
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 03 जनवरी 2026
03 जनवरी 2026 दिन शनिवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा तिथि है। आप स्नान – दानादि की पुण्यदायी पूर्णिमा का पावन व्रत है। आज अरुद्रदर्शन का भी परम पावन व्रत भी है। आप भगवान शिव के ताण्डव नृत्य करते हुए भगवान नटराज की प्रतिमा के पूजन एवं नृत्य – गीतादि का उत्सव आदि का कार्यक्रम होगा। कुछ लोग व्रत ही रखते हैं। इस व्रत की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। कहा जाता है कि व्याध्रपाद नाम के ऋषि एवं ककांटक नाग की तपस्या से प्रश्न होकर महादेव ने ताण्डव नृत्य किया था। और अपनी प्रतिमा के पूजन का महात्म्य बताया था। यह पर्व केरल दक्षिण भारत के तमिलनाडु में ही मनाया जाता है। इतना ही नहीं वहां चिदंबरम् मंदिर में तो भगवान नटराज की झांकी भी निकल जाती है। आप सभी सनातनियों को “पूर्णिमा एवं अरुद्रदर्शन के महापर्व” की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायं एवं अनन्त- अनन्त बधाइयां।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 👸🏻 शिवराज शक 352_
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌝 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शनिवार पौष माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 03:32 PM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी – पूर्णिमा तिथि पूर्णत्व की तिथि मानी जाती है. इस तिथि के स्वामी स्वयं चन्द्र देव हैं. इस दिन सूर्य और चन्द्रमा समसप्तक होते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आद्रा 05:27 PM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी – आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है, और इसके देवता भगवान शिव के रुद्र रूप हैं।
योग – ब्रह्म योग 09:05 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग 05:15 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
⚡ प्रथम करण बव 03:32 PM तक, बाद
✨ द्वितीय करण: बालव 01:58 AM तक, बाद कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:53:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:19:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:25 एएम से 06:20 एएम
🌟 अभिजीत मुहूर्त – 12:05 पीएम से 12:46 पीएम
💧 अमृत काल – 08:33 एएम से 09:58 एएम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:09 पीएम से 02:51 पीएम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:34 पीएम से 06:02 पीएम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 11:58 पीएम से 12:53 एएम, जनवरी 04
🌌 संध्या मुहूर्त – 05:37 पीएम से 06:59 पीएम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – शाकंभरी देवी नवरात्र समाप्ति्/ पौष पूर्णिमा/ पूर्णिमा स्नान/ माघ स्नानारंभ/ पुष्याभिषेक यात्रा/ पूर्णिमा समाप्ति् दोपहर 03.33/ सावित्रीबाई फुले जयन्ती, अंतरराष्ट्रीय मन-शरीर कल्याण दिवस, मोहन राकेश स्मृति दिवस, सतीश धवन पुण्य तिथि, आचार्य परशुराम चतुर्वेदी पुण्य तिथि, राष्ट्रीय बालिका शिक्षा दिवस, नींद का त्योहार दिवस, पुस्तक प्रकाशक मुंशी नवल किशोर जन्म दिवस, भारतीय पार्श्वगायक नरेश अय्यर जन्म दिवस, ओड़िशा के पूर्व मुख्यमंत्री जानकी बल्लभ पटनायक जयन्ती, जसवन्त सिंह जसोल जन्म दिवस, जयपाल सिंह जयन्ती, भारतीय वैज्ञानिक डॉ. ब्रह्म प्रकाश (पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित) पुण्य तिथि, व्यवसाय चिकित्सा दिवस, महिला मुक्ति दिवस, मूल कर्तव्य दिवस, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह
✍🏼 तिथि विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🕷️ Vastu tips 🐢
लोग बोलते हैं : ‘जाने – अनजाने में मुझसे कुछ गलती या भूलचूक हो गयी हो तो माफ़ कर देना !’
🔸यह माफी लेने कि सच्चाई नहीं है, बेईमानी हैं। यह माफी माँगता है कि मजाक उड़ाता है ? ‘भूलचूक हो गयी हो तो ….’ नहीं। कहना चाहिए : ‘भूल हो गयी है, क्षमा माँगने योग्य नहीं हूँ लेकिन आपकी उदारता पर भरोसा है, आप मुझे क्षमा कर दीजिये !’ यह सज्जनता हैं।
🔹ग्रहबाधा व वास्तुदोष दूर करने का अचूक उपाय* 🔸 आजकल वास्तुदोष- निवारण के नाम पर तीन टांग के कछुआ, मेंढक की मूर्ति घरों में रखने का रिवाज चल पड़ा है। यह तथाकथित फेंगशुई चीनी गृहसज्जा करना है। यदि घर पर किसी भी प्रकार का वास्तुदोष है तो एक देशी गाय रख लें, समस्त वास्तुदोष दूर हो जायेंगे। यदि गाय पालना सम्भव न हो तो घर के आँगन में सवत्सा (बछड़ेवाली) गाय का चित्र लगा लें और घर में गोमूत्र या गोमूत्र अर्क का छिड़काव करें। 🔸शनि, राहू-केतु आदि ग्रहों के दोष-निवारण के लिए प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को अपने हाथ से आटे की लोई गुड़सहित प्रेमपूर्वक किसी नंदी अथवा गाय को खिलाएं। कैसी भी ग्रहबाधा हो, दूर हो जायेगी। ♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सर्दियों में चने का साग खाने के अद्भुत फायदे 👉
