ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 09 जून 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾 *_आज का पंचाग_* 🧾        
*मंगलवार  09 जून  2026_*
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *_दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*_मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*_मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन –  उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – ज्यैष्ठ मास_*
🌓 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📅 *_तिथि – मंगलवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 02:35 AM तक उपरांत दशमी_*
✏️ *_तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 09:39 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – पूर्वाभाद्रपद का स्वामी बृहस्पति (गुरु) है, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता अज एकपाद (अजैकपाद) हैं, जो भगवान शिव या रुद्र का ही एक रूप माने जाते हैं।_*
⚜️ *_योग – प्रीति योग 08:18 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग_*
⚡ *_प्रथम करण : तैतिल 03:05 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : गर 02:35 AM तक, बाद वणिज_*
🔥 *_गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।_*
🤖 *_राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।_*
⚜️ *_दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:21:48_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:18:20_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:02 ए एम से 04:42 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:22 ए एम से 05:23 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:53 ए एम से 12:48 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:40 पी एम से 03:35 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : संध्या काल 07:17 पी एम से 07:37 पी एम_*
🌌 *_सायाह्न सन्ध्या : संध्या काल 07:18 पी एम से 08:19 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : प्रातः काल 04:37 ए एम, जून 10 से 06:12 ए एम, जून 10_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 12:00 ए एम, जून 10 से 12:41 ए एम, जून 10_*
⭐ *_सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 09:39 ए एम से 05:23 ए एम, जून 10_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 24वाँ दिन/ पञ्चक जारी/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ आडल योग/ इंटरनेट की दिग्गज कंपनी गूगल (Google) दिवस, भगवान बिरसा मुंडा की पुण्य तिथि, आधुनिक चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन स्मृति दिवस, विश्व प्रत्यायन दिवस, अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस, प्रवासी भारतीय दिवस (एनआरआई दिवस), आईपीएस अधिकारी किरण बेदी जन्म दिवस, पूर्व मिस यूनिवर्स जन्म दिवस, अभिनेत्री अमीषा पटेल जन्म दिवस, अभिनेत्री सोनम कपूर जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी बांदा सिंह बहादुर पुण्य तिथि, स्वतंत्रता सेनानी चौधरी दिगम्बर सिंह जयन्ती, भारतीय उद्योगपति अनिल मनीभाई नाईक जन्म दिवस, प्रसिद्ध शहीद स्वतंत्रता सेनानी हरि किशन सरहदी स्मृति दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।        
🏘️ *_Vastu tips_* 🏚️
वास्तुशास्त्र में उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) का संबंध वायु तत्त्व, गति, परिवर्तन, आवागमन और अस्थायित्व से माना गया है। इसी कारण प्राचीन वास्तु ग्रंथों में अतिथि कक्ष (Guest Room) के लिए इस दिशा को उपयुक्त बताया गया है। मान्यता यह है कि इस दिशा में ठहरने वाले व्यक्ति का प्रवास सामान्यतः अस्थायी रहता है और वह अपना कार्य पूर्ण करके शीघ्र प्रस्थान करता है।
*उत्तर-पश्चिम दिशा का शास्त्रीय आधार_*
*_प्राचीन वास्तु ग्रंथों में वायव्य कोण के अधिपति वायु देव माने गए हैं। वायु का स्वभाव सदैव गतिशील है, इसलिए यह दिशा स्थिरता की अपेक्षा संचरण और परिवर्तन का प्रतीक मानी जाती है।
*_मयमतम् तथा मानसार जैसे वास्तु ग्रंथों में दिशाओं के गुणों का वर्णन करते हुए वायव्य कोण को गतिशील गतिविधियों से संबंधित माना गया है।
अतिथि कक्ष के लिए उत्तर-पश्चिम क्यों?
*_वास्तु परंपरा के अनुसार: उत्तर-पश्चिम दिशा में रहने वाले व्यक्ति के मन में स्थायी रूप से बसने की प्रवृत्ति कम होती है।
*_यह दिशा आगमन और प्रस्थान दोनों का संतुलन बनाए रखती है।
*_अतिथि सम्मानपूर्वक रहें, लेकिन घर के स्थायी सदस्य जैसा अधिकार या स्थायित्व न ग्रहण करें—इस उद्देश्य से अतिथि कक्ष यहाँ रखा जाता है।
*_व्यवसायिक आगंतुकों, रिश्तेदारों अथवा अल्पकालिक मेहमानों के लिए यह दिशा अनुकूल मानी जाती है।       
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
