ काटकर दूध में डालें। 5 मिनट उबालकर छानकर पी लें।
👉 ब्लड फ्लो तेज करता है और सुन्नपन दूर करता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
मैंने एक कहानी सुनी है। एक आदमी को शिव की पूजा करते करते और रोज एक ही धुन, एक ही रट हे प्रभु, कुछ ऐसी चीजें दे दो कि जिंदगी में मजा आ जाए। एक ही बार मांगता हूं। मगर देना कुछ ऐसा कि फिर मांगने को ही न रह जाए। आखिर इसे वरदान में एक शंख शिव ने उठाकर दे दिया जो उन्हीं के पूजा स्थल में इसने रख छोड़ा था। और इसको कहा इस शंख की आज से यह खूबी है कि तुम इससे जो मांगोगे, तुम्हें देगा। अब तुम्हें कुछ और परेशान होने की जरूरत नहीं और पूजा प्रार्थना की जरूरत नहीं।
अब मुझे छुट्टी दो। जो तुम्हें चाहिए,वह इससे ही मांग लेना। यह तत्क्षण देगा। तुमने मांगा और मौजूद हुआ। उसने मांगकर देखा, सोने के रुपए और सोने के रुपए बरस गए। धन्यभाग हो गया। शिव कहां गए, क्या हुआ, इस सब की कोई फिकर भी न रही। फिर न कोई पूजा थी, न कोई पाठ। फिर तो यह शंख था और जो चाहिए।
लेकिन एक मुसीबत हो गई। एक महात्मा इसके महल में मेहमान हुए। महात्मा के पास भी एक शंख था। इसके पास जो शंख था बिलकुल वैसा, लेकिन दो गुना बड़ा। और महात्मा उसे बड़े संभाल कर रखते था। उनके पास कुछ और न था। उनकी झोली में बस एक बड़ा शंख था। इसने पूछा कि आप इस शंख को इतना सम्हाल कर क्यों रखते हैं? उन्होंने कहा, यह कोई साधारण शंख नहीं, महाशंख, है। मांगों एक, देता है दो। कहो, बना दो एक महल—दो महल बताता है। एक की तो बात ही नहीं। हमेशा।
उस आदमी को लालच उठा। उसने कहा यह तो बड़े गजब की बात है। उसने कहा एक शंख तो मेरे पास भी है मगर छोटा मोटा। आपने नाहक मुझे दीन—दुखी बना दिया। मैं गरीब आदमी हो गया। जरा देखूं चमत्कार।
उन्होंने कहा, इसका चमत्कार देखना बड़ा मुश्किल है। रात के सन्नाटे में जब सब सो जाते हैं, तब निश्चित महूर्त में, अर्धरात्रि के सन्नाटों में इससे कुछ मांगने का नियम है। तुम जागते रहना और सुन लेना।
महात्मा शंख से ठीक अर्धरात्रि में कहा, दे दे कोहिनूर। उसने कहा, एक नहीं दूंगा, दो दूंगा। महात्मा ने कहा, भला सही दो दे दे। उसने कहा, दो नहीं चार। किससे बात कर रहा है, कुछ होश से बात करो! महात्मा ने कहा, भई चार ही दे दे। वह महाशंख बोला, अब आठ दूंगा। उस आदमी ने सुना, उसने कहा, हद हो गई, हम भी कहां का गरीब शंख लिए बैठे हैं! महात्मा के पैर पकड़ लिए। कहा आप तो महात्मा हैं, त्यागी व्रती हैं। इस गरीब का शंख आप ले लो, यह महाशंख मुझे दे दो।
महात्मा ने कहा, जैसी तुम्हारी मर्जी। हम तो इससे छुटकारा पाना ही चाहते थे। क्योंकि इस बेईमान ने हमें परेशान कर रखा है। मांगो कुछ, बकवास इतनी होती है, रात—रात गुजर जाती है। फिर भी वह न समझा कि मामला क्या है कि वह सिर्फ महाशंख था, कि वह सिर्फ बातचीत करता था, देता—वेता कुछ भी नहीं था। हमेशा संख्या दोहरी कर देता था। तुम कहो चार तो वह कहे आठ, तुम कहो आठ तो वह कहे सोलह। तुम कहो सोलह सही, वह कहे बत्तीस। तुम बोले संख्या कि उसने दो का गुणा किया। बस उसको दो का गुणा करना ही आता था। और उसको कुछ नहीं आता था।
महात्मा तो सुबह चले गए। जब इसने उस शंख से दूसरी रात्रि ठीक मुहूर्त में कुछ मांगा तो उसने कहा,अरे नालायक! क्या मांगता है एक? दूंगा दो। उसने कहा, भई दो दे दो। उसने कहा, दूंगा चार। चार ही दे दो। उसने कहा, दूंगा आठ। सुबह होने लगी। संख्या लंबी होने लगी। मोहल्ले के लोग इकट्ठे हो गए कि यह हो क्या रहा है? सारा मोहल्ला जग गया कि मामला क्या है संख्या बढ़ती जाती है, लेना देना कुछ भी नहीं। आखिर उस आदमी ने पूछा, भई दोगे भी कुछ कि बातचीत ही बातचीत।
उसने कहा, हम तो महाशंख हैं। हम तो गणित जानते हैं। तुम मांगकर देखो। तुम जो भी मांगो, हम दो गुना कर देंगे। इसने कहा, मारे गए। वह महात्मा कहां है?
उसने कहा, वह महात्मा हमसे छुटकारा पाना चाहता था बहुत दिन से। मगर वह इस तलाश में था कि कोई असली चीज मिल जाए। वह ले गया असली चीज। अब ढूंढ़ने से न मिलेगा। हम मिला दे सकते हैं। पैर तो नहीं शंख के। मगर फिर भी पैरों को पकड़कर सिर रखकर कहा कि किसी भी तरह महात्मा से मिला दो। कहा, दो से मिलाएंगे। कहा कि हद हो गई। नालायक से पाला पड़ गया। चार से मिलाएंगे। फिर वही बकवास। दो चार दिन में उस आदमी को पागल कर दिया। शंख ने उससे पूछा कि अरे कुछ मांग। वह आदमी इधर उधर देखे कि कुछ बोले कि यह दुष्ट फंसाया अपने चक्कर में। बोले कि फंसे। फिर उससे छूटना मुश्किल। फिर पीछा करता आएगा बत्तीस लेगा? चौंसठ लेगा? लेना देना बिलकुल कुछ होता ही नहीं।
ध्यान और अहंकार के बीच वही संबंध है। अहंकार महाशंख है। कितना ही मिल जाए और चाहिए। संख्या बढ़ती जाती है। दौड़ बढ़ती जाती है। और आदमी कभी उस जगह नहीं पहुंचा, जहां वह कह सके आ गई मंजिल। मंजिल हमेशा मृग मरीचिका बनी रहती है। दूर ही दूर। यात्रा बहुत, पहुंचता कहीं भी नहीं। मगर दौड़ धाप बहुत होती है। और चूंकि सारी दुनिया दौड़ धाप कर रही है, इसलिए संघर्ष भी बहुत है। और यह भी मानने का मन नहीं होता कि इतने सारे लोग गलत होंगे।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

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