ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 07 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 07 अप्रैल 2026
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए। *मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 04:34 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र ज्येष्ठा 05:53 AM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं, और इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता इंद्र देव हैं।
⚜️ योग – व्यातीपात योग 04:16 PM तक, उसके बाद वरीयान योग
प्रथम करण : तैतिल 04:35 PM तक
द्वितीय करण : गर 05:48 AM तक, बाद वणिज
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:56:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:21:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:34 ए एम से 05:19 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:56 ए एम से 06:05 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:58 ए एम से 12:49 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:41 पी एम से 07:04 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:42 पी एम से 07:50 पी एम
💧 अमृत काल : रात्रि 08:01 पी एम से 09:49 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:00 ए एम, अप्रैल 08 से 12:46 ए एम, अप्रैल 08
❄️ रवि योग : सुबह 05:54 ए एम, अप्रैल 08 से 06:03 ए एम, अप्रैल 08
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – विंछुड़ो/ गण्ड मूल/ रवि योग/ विडाल योग/ महिला चिकित्सा दिवस, केंद्रीय कृषि और श्रम मंत्री चतुरनन मिश्रा जन्म दिवस, पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात उर्दू कवि कश्मीरी लाल जाकिर जन्म दिवस, प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रवि शंकर जन्म दिवस, भारतीय अभिनेत्रा जितेंद्र जन्म दिवस, प्रसिद्ध कवि जानकी वल्लभ शास्त्री स्मृति दिवस, वेंकटराम पंडित कृष्णमूर्ति पुण्य तिथि, अवतारी युगपुरुष भगवान झूलेलाल जयन्ती, अभिनेता जैकी चैन जन्म दिवस, राष्ट्रीय ‘गर्ल, मी टू डे’, सौंदर्य और मातृत्व दिवस, भारत के प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर जन्म दिवस, माचिस आविष्कार दिवस, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) स्थापना दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🌸
कुछ लोग कहते हैं सफलता नहीं मिलती
हालांकि सफलता और तरक्की के लिए जन्म कुंडली का एकादश भाव देखा जाता है। लेकिन इस से पहले…
*
जन्म कुंडली में सूर्य की स्थिति तय करती है आप अंदर से कैसे हैं?
*उदाहरण हेतु यदि सूर्य कर्क राशि का है तो आप अंदर से भावनात्मक हैं, दुख देखते ही सामने वाले की मदद करना चाहते हैं। *उसके बाद कुंडली में चंद्रमा की स्थिति तय करती है जो आप अंदर से चाहते थे क्या वही वास्तव में जिया? उदाहरण हेतु यदि चंद्रमा शनि की राशि में है तो जातक सही समय का इंतजार करता है।
*हालांकि जब बात आती है सफलता नहीं मिल रही तो वहां शनि महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि शनि यह नहीं पूछता तुम रोये या नहीं, तुम दुखी हुए ना नहीं। बल्कि शनि पूछता है तुम बदले या नहीं? *आपकी जन्म कुंडली में शनि कोनसे भाव, राशि और नक्षत्र में है। और शनि के बाद कोनसा ग्रह है?
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
सुबह एक गिलास पानी में नींबू शहद डाल कर पियो पूरा दिन एनर्जी बनी रहेगी.
