
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 17 अप्रैल 2026_
17 अप्रैल 2026 दिन शुक्रवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। आज स्नान -दानदि की पुण्यतमा अमावस्या है। आज शुक्रवार (शुभवार) की अमावस्या होने से सुभिक्ष एवं प्रजा में सुख रहने का योग बनता है। आज से पंचक (पचखा) उतर जाएगा। आज आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आज अमृतसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “बैशाख कृष्ण अमावस्या” की हार्दिक शुभकामनायें।।
*ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥ 🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
*शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें । *शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
*शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 05:21 PM तक उपरांत प्रतिपदा
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र रेवती 12:02 PM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र के स्वामी ग्रह बुध हैं। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पूषन (या पूषण) हैं, जिन्हें पोषण और सुरक्षा का देवता माना जाता है।
⚜️ योग – वैधृति योग 07:21 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग 03:45 AM तक, उसके बाद प्रीति योग
⚡ प्रथम करण : चतुष्पद 06:50 AM तक
✨ द्वितीय करण : नाग 05:21 PM तक, बाद किस्तुघन 03:48 AM तक, बाद बव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:45:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:26:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:25 ए एम से 05:09 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:47 ए एम से 05:54 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:55 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:22 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:47 पी एम से 07:09 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:48 पी एम से 07:54 पी एम
💧 अमृत काल : प्रातः 09:50 ए एम से 11:18 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:58 पी एम से 12:43 ए एम, अप्रैल 18 से 03:12 ए एम, अप्रैल 18 से 04:39 ए एम, अप्रैल 18
🌊 अमृत सिद्धि योग : प्रातः 05:54 ए एम से 12:02 पी एम
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दर्श अमावस्या/ अन्वाधान/ चैत्र अमावस्या/ पञ्चक समाप्ति् 12.06/ गण्ड मूल/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ आडल योग/लक्ष्मीकान्त दोलोत्सव/ राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पुण्य तिथि, भारतीय प्रधानमंत्री श्री चन्द्र शेखर जयन्ती, प्रसिद्ध भारतीय आत्मज्ञानी संत आसाराम बापू जन्म दिवस, हिन्दू कवि संत सूरदास जयन्ती, निसारगदत्त महाराज जन्म जयन्ती, बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बिनोदानंद झा जन्म दिवस, थकाजी शिवशंकर पिल्लई जन्म दिवस, बेनो जेफिन जयन्ती, (हावीर चक्र से सम्मानित) ब्रिगेडियर भवानी सिंह स्मृति दिवस, नित्यानंद महापात्रा स्मृति दिवस, समाज सुधारक वीएस श्रीनिवास शास्त्री पुण्य तिथि, मुख्य चुनाव आयुक्त वी. एस. रमादेवी स्मृति दिवस, विश्व हीमोफीलिया दिवस, राष्ट्रीय क्लासी दिवस, राष्ट्रीय चमगादड़ प्रशंसा दिवस, राष्ट्रीय चीज़बॉल दिवस, फ़ायर सर्विस सप्ताह
✍🏼 तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🛟 Vastu tips 🗽
