धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 28 अक्टूबर 2025
28 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि है। आज इस सप्तमी को भगवान सूर्य के उत्सव छठ व्रत समाप्ति हो जाती है। इसलिए आज प्रातः सर्वप्रथम सूर्याघ्य आदि देकर भगवान सूर्य की पूजा करनी चाहिए वहीं जहां पर भी भगवान सूर्य की उपासना अर्थात छठ घाट हों वहां जाकर व्रतियों से आशीर्वाद एवं प्रशाद अवश्य लेना चाहिए। आज प्रातः सूर्य भगवान के उदित होने का समय है:- 06.39 AM तो सुबह 06.39 से 06.42 AM के बीच सूर्याघ्य दे देना चाहिए। आज रवि योग है एवं स्थायीजयोग भी है। व्रतियों के पारण के मूहूर्त की बात करें तो प्रातः सूर्योदय के उपरांत 06: 58 AM के उपरांत ही पारण किया जा सकता है। आप सभी सनातनियों को “सूर्य उपासना एवं श्रद्धा और भक्ति – भाव से परिपूर्ण छठ व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । *मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 08:00 AM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 03:45 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता जल के देवता अपस हैं, हालांकि कुछ स्रोतों में अग्निदेव को भी इसका शासक देवता माना गया है।
⚜️ योग – सुकर्मा योग 07:50 AM तक, उसके बाद धृति योग
प्रथम करण : तैतिल – 07:59 ए एम तक
द्वितीय करण : गर – 08:45 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:30: 00
🌅 सूर्यास्त – शाम: 05:40: 00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:48 ए एम से 05:39 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:13 ए एम से 06:30 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:41 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:39 पी एम से 06:05 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:39 पी एम से 06:56 पी एम
💧 अमृत काल : 10:29 ए एम से 12:15 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 29
🌸 त्रिपुष्कर योग : 03:45 पी एम से 06:31 ए एम, अक्टूबर 29
❄️ रवि योग : 06:30 ए एम से 03:45 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ त्रिपुष्कर योग/ सूर्य षष्ठी (बिहार)/ षष्ट् पूजा/ महाकाव्य हिंदू काव्य, रामायण के रचेता पूज्य ऋषि वाल्मीकि जयन्ती, भारत सरकार के गृह सचिव मौरिस गार्नियर हैलेट जन्म दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट दिवस, राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस, पूर्व मुख्यमंत्री महाराष्ट्र अशोक चव्हाण जन्म दिवस, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल जन्म दिवस, सिस्टर निवेदिता जन्म दिवस, मणिलाल गांधी जयन्ती, अतुल प्रसाद सेन जन्म दिवस, इंद्रा नूयी जन्म दिवस* ✍🏼 *तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🌷 *Vastu tips* 🌹
*विशेष बात यह है कि यदि आप इस पौधे के साथ लक्ष्मी कमल के पौधे को भी रखते हैं, तो इसकी ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है. *आचार्य श्री गोपी राम ने, फेंगशुई में इस बात का जिक्र है कि यह पौधा अपनी तरफ सुख, समृद्धि और धन-धान्य को भी आकर्षित करता है.
*दैवीय गुणों से परिपूर्ण होने की वजह से यह पौधा बेहद दुर्लभ होता है, जो आसानी से नहीं मिल पाता है. ऐसे में यदि यह कहीं दिख जाए तो गलती से भी इसे छोड़ने की भूल नहीं करनी चाहिए. *लाख मेहनत के बावजूद भी जो व्यक्ति धन का संचय नहीं कर पा रहा है, उनके लिए यह पौधा किसी वरदान से कम नहीं है. सुख शांति, बरकत और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए घर और दफ्तर में इसे जरूर लगाना चाहिए.
