मतदाताओं के नाम काटने, दोषियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने मुस्लिम त्योहार कमेटी ने सौंपा ज्ञापन
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । बेगमगंज में उस समय अफरा तफरी मच गई जब मतदाताओं के नाम सूची से काटने के लिए फर्जी आपत्तियां लगाने की जानकारी लगी। तब मुस्लिम त्योहार कमेटी अध्यक्ष हाजी शफीक अली के नेतृत्व में समुदाय के लोग भारी संख्या में नारेबाजी करते हुए पुराना बस स्टैंड से एसडीएम कार्यालय पहुंचे और एसडीएम सौरभ मिश्रा को ज्ञापन सौंप कर बिना साक्ष्य के लगाई गई आपत्तियों को निरस्त कर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने अपने कर्तव्यों का सही पालन नहीं करने वाले कुछ बीएलओ के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया है कि प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों की तरह 143 सिलवानी विधानसभा के बेगमगंज क्षेत्र में भी एक साजिश के तहत असंवैधानिक तरीके से पोलिंग बूथ के बाहर के लोगों के नाम और उनके मोबाइल नंबर दर्ज कर 98 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं के नाम काटने को लेकर बिना साक्ष्य की आपत्तियां प्रस्तुत की गई है। एक एक व्यक्ति के नाम से एक ही हैंडराइटिंग में दर्जनों आपत्तियां रिटर्निंग आफीसर के समक्ष प्रस्तुत की गई है। जिन्हें रिटर्निंग आफीसर द्वारा बीएलओं को मौका मुआयना कर जांच प्रतिवेदन बनाने के लिए आदेशित कर दिया गया है। जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा तफरी का महौल पैदा हो जाने से आक्रोश पनप रहा है। जबकि एसआईआर के समय बीएलओ द्वारा बाकायदा मैपिंग करने के बाद गणना प्रपत्र भरवाए गए थे। जिसमें मतदता की स्वयं की जानकारी के अलावा माता पिता अथवा स्वयं मतदाता का 2003 की एसआईआर का मतदाता क्र. विधानसभा क्र. और मतदाता सूची का भाग क्र. दर्ज कराया गया था। जो मतदाता 2003 का रिकार्ड प्रस्तुत नहीं कर पाए थे उनसे निर्धारित दस्तावेज भी बाद में नोटिस के जरिए प्राप्त किए गए हैं।
आपत्तियों जिन लोगो के नाम और मोबाइल नंबर लिखकर लगाई गई है। वे या तो गांव के निवासी है या फिर दूसरी विधानसभा के निवासी है जिनके मोबाइल नंबर पर सम्पर्क करने पर वे आपत्ती लगाने से अनभिगता जाहिर कर रहे है। बिना किसी साक्ष्य के पोलिंग बूथ के बाहर के लोगों से रिटर्निंग आफीसर ने आखिर किसके दवाब में उक्त आपत्तियां ले ली यह विचारणीय प्रश्न है।
मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मांग की है नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बिना साक्ष्य की सभी आपत्तियों को बिना जाचं प्रतिवेदन बनवाए ही निरस्त करें। ताकि बीएलओ भी मानसिक प्रताड़ना से बच सकें। संवैधानिक अधिकारों से अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को वंचित करने के षडयंत्र का पर्दाफाश किया जाकर रिटर्निंग आफीसर कक्ष के सीसीटीव्ही फुटेज देखकर उनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने
अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही करने वाले बीएलओ के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने आदि की मांग के साथ चेतावनी दी गई है कि यदि किसी भी वैद्य मतदाता का नाम काटा गया या फिर अवैध मतदाताओं के नाम जोड़े गए तो बीएलओ के विरूद्ध भी वैधानिक कार्रवाई करने के लिए विवश होगें। और संविधान के दायरे में आंदोलन के लिए बाध्य होगें जिसकी समस्त जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।