पसीना बहाएं, ऊर्जा को दें सही दिशा: रोजाना थोड़ी एक्सरसाइज करने से शरीर और दिमाग दोनों शांत रहते हैं इससे गुस्सा कम होता है और ऊर्जा सही दिशा में लगती है।
*बुराई से दूर रहें: अगर आप 21 दिन तक किसी की बुराई नहीं करते हैं तो आपकी बातों में असर बढ़ता है और लोग आपको ज्यादा गंभीरता से सुनते हैं। *सोच का दायरा बढ़ाएं: जो भी नया सीखें उसे दूसरों के साथ साझा करें इससे आपका ज्ञान मजबूत होता है और आपकी सोच का दायरा बढ़ता है।
*जीवन में अनुशासन लाएं: दिन की शुरुआत सबसे कठिन काम से करने से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप पूरे दिन ज्यादा बेहतर काम कर पाते हैं। *खुद को मजबूत बनाएं: मोबाइल या सोशल मीडिया जैसी आदतों से कुछ दिनों का ब्रेक लेने से आपकी इच्छा शक्ति मजबूत होती है।
*मौन अपनाएं: हफ्ते में एक दिन 30 मिनट शांति से बैठना आपके मन को स्थिर करता है और आपका फोकस बढ़ाता है। *छोटे बदलाव बड़ा असर: इन आसान आदतों को अपनाकर आप अपनी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। धीरे-धीरे ये आदतें आपकी सोच और जीवन दोनों को बेहतर बना देंगी।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
⭕किसी भी प्रकार से मानसिक शांति नहीं मिल रही है, घटना दुर्घटनाएं बनी हुई है। अस्पताल के चक्कर पर चक्कर काटना पड़ रहे हैं या कोई कोर्ट कचहरी का मामला चल रहा है तो यह माना जाएगा कि कुछ न कुछ आपसे गलत होता जा रहा है। यदि आपके जीवन में कुछ भी सही नहीं चल रहा है तो यह माना जाएगा कि घर का वास्तु, कुंडली के ग्रह नक्षत्र सहित आपके कर्म भी खराब हैं। यदि कर्म अच्छे हैं तो फिर प्रारब्ध का कोई दोष है या घर परिवार पर किसी छाया का साया है। आपको इन सभी से मुक्ति के लिए 3 अूचक उपाय करने होंगे तो जीवन में तुरंत आराम मिलेगा
🚩1. हनुमान भक्ति:- *आपको अब तुरंत ही हनुमानजी की शरण में आ जाना चाहिए और प्रतिदिन सुबह हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ना प्रारंभ कर दें। इसके बाद घर में सुंदरकांड का पाठ कराएं। जब यह दोनों कार्य हो जाए तो 43 दिनों के आसपास किसी मंगलवार या शनिवार के दिन 300 बार हनुमान चालीसा का पाठ स्वयं करें, एक ही जगह पर बैठकर। पाठ करने के बाद प्रसाद वितरण करें और किसी एक बालक को भोजन कराएं
*🚩2. नारियल का उपाय:-* *एक पानीदार नारियल लें और उसे अपने उपर से 21 बार वारकर उसे बाहर कहीं होम कर लें। इसी प्रकार घर के सभी सदस्यों के सिर पर से 21 बार नारियल वारकर उसे बाहर कहीं जला दें। ध्यान रखें कि प्रत्येक सदस्य के लिए अलग अलग नारियल लें। ऐसा आप मंगलवार या शनिवार के दिन करें
*🚩3. छाया दान करें:-* *शनि के मंदे कार्य न करें, जैसे परस्त्रीगमन, शराब पीना, ब्याज का धंधा करना और किसी मनुष्य या प्राणी को सताना। घर की महिलाओं का सम्मान न करना, गंदे बने रहना, क्रोध करते रहना, किसी के प्रति मन में छल कपट रखना आदि। इस शर्त के साथ ही कम से कम 21 शनिवार को छाया दान करें। 21 शनिवार नहीं कर सकते हैं तो कम से कम 11 शनिवार को छाया दान करें। छायादान अर्थात एक कटोरी में सरसो का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा अच्छे से देंखे और फिर उस कटोरी को शाम के वक्त शनि भगवान के चरणों में रख दें। 🧆 *आरोग्य संजीवनी* 🍶 किसी को भी शरीर में हड्डी का दर्द हो चाहे कही भी हो कमर, जोड़े, घुटने, गर्दन, कही भी हो करना आपको ये है कि बबूल के पेड़ की छाल आप खरीद सकते है या खुद भी ला सकते है बबूल का पेड़ आसानी से उजाड़ स्थान पर मिल जाता है। *आपको उसे सूखा सिलपट्टे में शहद के साथ पिस कर लेप बना लेना है ये तब तक आप पिस लो कब तक यह एक दम मलिन न हो जाए और जब ये एक दम लिक्विड फॉर्म में आ जाए आप इसे एक डिब्बे में रख ले ओर रोज सुबह शाम 1 चम्मच इसको च्यवन पराश की तरह खाए 21 दिन इसका सेवन कर लो ये हड्डियों को नया बना देता है मेरा खुद का अनुभव है।