*पेड़ पौधों के जानकार गौरव तिवारी बताते हैं कि इन पौधों की खासियत यह होती है कि इन्हें न तो अधिक पानी की आवश्यकता होती है और न ही अधिक सन लाइट की. सप्ताह में सिर्फ एक बार पानी देने से ये पूर्ण विकसित हो जाते हैं. ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ *शंखजल का छिड़काव व पान क्यों ? शंख में जल भरकर उसे पूजा-स्थान में रखे जाने और पूजा – पाठ, अनुष्ठान होने के बाद श्रद्धालुओं पर उस जल को छिड़कने का कारण यह है कि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति होती है और शंख में जो गंधक, फॉस्फोरस और कैल्शियम की मात्रा होती है उसके अंश भी जल में आ जाते हैं | इसलिए शंख के जल को छिड़कने और पीने से स्वास्थ्य सुधरता है |
*भगवान कहते हैं : “जो शंख में जल लेकर ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का उच्चारण करते हुए मुझे नहलाता है वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है | जो जल शंख में रखा जाता है वह गंगाजल के समान हो जाता है | तीनों लोकों में जितने तीर्थ है वे सब मेरी आज्ञा से शंख में निवास करते है इसलिए शंख श्रेष्ठ माना गया है | जो शंख में फूल, जल और अक्षत रखकर मुझे अर्घ्य देता है उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है | जो वैष्णव मेरे मस्तक पर शख का जल घुमाकर उसे अपने घर में छिडकता है उसके घर में कुछ भी अशुभ नहीं होता | मृदंग और शंख की ध्वनि तथा प्रणव (ॐकार) के उच्चारण के साथ किया हुआ मेरा पूजन मनुष्यों को सदैव मोक्ष प्रदान करनेवाला है |” (स्कन्द पुराण, वैष्णव खंड) 🩻 आरोग्य संजीवनी 💊
अगर आपके शरीर में शुगर की बीमारी है मतलब डाइबिटिज की बीमारी है तो भगवान ने उसको ठीक करने की दवा भी आपके घर में दे राखी है. डाइबिटिज अगर ठीक करना है तो घर में मौजूद मैथीदाना लीजिए उसको पीसकर पाउडर बनाइए. मैथीदाने के साथ थोडा करेला लीजिए. करेले को धुप में सुखाकर उसका पाउडर बना लीजिए. अगर आपके घर में जामुन की गुठली मिले तो उसे सुखाकर उसकी गुठली का पाउडर बना लीजिए. अगर जामुन घर में है तो ठीक है नही तो बाजार से जामुन खरीद सकते है. फिर आपके आसपास नीम के पेड़ होंगे तो उसकी निम्बोली को सुखाकर उसका पाउडर बना लीजिए. और बेलपत्थर के पत्ते सुखाकर उसका भी पाउडर बना लीजिए.
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अब हमारे पास मैथी दाने का पाउडर, जामुन की गुठली का पाउडर, नीम की निम्बोली का पाउडर, बेलपथर के पट्ठे का पाउडर और करेले का पाउडर ये पांच चीज का पाउडर मिलाकर इसे गुद्मार्क के साथ मिला लें, गुद्मार्क एक घास होती है जो किसी भी किराने की दुकान पर मिल जायेगी. इन सभी दवाओं को बराबर मात्रा में भरकर एक शीशी में रख लीजिए. ये डाइबिटिज की बहुत अच्छी दवा है.
*कैसे लें – इसे एक चम्मच गर्म पानी के साथ सुबह और एक चम्मच शाम को लें. वो भी खाने से लगभग एक घंटे पहले, अगर आपने नियमित रूप से इसे लेना शुरू किया तो इस दवा से आपकी शुगर आपकी डाइबिटिज हमेशा के लिए ठीक हो जाएगी. 📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
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एक फकीर वृक्ष के नीचे ध्यान कर रहा था, रोज एक लकड़हारे को लकड़ी काटते ले जाते देखता था।
*एक दिन उससे कहा कि सुन भाई, दिन— भर लकड़ी काटता है, दो जून रोटी भी नहीं जुट पाती। तू जरा आगे क्यों नहीं जाता। वहां आगे चंदन का जंगल है। एक दिन काट लेगा, सात दिन के खाने के लिए काफी हो जाएगा। और उसे चन्दन की पहचान और परख बता दी। *गरीब लकड़हारे को भरोसा तो नहीं आया, क्योंकि वह तो सोचता था कि जंगल को जितना वह जानता है और कौन जानता है! जंगल में ही तो जिंदगी बीती।
