Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 21 अक्टूबर 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 05:54 PM तक उपरांत प्रतिपदा
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र चित्रा 10:58 PM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं और इसके अधिष्ठाता देव भगवान विश्वकर्मा हैं।
⚜️ योग – विष्कुम्भ योग 03:16 AM तक, उसके बाद प्रीति योग
⚡ प्रथम करण : नाग – 05:54 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : किंस्तुघ्न – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:25:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:45:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:44 ए एम से 05:35 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:10 ए एम से 06:26 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:59 पी एम से 02:44 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:45 पी एम से 06:11 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:45 पी एम से 07:01 पी एम
💧 अमृत काल : 03:51 पी एम से 05:38 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 22
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अभ्यंग स्नान/ दर्श अमावस्या/ महावीर निर्वाण (जैन)/ केदार गौरी व्रत/ अमावस्या समाप्ति रात्रि 05.54/ राष्ट्रीय विच हेज़ल दिवस, पुलिस स्मृति दिवस, राष्ट्रीय सेब दिवस, आजाद हिन्द फौज स्थापना दिवस, भारतीय जनसंघ स्थापना दिवस, प्रसिद्ध अभिनेत्री हेलन जन्म दिवस, जम्मू कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला जन्म दिवस, अभिनेता शम्मी कपूर जन्म दिवस, पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला जन्म दिवस, बिहार के मुख्यमंत्री कृष्ण सिंह जन्म दिवस, भारतीय फिल्म निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा पुण्य तिथि, विश्व आयोडीन अल्पता दिवस, भारतीय पुरातत्व विद्वान काशीनाथ नारायण दीक्षित जन्म दिवस, विश्व तम्बाकू सेवन निषेध दिवस, हवाई यातायात नियंत्रक का अंतर्राष्ट्रीय दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
नारियल से जुड़ा चमत्कारी उपाय आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, दिवाली से एक दिन पहले जटा वाला नारियल ले आएं। दीपावली के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और बिना आंखें खोले, बिना किसी से बात किए उस नारियल को लेकर पास के किसी तालाब या नदी के किनारे जाएं। वहां एक कोने में चुपचाप नारियल को दबाकर पानी में रखें। इस दौरान प्रार्थना करें कि मां लक्ष्मी के साथ आपको लेने आएंगे।
सूर्यास्त के बाद करें नारियल की पूजा दिवाली के दिन सूर्यास्त के समय एक लाल कपड़ा अपने साथ रखें और उसी स्थान पर जाएं, जहां नारियल दबाया था। फिर उसे निकालकर लाल कपड़े में रखें और पवित्र जल से स्नान कराएं। इसके बाद नारियल को घर ले आएं। अब इस नारियल को तिलक करें, विधिवत पूजन करके धूप-दीप से आरती करें। अगले दिन सुबह उस नारियल को घर में धन रखने वाली जगह पर रख दें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
👉 सोचिए — बाहर सभी लोग ठंड में भी नॉर्मल हैं, लेकिन आपको रजाई में भी हाथ-पैर ठंडे लगते हैं…रात में नींद नहीं आती, और दिन में हर समय थकान महसूस होती है। क्या ये सिर्फ “कमज़ोरी” है? नहीं!* आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों कहते हैं — ये आपके शरीर के भीतर छुपे तीन गहरे कारणों का संकेत है।*
तो चलिए जानते हैं वो 3 असली वजहें, जिनसे आपको दूसरों के मुकाबले ज़्यादा ठंड लगती है और उनके प्राकृतिक उपाय भी सीखते हैं 🌿* 🩸 1. शरीर में आयरन की कमी – “हीमोग्लोबिन” की कमजोरी*
जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो हीमोग्लोबिन घट जाता है।* हीमोग्लोबिन कम होगा तो ब्लड के ज़रिए ऑक्सीजन सप्लाई भी घटेगी, और नतीजा — शरीर कम गर्म 🍂 आरोग्य संजीवनी 🍁
👉 आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद में पान के पत्ते को ‘ताम्बूल’ या ‘नागवल्ली’ कहा जाता है और इसे इसके औषधीय गुणों, विशेषकर कफ पर प्रभाव के लिए बहुत महत्व दिया गया है।* पान के पत्ते के गुण: आयुर्वेद के अनुसार, इसका स्वाद ‘कटु’ (तीखा) और ‘तिक्त’ (कड़वा) होता है। इसकी तासीर ‘उष्ण’ (गर्म) होती है और यह स्वभाव में ‘तीक्ष्ण’ (गहराई तक पहुंचने वाला) और ‘रूक्ष’ (सूखा) होता है।*
कफ और खांसी पर कैसे काम करता है?:कफ-निस्सारक : इसकी गर्म और तीक्ष्ण तासीर फेफड़ों और श्वास नलियों में जमे हुए गाढ़े, चिपचिपे बलगम (कफ) को पिघलाने और काटने का काम करती है। यह बलगम को ढीला करके उसे शरीर से बाहर निकालना आसान बनाता है। वात-शामक: यह वात दोष को भी शांत करता है, जो सूखी खांसी और गले की खराश का कारण बनता है।स्रोत-शोधक: यह श्वसन मार्गों (स्रोतस) में आई रुकावट को खोलता है, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🕯️
🌹🌹 हनुमान जी की 41 दिन सेवा (बिना गुरु के भी)
💫 यह ज्ञान किसी किताब या विज्ञान के आधार पर नहीं है।
यह हमारे गुरुओं द्वारा दिया गया ज्ञान और हमारा स्वयं का अनुभव है।*
हम किसी की साधना को सही या गलत नहीं कह रहे —* हर साधक का अपना मार्ग होता है,*
💥 . सेवा शुरू करने से पहले आवश्यक सामग्री:* श्रीराम दरबार की फ्रेम वाली तस्वीर और हनुमान जी की एक तस्वीर — जिसमें श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी हों*
पूजा स्थान की पूरी सफाई करें और उसे पवित्र बनाएं। फूल, पुष्प गंगा जल से* आसन के लिए लाल वस्त्र रखें*
