भ्रष्टाचार ग्राम पंचायत में 7 महीने पहले निकाली राशि, स्वागत द्वार आज भी अधूरा

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । जिले की जनपद पंचायत जबेरा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत परासई में भ्रष्टाचार का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में सरपंच और सचिव की जोड़ी ने जनपद अधिकारियों – सीईओ, एसडीओ और इंजीनियर की मिलीभगत से सरकारी खजाने को अपनी निजी जागीर समझ लिया है।
*7 महीने पहले निकली राशि, स्वागत द्वार अब तक अधूरा*
सूत्रों के अनुसार, पंचायत में स्वागत द्वार निर्माण के लिए करीब सात महीने पहले राशि निकाली गई, लेकिन आज तक वह कार्य शुरू तक नहीं हुआ।
जनपद स्तर के अधिकारी बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद चुप्पी साधे बैठे हैं, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि सिस्टम के हर स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें जम चुकी हैं।
*फर्जी बिलों का खेल जारी*
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में फर्जी बिलों और फर्जी वेंडरों के माध्यम से लाखों रुपये का भुगतान किया गया है।
टेंट हाउस, मिष्ठान भंडार, मजदूरी और अन्य मदों में एक ही नाम से कई वेंडर पंजीकृत किए गए, जिनके जरिए सरकारी खजाना धीरे-धीरे खाली किया जा रहा है।
*“रिश्वत लेकर अधिकारी सोए पड़े हैं कुंभकरण की नींद में”*
ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी कोई शिकायत लेकर अधिकारी के पास जाओ, तो या तो फोन रिसीव नहीं होता, या “देखते हैं” कहकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
लोगों का कहना है कि जनपद के अधिकारी रिश्वत लेकर कुंभकरण की नींद सो गए हैं, और पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार को आंख मूंदकर देख रहे हैं।
*पत्रकारों की खबरों का भी नहीं असर*
यह मामला कोई नया नहीं है। स्थानीय पत्रकारों द्वारा कई बार इस घोटाले की खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे रहता है।
यह चुप्पी अब संदेह पैदा करती है कि क्या उच्च अधिकारी भी इस भ्रष्टाचार की जंजीर का हिस्सा हैं?
*ग्रामीणों की मांग — हो निष्पक्ष जांच*
ग्रामीणों ने मांग की है कि परासई पंचायत में पिछले दो वर्षों के सभी विकास कार्यों और भुगतानों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
यदि सरकार और प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीणों ने जन आंदोलन की चेतावनी दी है।
*सवाल वही — “जनता करे शिकायत किससे?”*
जनता का कहना है कि शिकायतें ऊपर तक जाती हैं,
लेकिन “ऊपर वाले” भी नीचे वालों के साथ मिले हुए लगते हैं।
अब सवाल यह है —
क्या परासई पंचायत में “विकास” का नाम लेकर सिर्फ भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है?
और क्या जनपद जबेरा का प्रशासन इस खेल में साझेदार बन चुका है?



