Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 31 अक्टूबर 2025
31 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष कि दशमी तिथि है। आज ही के दिन भगवान श्री कृष्णा और इंद्र देवता के बीच शक्ति प्रदर्शन का युद्ध शुरू हुआ था व्रजधाम में जिसमें सभी व्रजवासियों को जल प्रलय में बहाकर मार डालने की योजना थी इंद्रराज इंद्र की। परंतु भगवान श्री कृष्ण ने गिरिराज गोवर्धन को ही उठा लिया और देवराज इंद्र का सारा प्रयास सफल हो गया। भगवान विजय हुए उसी दिन से इस तिथि को भगवान श्री कृष्ण के विजयोत्सव के रूप में इस तिथि को मनाया जाता है। तो आज श्री कृष्णा विजयोत्सव का महान् उत्सव है। आप सभी सनातनियों को “श्री कृष्णा विजयोत्सव के महान उत्सव” की हार्दिक शुभकामनाऐं।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌦️ मास – कार्तिक मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 10:03 AM तक उपरांत दशमी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 06:51 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल है, और इसके देवता अष्ट वसु हैं, जो आठ वैदिक देवता हैं।
⚜️ योग – वृद्धि योग 04:31 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 10:03 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 09:43 पी एम तक गर
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:31 ए एम
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:38 पी एम
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:49 ए एम से 05:41 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:15 ए एम से 06:32 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:55 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:37 पी एम से 06:03 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:37 पी एम से 06:54 पी एम
💧 अमृत काल : 08:19 ए एम से 09:56 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 01
❄️ रवि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ जगद्धात्री पूजा (बंगाल)/ नवला नवमी (उड़ीसा)/ आंवला नवमी/ पंचक प्रारम्भ 06:47/ श्रीकृष्ण विजयोत्सव/ आंवला नवमी/ भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्मृति दिवस, राष्ट्रीय एकता दिवस, लौह पुरुष एवं देश के गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल जयन्ती, राष्ट्रीय डोरबेल दिवस, जादुई राष्ट्रीय दिवस, केरल के भूत पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी जन्म दिवस, प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम पुण्य तिथि, संकल्प दिवस, विश्व नगर दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗼 Vastu tips 🗽
फेंगशुई के अनुसार बेडरूम का सही डिजाइन आपके रिश्तों, स्वास्थ्य और नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। बिस्तर को हमेशा ऐसी जगह रखें कि लेटे हुए आप दरवाजे को देख सकें, लेकिन दरवाजे के बिल्कुल सामने न हों। बिस्तर का सिरहाना मजबूत दीवार से सटा होना चाहिए। यह स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक है। बेड के नीचे सामान न रखें और कमरे में हल्के और सुकून देने वाले रंगों का इस्तेमाल करें। इससे प्रेम-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
बाथरूम की दिशा से भी जुड़ी है ऊर्जा का प्रवाह फेंगशुई में बाथरूम को बहुत संवेदनशील स्थान माना गया है। दक्षिण-पूर्व और उत्तर-पश्चिम दिशा में बाथरूम बनाना अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह धन और खुशियों की ऊर्जा को कम करता है। अगर आपका बाथरूम इन दिशाओं में है तो उसे हमेशा साफ रखें। टॉयलेट का ढक्कन बंद रखें और दरवाजा हमेशा बंद रखें। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुकता है और घर में सौभाग्य बना रहता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आइये हम गिलोय से होने वाले शारीरिक फायदे की ओर देखें :
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है – गिलोय में हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण पाए जाते है। गिलोय में एंटीऑक्सीडंट के विभिन्न गुण पाए जाते हैं, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है, तथा भिन्न प्रकार की खतरनाक बीमारियाँ दूर रखने में सहायता मिलती है। गिलोय हमारे लीवर तथा किडनी में पाए जाने वाले रासायनिक विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य भी करता है। गिलोय हमारे शरीर में होनेवाली बीमारीयों के कीटाणुओं से लड़कर लीवर तथा मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं से हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।
ज्वर से लड़ने के लिए उत्तम औषधी – गिलोय की वजह से लंबे समय तक चलने वाले बुखार को ठीक होने में काफी लाभ होता है।
गिलोय में ज्वर से लड़ने वाले गुण पाए जाते हैं। गिलोय हमारे शरीर में होने वाली जानलेवा बीमारियों के लक्षणों को उत्पन्न होने से रोकने में बहुत ही सहायक होता है। यह हमारे शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाता है जो कि किसी भी प्रकार के ज्वर से लड़ने में उपयोगी साबित होता है। डेंगु जैसे ज्वर में भी गिलोय का रस बहुत ही उपयोगी साबित होता है।