दीपक के लिए घी या तिल का तेल रखें* फूल, पुष्पमाला, अक्षत, जल, सिंदूर, गुड़-चना, लौंग, पतासा, और लड्डू तैयार रखें, जोत, धूप, हनुमान चालिसा । 🔥 सेवा के मुख्य नियम:
✨ आप 11, 21, 31 या 41 दिनों का संकल्प ले सकते हैं।
✨ पूरे समय ब्रह्मचर्य का पालन करें।
✨ जमीन पर सोएं।
✨ पूजा और रात्रि में लंगोट धारण करें।
✨ तामसिक भोजन, प्याज, लहसुन, मांस, शराब, फास्ट फूड और होटल का भोजन पूरी तरह वर्जित है।
✨ केवल घर का बना सात्विक भोजन ग्रहण करें।
✨ मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों में करें।
✨ बिना कारण किसी के घर न जाएं।
✨ पूजा प्रारंभ करने से पहले सभी देवी-देवताओं का तिलक और प्रणाम करें।
✨ पूजा में पुष्पमाला जरूर अर्पित करें।
🌺 संकल्प विधि: :-
सीधे हाथ में थोड़ा गंगा जल, अक्षत और ₹1 का सिक्का लेकर श्रीराम दरबार के सामने बैठें।*
फिर यह बोलें:* “मैं (अपना नाम), (पिता का नाम), (शहर/राज्य) निवासी,*
आज से अगले (दिनों की संख्या) दिन तक* पवनपुत्र हनुमान जी की सेवा करूँगा।*
मैं प्रतिदिन सुबह-शाम (इतनी बार) हनुमान चालीसा का पाठ करूँगा।* मैं अपने ईष्ट/गुरु को साक्षी मानकर यह संकल्प लेता हूँ।*
हे प्रभु! मेरी सेवा स्वीकार करें।* ऐसा ही हो, ऐसा ही हो, ऐसा ही हो।”*
इसके बाद वह जल, अक्षत और सिक्का भूमि पर रख दें और सेवा आरंभ करें।
💥 भोग विधि: :-
भोग आप सुबह या शाम में, एक या दो बार दे सकते हैं।* 🔥 अग्नि भोग विधि:
2 लौंग 1 पतासा श्री गणेश जी को*
2 लौंग 1 पतासा शिव गुरु को* 2 लौंग 1 पतासा मां काली को*
5 लौंग 2 पतासे श्रीराम जी को* 5 लौंग 2 पतासे हनुमान जी को*
*आप लड्डू, गुड़-चना या मिठाई का भोग भी अर्पित कर सकते हैं . 🎆 *हनुमान चालीसा* श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।*
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥* बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।*
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥* जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥*
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥* महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥*
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥* हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥*
शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥* विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥*
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥* सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥*
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥* लाय सजीवन लखन जियाए। श्रीरघुवीर हरषि उर लाए॥*
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥* सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिकपाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥*
तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥* जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥*
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥* दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥*
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥* सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥*
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥* भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥*
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥* संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥*
सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा॥* और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥*
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥* साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥*
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥* राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥*
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै॥_
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥_
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥_
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥* जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ जो यह पढ़े हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥*
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मह डेरा
🪷🍁 मंदिर और घर में जल नियम:
*मंदिर या पूजा स्थान में लोटा रखें और उसमें गंगाजल भरें। *घर में मुख्य द्वार पर इस जल की रेखा बनाएं।
*घर के दोनों पिलर पर थोड़ा-थोड़ा जल छिड़कें। हर 24 घंटे बाद इसे बदलें। . 🎇 *सेवा के बाद: –* हनुमान जी के नाम से गरीबों को भोजन कराएँ।
गौशाला में हरा चारा दान करें।
हनुमान जी का चोला, फल-मिठाई का भोग अर्पित करें।
संकल्प पूर्ण होने के बाद 15–20 दिन का विश्राम लें, फिर पुनः सेवा करें।
संभव हो सके तो मंगलवार या शनिवार को हनुमान जी की सेवा समझकर के मछलियों को चारा जरूर खिलाए
💫 सेवा के लाभ: –
शत्रु, भय, नकारात्मकता, रोग और रुकावटें स्वतः दूर होती हैं।
रुके हुए कार्य सिद्ध होते हैं।ईष्ट देव के संकेत स्वप्न में प्राप्त होते हैं।
मन स्थिर होता है, आत्मबल और तेज बढ़ता है।
अंतिम संदेश:
हम किसी की साधना को गलत या सही नहीं कह रहे
सबका अपना मार्ग है, और यह हमारा अनुभव आधारित मार्ग है।
▬▬▬▬▬▬๑ ⁂❋⁂ ๑▬▬▬▬▬
⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।