गाय को भोजन कराना गुरुवार को गाय को पीले रंग के खाद्य पदार्थ जैसे केले, हल्दी चावल और गुड़ खिलाने से बृहस्पति का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही, गौशालाओं में दान करना या गौ रक्षा के कार्यों में भाग लेना भी बृहस्पति के प्रभाव को बढ़ाता है।
*_दान और परोपकार दान और परोपकारी कार्यों में संलग्न होना बृहस्पति के सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाता है। शिक्षा संस्थानों, मंदिरों और आध्यात्मिक संगठनों को दान करें। जरूरतमंद विद्यार्थियों और शिक्षकों को किताबें, अध्ययन सामग्री और आर्थिक सहायता प्रदान करें।
*_ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास ध्यान, योग और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी आत्मा और मन को बृहस्पति की ऊर्जा के साथ संरेखित करें। भगवान विष्णु या गुरु पर ध्यान करना आंतरिक शांति और ज्ञान प्रदान कर सकता है। निःस्वार्थ सेवा (सेवा) और आध्यात्मिक सभाओं में भाग लेना भी बृहस्पति के प्रभाव को बढ़ाता है।
*_आहार में परिवर्तन अपने आहार में पीले रंग के खाद्य पदार्थ जैसे केले, आम, हल्दी, केसर और पीली दालों को शामिल करें। विशेष रूप से गुरुवार को इन खाद्य पदार्थों का सेवन करना लाभकारी होता है। शराब, मांसाहार और मिठाइयों के अत्यधिक सेवन से बचें ताकि बृहस्पति की सकारात्मक ऊर्जा को और बढ़ावा मिल सके।        
🍃 *आरोग्य संजीवनी* ☘️
तेजपत्ता मसाला ही नहीं औषधि भी है इसके पत्तों का काढ़ा सर्दी जुकाम भगाता है . सिरदर्द हो तो इसके 4-5 पत्तों का काढ़ा पीयें और पत्ते पीसकर सिर पर लेप करें . सिर में जूएँ हो गयी हों तो 50 ग्राम पत्तों को 400 ग्राम पानी में उबालें . जब 100 ग्राम रह जाए तो सिर की जड़ों में लगा लें . एक दो घटे बाद धो दें . इसमें उबलने से पहले भृंगराज मिला लें तो और भी अच्छा है . दमा हो तो इसके 2-3 पत्ते और एक ग्राम सौंठ मिलाकर काढ़ा बनाएँ और पीयें . खांसी हो तो इसकी पत्तियों के पावडर को शहद में मिलाकर चाटें . पेट में अफारा हो तो 5 ग्राम तेजपत्ता और अदरक का काढ़ा शहद मिलाकर लें . उबकाई आती हों तो इसकी 5 ग्राम पत्तियां उबालकर सवेरे शाम लें . Kidney में पथरी हो तब भी इसकी पत्तियों का उबला पानी सवेरे शाम लें .
*_हृदय रोग होने पर या angina की समस्या में , 3-4 तेजपत्ता +2 लौंग +3-4 ग्राम देसी गुलाब की पंखुडियां मिलाकर पानी में उबालकर छानकर पीयें . गर्भाशय की शुद्धि के लिए अजवायन +सौंठ +तेजपत्ता उबालकर पिलायें . Allergy या छींकें आने पर तेजपत्ते का काढ़ा पिलायें . अफारा या वायु गोला हो तो पत्ते उबालकर सेंधा नमक मिलाकर दें . नकसीर आती हो तो इसकी पत्तियां उबालकर मसलकर छानकर पिलायें .. इसकी पत्तियों का काढ़ा जोड़ों के दर्द में भी लाभ करता है .        
📚 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
   *राहु की महादशा का अंत कैसा होता है? अगर राहु अच्छा ना हो तो आखिरी साल कैसा होता है?_*
●राहु छाया ग्रह है जिस भाव मे , जिस राशि मे विद्यमान होगा के अनुसार फल प्रदान करेगा विचारणीय तथ्य निम्नवत प्रकार से रहेगे -_*
● राहु जिस राशि मे जिस भाव मे विराजमान है उसका राशिश पत्रिका मे बलवान हो शुभ प्रभाव युक्त हो या राशिश अपनी स्थिति से राहु को द्रष्टिपात करता हो राहु उत्तम परिणाम प्रदान करने वाले रहेगे ।_*
● राहु की नक्षत्र स्थिति भी विचारणीय रहेगी नक्षत्र स्वामी की स्थिति के अनुसार राहु फल प्रदायक रहेगे ।_*
● राहु की नवांश मे स्थिति प्रभाव फल क्षमता को प्रभावित करेगा शुभ प्रभाव युक्त होने पर उत्तम फल, पीड़ित अवस्था मे कष्टदायक सिद्ध होगे ।_*
● राहु केन्द्र एवं त्रिकोण मे विद्यमान हो एवं केन्द्र- त्रिकोण के स्वामी से द्रष्ट होने पर उत्तम फलदायक रहेगे , षष्ठम, अष्टम, द्वादश विद्यमान होकर पीड़ित होने पर कष्टदायक रहेगे यह पत्रिका मे विशेष मे ग्रह परिस्थिति पर निर्भर करेगा।_*
👉🏼 आपके प्रश्न के अनुसार राहु की महादशा मे अन्तिम अन्तर दशा अर्थात मंगल अन्तर दशा जो कि दशा छिद्र की स्थिति मे सामान्य रूप से निम्नवत फल प्राप्ति की संभावनाए रहेगी –
■ राहु महादशा मे मंगल अन्तर दशा की स्थिति होने पर नाना प्रकार के उपद्रव, कार्यो के सम्पन्न करने मे जातक को ह्रास या शक्ति क्षय का अनुभव होगा , स्मरण शक्ति मे दुर्बलता , हानि भय ,राज भय , पद मुक्ति ,लोकोपवाद , उत्साह मे कमी , शारीरिक कष्ट की संभावनाए रहेगी ।
■ राहु यदि पत्रिका मे पीड़ित अवस्था मे हो तो अपनी दशा के प्रथम खण्ड मे दुखः , मध्य खण्ड मे सुख और यश तथा अन्तिम खण्ड मे माता – पिता को कष्ट , स्थान हानि रोजगार मे विघ्न बाधाओ का सामना करना पड़ता है ।
उपरोक्त फल कथन सामान्य रूप से आपके प्रश्न के अनुसार राहु अच्छी स्थिति मे न होने के फलस्वरूप बताये गये हैं पत्रिका मे मंगल का स्वामित्व , राहु मंगल का परस्पर संबंध भी विचारणीय रहेगा के अनुसार फल प्रभाव मे कमी या वृद्धि स्वाभाविक रूप से रहेगी ।
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
*_आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।।

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