मध्य प्रदेश

मुंआर में धूमधाम से मनाई गई वीरांगना रानी दुर्गावती मडावी जयंती

सिलवानी। तहसील के ग्राम मुंआर स्थित खैरो दाई टेकरी में 5 अक्टूबर को गोंडवाना साम्राज्य की महान वीरांगना रानी दुर्गावती मडावी की जयंती हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में क्षेत्र के सगा बिडार, सगा-पाड़ी, प्रबुद्धजन सहित बड़ी संख्या में सगा समाज के लोगों ने सहभागिता की।
जयंती के अवसर पर सगा समाज द्वारा भव्य रैली निकाली गई। रैली के बाजार चौक पहुंचने पर सतरंगी गोंडी ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान समाजजनों ने वीरांगना रानी दुर्गावती मडावी के शौर्य, साहस, स्वाभिमान एवं सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गोंडी भूमका रामस्वरूप पुर्ते द्वारा प्रकृति शक्ति फड़ापेन का गोगो पाटा एवं सुमरनी पाटा कर किया गया। इसके पश्चात अतिथियों को मंचासीन कर गोंडी परंपराओं के अनुरूप स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजा कुंवर धर्मवीर सिंह, अज्जुद्दी भल्लावी, नेहा अर्मा, उर्मिला दिवारे एवं सरस्वती इमने सहित विशेष अतिथि जिला पंचायत सदस्य राकेश उइके, कुंवर सूर्यजीत सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष पप्पू ठाकुर, गजराज सिंह ठाकुर, राजेश उइके, सूरज उइके एवं विजय पटेल, रामलाल उइके सहित अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
वक्ताओं ने वीरांगना रानी दुर्गावती मडावी के जीवन, संघर्ष, नेतृत्व और विचारों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। साथ ही महिलाओं की सामाजिक भूमिका, सम्मान एवं नेतृत्व, गोंडी संस्कृति और पुरखा परंपराओं के संरक्षण तथा गोंडी भाषा-बोली एवं पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में युवा पीढ़ी में सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना विकसित करने, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने तथा उनके लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने नशामुक्ति, सामाजिक एकता, आपसी सहयोग एवं सामुदायिक जिम्मेदारी को मजबूत करने का संदेश दिया।
इस दौरान ग्राम सभा की भूमिका, संवैधानिक अधिकारों की समझ, वनाधिकार कानून एवं पांचवीं अनुसूची के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी विचार रखे गए। युवाओं के शहरों की ओर बढ़ते पलायन के बीच अपनी जमीन, गांव और संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखने तथा डिजिटल युग में सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग को लेकर भी समाज को जागरूक किया गया। वक्ताओं ने यूसीसी, रूढ़ी-परंपराओं तथा गोंड समुदाय की विशिष्ट पहचान के संरक्षण और पृथक धर्म कोड जैसे विषयों पर भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत गोंडी नृत्य एवं गीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पारंपरिक प्रस्तुति ने उपस्थित समाजजनों का मन मोह लिया और कार्यक्रम स्थल पर उत्साह का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम का मंच संचालन रश्मि धुर्वे ने किया।

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