*
मैदा से बनी चीज मोमो, समोसा,जलेबी, चाउमीन, पिज्जा , बर्गर सीधा जहर है,इतने भयंकर नुकसान हैं इनके यह शरीर को धीरे धीरे खोखला करते हैं…मत खाओ।
*खाना खाने 30 मिनट से पहले और बाद तक पानी मत पीयो पेट को कमजोर करता है,पेट की उस गर्मी को मार देता है,जिसकी वजह से खाना पचेगा। *किसी भी सामान्य परेशानी में अंग्रेजी दवाएं मत चबाने लग जाओ इनकी असली कीमत तो 50 पैसा भी नहीं होती,लेकिन स्वास्थ्य को नुकसान करोड़ों वाला करती हैं।गंभीर बीमारी में ही अंग्रेजी दावा लेना।
*बाहर का और प्रोसेस्ड फूड जहर के समान है,वो अलग बात है कि आपको भ्रम में रखने के लिए रंगीन चित्रों और ताजे फलों के फोटू का सहारा लिया जाता है। 🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
🔹अजवायन मैक्सिकन मिंट के प्रमुख औषधीय गुण और लाभ:
◼️1. श्वसन संबंधी रोगों में राहत:
*यह सर्दी, जुकाम, खांसी, अस्थमा और साइनस की भीड़ (congestion) को कम करने में बहुत प्रभावी है।
*◼️2. पाचन में सुधार:*
*इसे चबाने या इसका काढ़ा पीने से पेट फूलना, गैस, अपच और पाचन की कमजोरी दूर होती है।
*◼️3. त्वचा की देखभाल (Skin Care):*
इसके पत्तों का पेस्ट या रस कीड़ों के काटने, त्वचा की जलन, एलर्जी, एक्जिमा, सोरायसिस और घावों को ठीक करने में मदद करता है।
◼️4. जोड़ों के दर्द में राहत:
इसके सूजन-रोधी (anti-inflammatory) गुणों के कारण, यह जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक है।
◼️5. तनाव कम करना: *इसमें मौजूद तत्व तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं, जिससे तनाव और एंग्जायटी में राहत मिल सकती है।
🌷 *
गुरु भक्ति योग* 🌸 कहा जाता है कि अंधकासुर राक्षस का वध करने के बाद भगवान शिव बहुत थक गए थे और अमरकंटक की पहाड़ियों पर विश्राम कर रहे थे। उनके माथे से गिरे पसीने की बूंदों से एक अत्यंत सुंदर कन्या का जन्म हुआ। चूँकि उन्होंने शिव के मन को ‘नर्म’ (सुख) प्रदान किया, इसलिए शिव ने उनका नाम ‘नर्मदा’ रखा। शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि प्रलय के समय भी उनका अस्तित्व समाप्त नहीं होगा। *नर्मदा का विवाह सोनभद्र (सोन नद) के साथ तय हुआ था। दोनों के बीच प्रेम था, लेकिन विवाह से पहले नर्मदा के मन में अपने होने वाले पति को देखने की इच्छा हुई।
*नर्मदा ने अपनी प्रिय सखी और दासी जुहिला को अपना संदेश और उपहार लेकर सोनभद्र के पास भेजा। साथ ही उन्होंने जुहिला को अपने आभूषण भी पहना दिए ताकि वह राजकुमारी जैसी लगे। *जब सोनभद्र ने जुहिला को सजे-धजे रूप में देखा, तो वे उसे ही नर्मदा समझ बैठे और उसके सौंदर्य पर मोहित हो गए। जुहिला के मन में भी पाप आ गया और उसने सोनभद्र को सच नहीं बताया।
*जब बहुत देर तक जुहिला वापस नहीं आई, तो नर्मदा स्वयं सोनभद्र से मिलने चल पड़ीं। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि सोनभद्र और जुहिला एक-दूसरे में मग्न हैं। अपने प्रेमी और अपनी दासी का यह विश्वासघात देखकर नर्मदा क्रोध और ग्लानि से भर गईं। *उन्होंने उसी क्षण निर्णय लिया कि वे अब कभी विवाह नहीं करेंगी और अकेली (कुमारी) ही रहेंगी।
*उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया और सोनभद्र (जो पूर्व की ओर बहते हैं) के विपरीत पश्चिम की ओर मुड़ गईं। यही कारण है कि भारत की अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं, लेकिन नर्मदा पश्चिम की ओर बहती हैं। *पौराणिक मान्यताओं में एक और चौंकाने वाली बात यह है कि गंगा में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से मिल जाता है। कथाओं के अनुसार, जब गंगा स्वयं पापियों के पाप धोकर काली हो जाती हैं, तो वे एक काली गाय का रूप धरकर नर्मदा में स्नान करने आती हैं ताकि खुद को शुद्ध कर सकें।
*_नर्मदा की कहानी एक ऐसी स्त्री की कहानी है जिसने धोखे के आगे झुकने के बजाय अपनी राह खुद चुनी। आज भी नर्मदा का “उल्टा बहना” उनके उसी स्वाभिमान और क्रोध का प्रतीक माना जाता है।
⁂❋⁂ ┄┉═•❋❋❋•═┉┈ *⁂❋⁂
⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

Related Articles

Back to top button