*चने का साग शरीर को गर्माहट देता है:- चना स्वभाव से गरम तासीर वाला होता है सर्दी में खाने से शरीर में गर्मी बनी रहती है और ठंड जल्दी नहीं लगती।
*चने का साग खून बढ़ाने में मददगार:- चने के साग में भरपूर आयरन होता है, जो एनीमिया दूर करने में सहायक है और खून की कमी को पूरा करता है। *चने का साग इम्यूनिटी बढ़ाता है:- इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं, जिससे वायरल संक्रमण और सर्दी-जुकाम से बचाव होता है।
*चने का साग पाचन शक्ति भी सुधारता है:- चने के साग में फाइबर खूब होता है, जो कब्ज को दूर करता है, भूख बढ़ाता है और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। *चने का साग वजन कम करने में मददगार:- कम कैलोरी और ज़्यादा फाइबर होने के कारण यह पेट को देर तक भरा रखता है, जिससे वजन घटाने में सहायता मिलती है।
*चने का साग डायबिटीज़ वालों के लिए फायदेमंद:- चना लो ग्लाइसेमिक फूड है यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है, इसलिए शुगर के मरीज भी इसे आराम से खा सकते हैं। 🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है और श्वसन तंत्र पर बाहरी प्रदूषण और एलर्जी के हमले से रक्षा करने में समर्थ है। इसलिए जिनको भी सांस फूलने की या दमा की शिकायत हो उन लोगो को तुलसी से बने इस काढ़े का इस्तेमाल अवश्य ही करना चाहिए। इसके लिए आधा कप पानी में 5 तुलसी की पत्ती,एक चुटकी सौंठ पाउडर,काला नमक और काली मिर्च डालकर उबाल ले। ठंडा करके जब यह काढ़ा गुनगुना सा रह जाए तब इसका सेवन करे। नित्य प्रति इस काढ़े के सेवन से आपके सांस फूलने की समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी।
*अजवायन सांस फूलने की समस्या अक्सर श्वास नली में सूजन या श्वास नली में कचरा आ जाने की वजह से ही उत्पन्न होती है। श्वास नली को साफ़ करने का सबसे प्रभावी तरीका होता है– स्टीम या भाप लेना। भाप लेने से यदि श्वास नली में सूजन है तो उसमे आराम हो जाता है और कचरा भी निकल जाता है तो इसके लिए आपको अजवायन पीसकर पानी में उबलनी है। फिर इस अजवायन वाले पानी की भाप लेनी है। क्योंकि अजवायन की भाप सूजन को खत्म और दमे और सांस फूलने की समस्या में राहत दिलाती है।
तिल का तेल यदि ठंड की वजह से छाती जाम हो जाए या रात के समय दमे का प्रकोप बढ़ जाए और सांस ज्यादा फूलने लगे तो तिल के तेल को हल्का गर्म करके छाती और कमर पर गरम तेल की सेक करे। इस प्रकार आपकी छाती खुल जायेगी और आपको सांस फूलने की समस्या में राहत मिलेगी।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
ब्रह्मा से मरीचि, मरीचि से कश्यप, कश्यप से सूर्य और सूर्य से मनु का जन्म हुआ। मनु की कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने यज्ञ करवाया। आज भी हम लोग संतान के लिए मनौती तो मानते ही हैं। अब मनु ने यज्ञ करवाया पुत्र के लिए, पर उनकी पत्नी श्रद्धा को चाहिए थी लड़की। तो श्रद्धा ने यज्ञ करवाने वाले ‘होता’ से अपने मन की बात कह दी। यज्ञ में चार ब्राह्मण होते हैं होता, उद्गाता, अध्वर्यु और ब्रह्मा। होता ने उनकी इच्छा जान वैसी ही आहुति दी। समय आने पर श्रद्धा ने पुत्री इला को जन्म दिया।
*अब मनु को हुआ आश्चर्य कि यज्ञ का फल बदल कैसे गया। बाद में बात खुली। अब समस्या हुई कि यज्ञ का सारा विधान तो पुत्र के लिए किया गया, पर हुई पुत्री। और उसका होना भी कोई गलत विधि से तो हुआ नहीं था। तो उसे ही पुत्र बना दिया गया। नाम रखा गया सुद्दम्न। ये सुद्दम्न बड़े हुए तो एक बार फिर स्त्री बने और पुत्र को जन्म दिया, और बाद में पुनः पुरुष बन गए। खैर, यह अलग कथा है, इसपर फिर कभी बात करेंगे। *उधर श्रद्धा ने बाद ने दस पुत्रों को जन्म दिया। सबसे बड़े थे इक्ष्वाकु (जिनके वंश में प्रभु राम हुए)। बाकी थे नृग, शर्याति, दिष्ट, धृष्ट, करूष, नरिष्यन्त, पृषध्र, नभग और कवि।
*‘पृषध्र’ शुद्र हुए। सबसे छोटे पुत्र ‘कवि’ बचपन से ही वैरागी थे, ईश्वर भक्ति करते हुए वन चले गए। ‘करूष’ क्षत्रिय हुए। धृष्ट से धार्ष्ट हुए जो ब्राह्मण बन गए। नृग का भी वंश चला। *नरिष्यन्त के वंश में अग्निवेश हुए। इन्हें ही बाद में महर्षि जातूकर्ण्य कहा गया। ब्राह्मणों का आग्निवेश्यायन गोत्र इन्हीं से चला।
*दिष्ट के पुत्र नाभाग हुए जो वैश्य हुए। *मनु के पुत्र नभग के पुत्र का नाम भी नाभाग था। इन नाभाग के बेटे थे अम्बरीष।
(शेष कल)
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।।
*_पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।।