लकड़ियां काटते ही तो जिंदगी बीती। यह फकीर यहां बैठा रहता है वृक्ष के नीचे, इसको क्या खाक पता होगा? मानने का मन तो न हुआ, लेकिन फिर सोचा कि हर्ज क्या है, कौन जाने ठीक ही कहता हो! फिर झूठ कहेगा भी क्यों? शांत आदमी मालूम पड़ता है, मस्त आदमी मालूम पड़ता है। कभी बोला भी नहीं इसके पहले। एक बार प्रयोग करके देख लेना जरूरी है।
तो आगे जंगल में गया।और फिर लौटा फकीर के चरणों में सिर रखा और कहा कि मुझे क्षमा करना, मेरे मन में बड़ा संदेह आया था, क्योंकि मैं तो सोचता था कि मुझसे ज्यादा लकड़ियां कौन जानता है।
मगर मुझे चंदन की पहचान ही न थी। मेरा बाप भी लकड़हारा था, उसका बाप भी लकड़हारा था। हम यही काटने की, जलाऊ—लकड़ियां काटते—काटते जिंदगी बिताते रहे, हमें चंदन का पता भी क्या, चंदन की पहचान क्या! हमें तो चंदन मिल भी जाता तो भी हम काटकर बेच आते उसे बाजार में ऐसे ही।
तुमने पहचान बताई, तुमने गंध जतलाई, तुमने परख दी। मैं भी कैसा अभागा! काश, पहले पता चल जाता! फकीर ने कहा कोई फिक्र न करो, जब घर आ गए तभी सबेरा है। दिन बड़े मजे में कटने लगे। एक दिन काट लेता, सात— आठ दिन, दस दिन जंगल आने की जरूरत ही न रहती।
एक दिन फकीर ने कहा; मेरे भाई, मैं सोचता था कि तुम्हें कुछ अक्ल आएगी। जिंदगी— भर तुम लकड़ियां काटते रहे, आगे न गए; तुम्हें कभी यह सवाल नहीं उठा कि इस चंदन के आगे भी कुछ हो सकता है? उसने कहा; यह तो मुझे सवाल ही न आया। क्या चंदन के आगे भी कुछ है? उस फकीर ने कहा : चंदन के जरा आगे जाओ तो वहां चांदी की खदान है। लकडिया काटना छोड़ो। एक दिन ले आओगे, दो—चार छ: महीने के लिए हो गया।
अब तो भरोसा आया था। भागा। संदेह भी न उठाया। चांदी पर हाथ लग गए, तो कहना ही क्या! चांदी ही चांदी थी! चार—छ: महीने नदारद हो जाता। एक दिन आ जाता, फिर नदारद हो जाता। लेकिन आदमी का मन ऐसा मूढ़ है कि फिर भी उसे खयाल न आया कि और आगे कुछ हो सकता है। फकीर ने एक दिन कहा कि तुम कभी जागोगे कि नहीं, कि मुझी को तुम्हें जगाना पड़ेगा। आगे सोने की खदान है मूर्ख! तुझे खुद अपनी तरफ से सवाल, जिज्ञासा, मुमुक्षा कुछ नहीं उठती कि जरा और आगे देख लूं? अब छह महीने मस्त पड़ा रहता है, घर में कुछ काम भी नहीं है, फ़ुर्शत ही फ़ुर्शत। जरा जंगल में आगे देखकर देखूं यह खयाल में नहीं आता?
उसने कहा कि मैं भी मूढ़ अभागा हूं।, मुझे यह ख्याल ही न आया, मैं तो समझा चांदी, बस आखिरी बात हो गई, अब और क्या होगा? गरीब ने सोना तो कभी देखा न था, सुना था। फकीर ने कहा : थोड़ा और आगे सोने की खदान है। और ऐसे कहानी चलती है। फिर और आगे हीरों की खदान है। और ऐसे कहानी चलती है। और एक दिन फकीर ने कहा कि नासमझ, अब तू हीरों पर ही रुक गया? अब तो उस लकड़हारे को भी बडी अकड़ आ गई, बड़ा धनी भी हो गया था, महल खड़े कर लिए थे। उसने कहा अब छोड़ो, अब तुम मुझे परेशांन न करो। अब हीरों के आगे क्या हो सकता है?
उस फकीर ने कहा. हीरों के आगे मैं हूं। तुझे यह कभी ख्याल नहीं आया कि यह आदमी मस्त यहां बैठा है, जिसे पता है हीरों की खदान का, वह हीरे नहीं भर रहा है, इसको जरूर कुछ और आगे मिल गया होगा! हीरों से भी आगे इसके पास कुछ होगा, तुझे कभी यह सवाल नहीं उठा?
वह आदमी रोने लगा। सिर पटक दिया चरणों पर। कहा कि मैं कैसा मूढ़ हूं मुझे यह सवाल ही नहीं आता। तुम जब बताते हो, तब मुझे याद आता है। यह तो मेरे जन्मों—जन्मों में नहीं आ सकता था ख्याल कि तुम्हारे पास हीरों से भी बड़ा कोई धन है।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।

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