कृषिपर्यावरणमध्य प्रदेश

बिना SMS के धान कटाई करना पड़ा भारी, पुलिस ने हार्वेस्टर किया जब्त

नरवाई प्रबंधन के नियमों का उल्लंघन करने पर चालक और मालिक के खिलाफ जिले की पहली एफआईआर दर्ज, सहलावन पिपरिया में प्रशासन की कार्रवाई से हार्वेस्टर संचालकों में मचा हड़कंप
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान।  नरवाई जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने, पर्यावरण संरक्षण और खेतों में फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है ।  शासन के निर्धारित नियमों की अनदेखी कर धान कटाई करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी गई है ।  इसी क्रम में उमरियापान थाना क्षेत्र के ग्राम सहलावन पिपरिया में बिना स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) के धान की कटाई कर रहे हार्वेस्टर को पुलिस ने जब्त कर लिया । जांच के दौरान हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) के साथ बेलर मशीन भी नहीं पाई गई ।  मामले में हार्वेस्टर चालक और मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है ।  बताया जा रहा है कि नरवाई प्रबंधन के नियमों के उल्लंघन को लेकर जिले में दर्ज की गई यह पहली एफआईआर है ।
जानकारी के अनुसार ग्राम सहलावन पिपरिया में खेत में बिना एसएमएस लगाए हार्वेस्टर से धान कटाई किए जाने की सूचना पुलिस को मिली थी ।  सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हार्वेस्टर की जांच की ।  जांच के दौरान पाया गया कि हार्वेस्टर में फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आवश्यक स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम नहीं लगा था । इसके अलावा बेलर मशीन की व्यवस्था भी नहीं थी ।  नियमों के विपरीत धान कटाई किए जाने की पुष्टि होने पर पुलिस ने तत्काल हार्वेस्टर को जब्त कर लिया । इस मामले में हार्वेस्टर चालक शेख हलीम और उसके मालिक जितेन्द्र कुमार के विरुद्ध बीएनएस की धारा 223 के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई ।
*नरवाई जलाने से बढ़ता है पर्यावरण प्रदूषण*
धान की कटाई के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में फसल अवशेष यानी नरवाई बच जाती है ।  कई किसान खेत को अगली फसल के लिए जल्द तैयार करने के उद्देश्य से इन अवशेषों में आग लगा देते हैं ।  इससे वातावरण में धुआं फैलने के साथ वायु प्रदूषण बढ़ता है ।  खेतों की मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्म जीवों को भी नुकसान पहुंचता है ।  इसके अलावा आग आसपास के खेतों, पेड़-पौधों और आबादी तक पहुंचने का खतरा भी पैदा करती है ।  इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन द्वारा फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है ।
*14 अक्टूबर से नरवाई जलाने पर प्रतिबंध*
गौरतलब है कि कलेक्टर आशीष तिवारी ने 14 अक्टूबर से जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया है ।  प्रशासन की ओर से किसानों और हार्वेस्टर संचालकों को निर्देशित किया गया है कि धान की कटाई के दौरान स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) का उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें ।  इसके माध्यम से फसल के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में फैलाया जा सकता है, जिससे उनका उचित प्रबंधन और मिट्टी में मिलाने में मदद मिलती है ।  वहीं बेलर मशीन की सहायता से फसल अवशेषों को एकत्रित कर गांठों के रूप में खेत से बाहर निकाला जा सकता है ।
*अब नियमों की अनदेखी करने वालों पर होगी कार्रवाई*
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में धान कटाई कर रहे हार्वेस्टर संचालकों के बीच भी सतर्कता बढ़ने की संभावना है । जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा किसानों और हार्वेस्टर मालिकों से नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है। सहलावन पिपरिया में हुई कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि फसल कटाई के दौरान निर्धारित व्यवस्थाओं की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी ।  प्रशासन का उद्देश्य किसानों को परेशान करना नहीं, बल्कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित कर पर्यावरण और खेतों की मिट्टी को नुकसान से बचाना है ।

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