ज्योतिष

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 29 जनवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 29 जनवरी 2026
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
*
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
*मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_

✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार माघ माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 01:55 PM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रोहिणी 07:31 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा 05:29 AM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रह्मा (प्रजापति) हैं, जो सृजन और विकास के प्रतीक हैं।
⚜️ योग – इन्द्र योग 08:27 PM तक, उसके बाद वैधृति योग
प्रथम करण : विष्टि 01:55 PM तक
द्वितीय करण : बव 12:32 AM तक, बाद बालव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:52:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:38:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:25 एएम से 06:18 एएम
🌇 प्रातः सन्ध्या 29:52 पी एम बजे से 07:11 ए एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या 17:58 पी एम से 19:17 पी एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:13 पीएम से 12:56 पीएम
🔯 विजय मुहूर्त – 02:22 पीएम से 03:05 पीएम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:55 पीएम से 06:22 पीएम
💧 अमृत काल – 09:26 पीएम से 10:54 पीएम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:08 एएम से 01:01 एएम, 30 जनवरी
❄️ रवि योग – 07:11 एएम से 07:31 एएम
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – जाया एकादशी (सर्वे स्मार्त)/रोहिणी व्रत/ भीष्म द्वादशी/ भद्रा/ रवि योग/ विडाल योग/ स्वामी प्रणबानंद महाराज प्राकट्योत्सव, हिन्दी साहित्यकार कवि गोरख पाण्डेय स्मृति दिवस, रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जन्म दिवस, राष्ट्रीय पहेली दिवस, राष्ट्रीय कॉर्न चिप दिवस, गाइड डॉग वर्षगांठ, कंसास दिवस, आरएनएलआई एसओएस दिवस, सर्वोदय दिवस, भारतीय समाचार पत्र दिवस, रामकृष्ण मिशन सांस्कृतिक संस्थान स्थापना दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
🌷 Vastu tips 🌸
शुभ- अशुभ प्रभाव कैसे जानें
*
महिलाओं की दाईं आंख का फड़कना अशुभ माना जाता है। यह मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या आने वाली कठिनाई का संकेत हो सकता है।
*महिलाओं की बाईं आंख का फड़कना शुभ संकेत माना जाता है, जैसे जल्द ही कोई अच्छी खबर सुनने या कार्य में सफलता मिलने की संभावना। *पुरुषों की दाईं आंख फड़कना शुभ शगुन होता है। यह संकेत देता है कि आपके जीवन में कुछ सकारात्मक घटनाएं हो सकती हैं।
*पुरुषों की बाईं आंख का फड़कना बहुत ही ज्यादा अशुभ, जिस आने वाले समय में परेशानी या संघर्ष का संकेत माना जाता है। *महिलाओं की दाईं भौंह फड़कना अशुभ संकेत जैसी कि आर्थिक नुकसान या किसी परेशानी का इशारा करती है।
*महिलाओं की बाईं भौंह फड़कने को शुभ माना जाता है, जिसे धन लाभ और घर-परिवार से जुड़ी अच्छी खबर मिलने का संकेत माना जाता है। *पुरुषों की दाईं भौंह फड़कना शुभ होता है, जैसे धन लाभ, मान-सम्मान में वृद्धि और अच्छे समाचार का संकेत।
*पुरुषों की बाईं भौंह का फड़कना अशुभ संकेत जैसे धन संबंधी परेशानियों की संभावना मानी जाती है। *दाईं हथेली में खुजली होना शुभ, जल्दी धन लाभ होने और अप्रत्याशित लाभ प्राप्त होने का संकेत है।
*बाईं हथेली में खुजली होना अशुभ, खर्चों में वृद्धि या वित्तीय समस्याओं का संकेत मानी जाती है। *हाथ से चीज गिरने या टूटने का संकेत शकुन आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, अगर हाथ से कांच या कोई चीज टूट जाए तो यह शुभ संकेत माना जाता है। इसका मतलब है कि भविष्य में किसी बड़े संकट या परेशानी से बचाव हो गया है। हालांकि टूटे हुए कांच को तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए, क्योंकि घर में रखना अशुभ माना जाता है।
❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*बड़ी इलायची को पीसकर मस्तिष्क पर लेप करने से एवं बीजों को पीसकर सूंघने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है *बड़ी इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर छालों पर लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं |
*यदि दांत में दर्द हो रहा हो तो बड़ी इलायची और लौंग के तेल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर पीड़ायुक्त दांत पर लगाएं ,दर्द में शांति मिलेगी | *यदि अधिक थूक या लार आती हो तो बड़ी इलायची और सुपारी को बराबर-बराबर पीसकर ,2-3 ग्राम की मात्रा में लेकर चूसते रहने से यह कष्ट दूर हो जाता है
*पांच से दस बूँद बड़ी इलायची तेल में मिश्री मिलाकर नियमित सेवन करने से दमा में लाभ होता है *दो ग्राम सौंफ के साथ बड़ी इलायची के 8-10 बीजों का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है
*एक ग्राम बड़ी इलायची बीज चूर्ण को दस ग्राम बेलगिरी के साथ मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है *पिसी हुई राई के साथ बड़ी इलायची चूर्ण मिलाकर 2-3 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करने से लीवर सम्बंधित रोगों में लाभ होता है |
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
अलसी के फायदे —
*भूरे-काले रंग के यह छोटे छोटे बीज, हृदय रोगों से आपकी रक्षा करते हैं। इसमें उपस्थित घुलनशील फाइबर्स, प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है। इससे हृदय की धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल घटने लगता है, और रक्त प्रवाह बेहतर होता है, नतीजतन हार्ट अटैक की संभावना नहीं के बराबर होती है । *अलसी में ओमेगा-3 भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो रक्त प्रवाह को बेहतर कर, खून के जमने या थक्का बनने से रोकता है, जो हार्ट-अटैक का कारण बनता है। यह रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक है।
*यह शरीर के अतिरिक्त वसा को भी कम करती है, जिसे आपका वजन कम होने में सहायता मिलती है। *अलसी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइटोकैमिकल्स, बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करती है, जिससे त्वचा पर झुर्रियां नहीं होती और कसाव बना रहता है। इससे त्वचा स्वस्थ व चमकदार बनती है।
*अलसी में अल्फा लाइनोइक एसिड पाया जाता है, जो ऑथ्राईटिस, अस्थमा, डाइबिटीज और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। खास तौर से कोलोन कैंसर से लड़ने में यह सहायक होता है। *सीमित मात्रा में अलसी का सेवन, खून में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। इससे शरीर के आंतरिक भाग स्वस्थ रहते हैं, और बेहतर कार्य करते हैं।
*इसमें उपस्थित लाइगन नामक तत्व, आंतों में सक्रिय होकर, ऐसे तत्व का निर्माण करता है, जो फीमेल हार्मोन्स के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ ( हरिनाम जप जरूर करें ) बिच्छू की मृत्यु बहुत ही दु:खदायी रूप में होती है। मादा बिच्छु जब बच्चो को जन्म देती है तब, ये सभी बच्चे जन्म लेते ही अपनी मांँ की पीठ पर बैठ जाते हैं। *और अपनी भूख मिटाने हेतु तुरंत ही अपनी माँ के शरीर को ही खाना प्रारम्भ कर देते हैं, और तब तक खाते हैं, जब तक कि उसकी केवल अस्थियां ही शेष ना रह जाए।
वो तड़पती है, कराहती है, लेकिन ये पीछा नहीं छोड़ते और ये उसे पलभर में नहीं मार देते बल्कि कई दिनों तक यह मौत से बदतर असहनीय पीड़ा को झेलती हुई दम तोड़ती है।
*मादा बिच्छु की मौत होने के पश्चात् ही ये सभी उसकी पीठ से नीचे उतरते हैं! *लख चौरासी के कुचक्र में ऐसी असंख्य योनियां हैं, जिनकी स्थितियां अज्ञात हैं, कदाचित् इसीलिए भवसागर को अगम और अपार कहा गया है।
*संतमत के मुताबिक यह भी मनुष्य योनि में किए गये कर्मों का ही भुगतान है। अर्थात्, इन्सान इस मनुष्य जीवन में जो कर्म करेगा, नाना प्रकार की असंख्य योनियों में इन कर्मों के आधार से ही उसे दुःख सुख मिलते रहेंगे। यह तय है! मनुष्य जन्म बड़ी मुश्किल से मिला है, ये जो गलियों में आवारा जानवर घूम रहे हैं न! इन्हें भी कभी मनुष्य जन्म मिला था… इनमें से कोई डॉक्टर था, कोई इंजीनियर, कोई कुछ और.. *इनके गुरु भी इन्हें नाम का भजन करने को कहते थे तो हँस कर जवाब देते थे कि अभी हमारे पास समय नहीं है!
*वो मनुष्य जन्म हार गए, भगवान का भजन व धन्यवाद नहीं किया, पशु योनि में आ गए। *अब देखो समय ही समय है, बेचारे गली-गली आवारा घूमते हैं, कोई धुत्कारता है.. कोई फटकारता है।
*कर्म बहुत रूला डालते हैं, किसी को नहीं छोड़ते अब नहीं समझेंगे तो कब समझेंगे…? हरिनाम का भजन कर्मफलों को भी धो डालता*
🌷जय श्री हरि🌷
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
*_यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।

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