📚 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
ग्रह ‘नीच’ के क्यों होते हैं और क्यों देते हैं दुःख? एक गहरा तकनीकी और शास्त्रीय विश्लेषण
*ज्योतिष की दुनिया में ‘नीच का ग्रह’ शब्द सुनते ही लोग अक्सर सिहर जाते हैं, जैसे कोई परमानेंट सजा मिल गई हो। लेकिन 14 वर्षों के शोध और केपी पद्धति के निरंतर अभ्यास के बाद, मैं आपको इसका वह सच बताना चाहती हूँ जो किताबी ज्योतिष से बहुत अलग और तार्किक है। *ज्योतिष कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि ‘Celestial Mechanics’ यानी खगोलीय विज्ञान है।
*नीच होना क्या है हर ग्रह की एक अपनी मौलिक प्रकृति होती है। जब कोई ग्रह अपने स्वभाव के बिल्कुल विपरीत वातावरण वाली राशि में बैठता है, तो उसे ‘नीच’ का कहा जाता है। *महर्षि पराशर ने इसे ‘दुर्बल’ कहा है, ‘नष्ट’ नहीं। इसे एक उदाहरण से समझिए: सूर्य (राजा) जब ‘तुला’ (व्यापार और संतुलन की राशि) में जाता है, तो वह नीच का हो जाता है। क्यों? क्योंकि एक राजा जब तराजू लेकर व्यापार करने लगेगा, तो वह अपना तेज और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता खो देगा। यहाँ सूर्य बुरा नहीं हुआ, बस उसका वातावरण उसके ‘स्वभाव’ के अनुकूल नहीं रहा।
*ग्रह दुःख क्यों देते हैं नीच का ग्रह आपको कोई बाहरी दुःख नहीं देता, बल्कि वह आपके भीतर एक ‘अभाव’ पैदा करता है। *जब ग्रह नीच का होता है, तो वह अपनी क्रिया पर काम करता है। वह उस भाव से संबंधित फल देने में खुद को ‘अक्षम’ महसूस करता है।
*फलदीपिका के अनुसार, नीच का ग्रह अपने ‘कारकत्व’ हिम्मत को खो देता है। जैसे: नीच का चंद्रमा मन में अशांति देगा, नीच का गुरु निर्णय लेने में भ्रम पैदा करेगा। यह अभाव ही मनुष्य को ‘दुःख’ के रूप में महसूस होता है। *हर ग्रह की नीच राशि का शास्त्रीय कारण मंगल (साहस) कर्क (जल) में: मंगल की अग्नि जब कर्क के भावुक जल में मिलती है, तो पराक्रम ‘इमोशनल उथल-पुथल’ में बदल जाता है।
*बुध (तर्क) मीन (स्वप्न) में: बुध का सटीक विश्लेषण जब मीन की आध्यात्मिक और काल्पनिक दुनिया में पहुँचता है, तो तर्क धुंधला हो जाता है। *शनि (धैर्य) मेष (जल्दबाजी) में: शनि का अनुशासन जब मेष के आवेग और जल्दबाजी से टकराता है, तो कार्यों में विघ्न आने लगता है।
*नीच भंग: संघर्ष से महानता का जन्म शास्त्रों में ‘नीच भंग राजयोग’ का विधान है। मेरी रिसर्च में मैंने देखा है कि नीच के ग्रह वाले लोग अक्सर उन लोगों से ज़्यादा सफल होते हैं जिनके ग्रह उच्च के होते हैं। क्यों? क्योंकि नीच का ग्रह जातक को उस विषय में ‘Zero’ से शुरू करने और मेहनत करने पर मजबूर करता है। वराहमिहिर के अनुसार, यदि नीच ग्रह का भंग हो जाए, तो वह उच्च ग्रह से भी अधिक शक्तिशाली परिणाम देता है। अष्टकवर्ग: अंतिम निर्णय यही वह जगह है जहाँ आम ज्योतिष फेल हो जाता है। अगर कोई ग्रह नीच का है, लेकिन उसके ‘अष्टकवर्ग’ में बिंदु (Points) अच्छे हैं, तो वह कभी बुरा फल नहीं देगा। इसलिए केवल राशि देखकर डरना बेतुका है। ▬▬▬▬▬๑ ⁂❋⁂ ๑▬▬▬▬▬▬ ⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है। *ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।