यदि मलेरिया के इलाज के लिए गिलोय के रस तथा शहद को बराबर मात्रा में मरीज को दिया जाए तो बडी सफलता से मलेरिया का इलाज होने में काफी मदद मिलती है।
पाचन क्रिया करता है दुरुस्त – गिलोय की वजह से शारीरिक पाचन क्रिया भी संयमित रहती है। विभिन्न प्रकार की पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में गिलोय बहुत ही प्रचलित है। हमारे पाचनतंत्र को सुनियमित बनाने के लिए यदि एक ग्राम गिलोय के पावडर को थोडे से आंवला पावडर के साथ नियमित रूप से लिया जाए तो काफी फायदा होता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
जोड़ों के दर्द (गठिया) : गिलोय के 2-4 ग्राम का चूर्ण, दूध के साथ दिन में 2 से 3 बार सेवन करने से गठिया रोग ठीक हो जाता है।
वातज्वर: गम्भारी, बिल्व, अरणी, श्योनाक (सोनापाठा), तथा पाढ़ल इनके जड़ की छाल तथा गिलोय, आंवला, धनियां ये सभी बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इसमें से 20-30 ग्राम काढ़े को दिन में 2 बार सेवन करने से वातज्वर ठीक हो जाता है।
शीतपित्त (खूनी पित्त): 10 से 20 ग्राम गिलोय के रस में बावची को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को खूनी पित्त के दानों पर लगाने तथा मालिश करने से शीतपित्त का रोग ठीक हो जाता है।
जीर्णज्वर (पुराने बुखार): जीर्ण ज्वर या 6 दिन से भी अधिक समय से चला आ रहा बुखार व न ठीक होने वाले बुखार की अवस्था में उपचार करने के लिए 40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह से पीसकर, मिटटी के बर्तन में 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर रात भर ढककर रख दें और सुबह के समय इसे मसलकर छानकर पी लें।
इस रस को रोजाना दिन में 3 बार लगभग 20 ग्राम की मात्रा में पीने से लाभ मिलता है। 20 मिलीलीटर गिलोय के रस में 1 ग्राम पिप्पली तथा 1 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से जीर्णज्वर, कफ, प्लीहारोग (तिल्ली), खांसी और अरुचि (भोजन का अच्छा न लगना) आदि रोग ठीक हो जाते हैं।
वमन: गिलोय का रस और मिश्री को मिलाकर 2-2 चम्मच रोजाना 3 बार पीने से वमन (उल्टी) आना बंद हो जाती है। गिलोय का काढ़ा बनाकर ठण्डा करके पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक संत ने किसान को समझाया, ‘जीवन में हमें कई तरह के लालच मिलते हैं, कुछ लोग रास्ता भी रोकते हैं, अगर हम रुक जाएंगे तो असफलता ही मिलेगी’
सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो बिना रुके आगे बढ़ते रहते हैं और किसी तरह के लालच और प्रलोभन में नहीं उलझते हैं। इस संबंध में एक लोक कथा के अनुसार पुराने समय में एक संत के पास गरीब किसान पहुंचा। किसान ने कहा कि मेरे जीवन में कई तरह की परेशानियां चल रही हैं। मैंने जो लक्ष्य बना रखा है, वहां तक पहुंच नहीं पा रहा हूं। मैं इधर-उधर के कामों में उलझ जाता हूं और सब काम बिगड़ जाते हैं।
संत ने उससे कहा कि मैं तुम्हारे घर आकर तुम्हें कोई रास्ता बताता हूं, जिससे तुम्हारी ये समस्याएं दूर हो सकती हैं। किसान अपने घर लौट आया। अगले दिन संत उस किसान के घर पहुंचे। उस समय किसान घर पर नहीं था।
किसान की पत्नी ने संत का आदर-सत्कार किया और उन्हें बैठने के लिए उचित स्थान दिया। महिला ने अपने पति को बुलाने के लिए बेटे को खेत भेजा। कुछ ही देर में किसान अपने घर पहुंच गया। उसके साथ एक कुत्ता भी था जो जोर-जोर से हांफ रहा था।
संत ने किसान से पूछा कि क्या तुम्हारा खेत बहुत दूर है?
किसान ने कहा कि नहीं, मेरा खेत तो यहीं पास में ही है। आपको ऐसा क्यों लग रहा है?
संत ने कहा कि मुझे ये देखकर आश्चर्य हो रहा है कि तुम और तुम्हारा कुत्ता दोनों साथ-साथ आए, लेकिन तुम्हारे चेहरे पर बिल्कुल भी थकान नहीं है, जबकि तुम्हारा कुत्ता बुरी तरह से हांफ रहा है।
किसान बोला कि मैं और ये कुत्ता दोनों एक ही रास्ते से घर आए हैं। मेरा खेत भी पास ही है। मेरा कुत्ता थक गया है। इसकी एक वजह है। मैं सीधे रास्ते से चलकर घर आया हूं, लेकिन ये कुत्ता आस-पास के दूसरों कुत्तों को देखकर उनको भगाने के लिए दौड़ता-भौंकता हुआ आया है। ऐसा ये बार-बार कर रहा था। यही कारण है कि घर आते-आते ये बहुत ज्यादा थक गया है।
संत ने किसान से कहा कि सही बात है। ठीक इसी तरह हमारे साथ भी होता है। हम किसी काम को पूरा करने लगे रहते हैं, तब हमारे सामने कई तरह की रुकावटें आती हैं। हमारा बुरी आदतें हमें काम को पूरा करने से रोकती हैं। कई तरह के लालच मिलते हैं। अगर हम अपना काम छोड़कर इन बातों में उलझ जाते हैं तो लक्ष्य अधूरा ही रह जाता है। हमें सफलता नहीं मिल पाती है।
संत ने आगे कहा कि अगर तुम किसी लक्ष्य को पूरा करना चाहते हो तो तुम्हें सिर्फ अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। दूसरी बातों में समय बर्बाद न करें, सिर्फ लक्ष्य पर ध्यान लगाओगे, जल्दी ही वहां तक पहुंच जाओगे।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।



