मध्य प्रदेश

दो साल बाद भी नहीं सुधरीं ग्रामीण सड़कों की हालत, बाढ़ में बह गई पुलिया

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान।  ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ग्रामीण सड़कों की बदहाल स्थिति लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है । कहीं बाढ़ में सड़क के हिस्से बह गए हैं तो कहीं पुलिया क्षतिग्रस्त होने और जगह-जगह गहरे गड्ढे होने से आवागमन बाधित हो रहा है ।  क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाले प्रमुख ग्रामीण मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों द्वारा इनकी मरम्मत और निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं की जा रही है ।
घुघरा से परसेल जाने वाला मार्ग लंबे समय से बदहाल है ।  बेलकुंड नदी में आई बाढ़ के दौरान सड़क के कई हिस्से कट गए, वहीं मार्ग पर बनी पुलिया भी बारिश के तेज बहाव में बह गई ।  इसके चलते ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । हालात यह हैं कि इस मार्ग से चारपहिया वाहन तक निकलना मुश्किल हो गया है ।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो वर्ष पूर्व कांग्रेस विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था । उस दौरान ग्रामीणों ने सड़क और पुलिया की समस्या से उन्हें अवगत कराया था । प्रशासन की ओर से मार्ग का निर्माण और आवश्यक सुधार कराने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। न तो सड़क का निर्माण कराया गया और न ही बाढ़ में बह चुकी पुलिया का पुनर्निर्माण हुआ ।
*मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में होती है परेशानी*
मार्ग की बदहाली का सबसे गंभीर असर आपातकालीन परिस्थितियों में देखने को मिलता है ।  गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होने या गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस वाहन तक गांव नहीं पहुंच पाता। ऐसे में मरीजों को दूसरे साधनों से मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है ।  बरसात के मौसम में स्थिति और भी विकट हो जाती है तथा ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित होने लगता है ।
*कई अन्य ग्रामीण मार्ग भी बदहाल, गड्ढों में तब्दील हुई सड़कें*
ग्रामीणों ने बताया कि केवल घुघरा–परसेल मार्ग ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अन्य ग्रामीण मार्गों की हालत भी चिंताजनक है ।  वरिष्ठ कांग्रेस नेता मास्टर शिवकुमार चौरसिया ने बताया कि खिरवा से बड़ी पौड़ी तथा सनकुई से हरदुआ जाने वाले मार्गों की स्थिति भी काफी खराब है ।  वहीं बरही–खाम्हा से मुरवारी जाने वाला मार्ग भी लंबे समय से जर्जर हालत में है ।  इन सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की बदहाली के कारण लोगों को रोजाना आवागमन में दिक्कत होती है ।  कई मार्गों पर बारिश के दौरान स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है ।
वहीं परसेल निवासी विजय दुबे ने बताया कि करही से नर्मदा नहर तक जाने वाली सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है ।  बारिश के मौसम में पूरा मार्ग दलदल में बदल जाता है, जिससे करही सहित आसपास के गांवों के रहवासियों को आवागमन में भारी दिक्कत होती है । दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को इस रास्ते से निकलने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है ।
*ग्रामीणों ने अधिकारियों से की शीघ्र कार्रवाई की मांग*
क्षेत्र की इन समस्याओं को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता मास्टर शिवकुमार चौरसिया, विजय दुबे, विराट पाण्डेय, जगमोहन हल्दकार, अज्जू पटेल, राजकुमार पटेल, चंद्रशेखर सोनी, शिवराम राजभर, डॉ. उमेश हल्दकार, ठाकुर सुशील सिंह, संतोष सिंह, मनोज चौरसिया, सत्तू सोनी, मोहम्मद हारून एवं उत्तम सिंह ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों और जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है ।
ग्रामीणों ने मांग की है कि घुघरा–परसेल मार्ग का शीघ्र निर्माण कराया जाए तथा बाढ़ में बह चुकी पुलिया का पुनर्निर्माण किया जाए ।  इसके साथ ही खिरवा–बड़ी पौड़ी, सनकुई–हरदुआ, बरही–खाम्हा–मुरवारी तथा करही से नर्मदा नहर तक जाने वाले मार्गों की भी प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जाए, ताकि ग्रामीणों को आवागमन की समस्या से निजात मिल सके ।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांवों को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं से जोड़ने का माध्यम हैं ।  ऐसे में जिम्मेदार विभागों को इन समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देते हुए शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को बदहाल सड़कों से राहत मिल सके ।

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