धार्मिक

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 01 मार्च 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 30 मार्च 2023

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
👣 30 मार्च 2023 दिन गुरुवार को चैत्र मास के वासन्तीय नवरात्रि का नवाँ दिन है। आप सभी सनातनी बंधुओं को वासन्तीय नवरात्रा के नवें दिन की माता चंडी की सातवीं स्वरूप माँ सिद्धिदात्री के उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – नवमी 23:53 PM बजे तक उपरान्त दशमी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी : नवमी की देवी हैं दुर्गा। नवमी तिथि में दुर्गा की पूजा करके मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है।
💫 नक्षत्र – पुनर्वसु 23:29 PM तक उपरान्त पुष्य नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है। नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता अदिति हैं।
🔊 योग – अतिगंड 01:42 AM तक उपरान्त सुकर्मा योग है।
प्रथम करण : बालव – 10:17 ए एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 11:30 पी एम तक
⚜️ दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : गुरुवार का (अशुभ गुलिक) काल 09:20 ए एम से 10:53 ए एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:53:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:07:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:41 ए एम से 05:28 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:04 ए एम से 06:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:01 पी एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:36 पी एम से 07:00 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:38 पी एम से 07:47 पी एम
💧 अमृत काल : 08:18 पी एम से 10:06 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, मार्च 31 से 12:48 ए एम, मार्च 31
🤴🏻 गुरु पुष्य योग : 10:58 पी एम से 06:13 ए एम, मार्च 31
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
🌊 अमृत सिद्धि योग : 10:59 पी एम से 06:13 ए एम, मार्च 31
❄️ रवि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-राम मंदिर में पीताम्बर भेंट कर बेसन से बनी मिठाई चढाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अमृतयोग/श्री रामनवमी/श्री दुर्गा नवमी/गुरु अस्त पश्चिम (पंचांग भेद), गुरु पुष्य योग रात्रि 10.58 से (दि. 31 मार्च 2023) सुबह 6.36 तक, चैत्री नवरात्रि समाप्ति, शहीद दिवस, भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु जैसे भारतीय क्रांतिकारियों के बलिदान दिवस, गुरु हर किशन सिंह – सिक्खों के आठवें गुरु स्मृति दिवस, देविका रानी – भारतीय अभिनेत्री जन्म दिवस, आनंद बख्शी, भारतीय गीतकार पुण्य तिथि, राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, श्री स्वामिनारायण जयन्ती, राजस्थान दिवस
✍🏼 विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
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🏹 हमारे आराध्य भगवान राम का जन्मोत्सव राम नवमी एक ऐसा त्यौहार है जिसमें पूरे भारतवर्ष में भगवान राम का जन्मदिन हर्शोल्लाश के साथ मनाया जाता है। इस दिन देश में वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के इस अवसर को काफी धूमधाम से मनाते हैं। कहा जाता है, की राम नवमी के दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। राम नवमी के दिन ही चैत्र की नवरात्रि का समापन होता है। इस दिन बहुत से हिन्दू लोग अयोध्या जाकर सरयू नदी में स्नान करते हैं। इस दिन बहुत से जगहों में व्रत भी रखे जाते हैं और नवरात्री व्रत का हवन भी कराया जाता है। ऐसी मान्यता है, कि इस दिन व्रत रखने से उपासक की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। आप सभी सनातनियों को भगवान श्रीराम के जन्म जयन्ती रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें।
🌷 Vastu tips 🌸
हिंदू धर्म में गाय को परब्रह्म का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय में समस्त 33 कोटि देवी-देवता रहते हैं। अतः गाय की सेवा से समस्त देव प्रसन्न हो जाते हैं। जन्मकुंडली में चाहे जितना बड़ा दोष हो, ग्रह प्रतिकूल हों या फिर कोई भी बुरी स्थिति हों, गाय की सेवा से सब टल जाते हैं। यही कारण है कि बड़े-बुजुर्ग और संत गायों की सेवा करने की सलाह देते हैं।
गाय को रोटी खिलाने से दूर होंगे सब कष्ट आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार आप यदि सही समय पर गाय को केवल एक रोटी खिला दें तो आपके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। उनके अनुसार गाय को पूरे दिन में विशेष मुहूर्त में रोटी खिलानी चाहिए। ऐसा करने से आपके चाहे जितने भी संकट हो, जैसा भी संकट हो, सब दूर हो जाते हैं।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
प्रेगनेंसी के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
अगर आप प्रेगनेंट हैं तो नीचे बताए गए काम बिलकुल न करें :
ज्‍यादा भारी सामान : गर्भावस्था में कमर दर्द पहले से ही रहता है। ऐसे में भारी वजन उठाना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। पानी की बाल्‍टी, राशन का सामान जैसी भारी चीजों को उठाने की गलती न करें।
केमिकल युक्‍त चीजें : साफ-सफाई के लिए केमिकल युक्‍त चीजों की बजाय प्राकृ‍तिक उत्‍पादों जैसे कि सिरके या बेकिंग सोडा का इस्‍तेमाल करें। इनके इस्‍तेमाल के दौरान हमेशा दस्‍ताने पहनकर रखें और मुंह को भी ढक कर रखें। प्रेग्‍नेंसी में आपको केमिकल युक्‍त क्‍लीनिंग प्रोडक्‍ट का इस्‍तेमाल बिलकुल नहीं करना है।
सीढियां चढ़ना : गर्भावस्था में सीढियों के लिए भी मना किया जाता है। सीढियां चढ़ने पर गिरने का खतरा रहता है इसिलए ऐसा करने से बचें।
बार-बार झुकना : सोने, झाडू लगाने, कूड़ा साफ करने या कपड़े धोने के लिए बार-बार झुकना पड़ता है। ऐसे काम करने से बचें।
घंटों तक खड़े रहना :अक्‍सर महिलाएं रसोई में काम करते समय घंटों खड़ी रहती हैं जो कि उनकी सेहत के लिए बिलकुल सही नहीं है। इससे पैरों में सूजन आ सकती है।
🍃 आरोग्य संजीवनी 🍃
होने लगता है पेट दर्द: विटामिन सी के ज़्याद इस्तेमाल से पेट में एसिडिक सिक्रीशन बढ़ने का डर रहता है क्योंकि इससे एसिडिटी की आशंका काफी ज्यादा बढ़ जाती है। नींबू में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाई जाती है। अगर इसे आप ज्यादा पिएंगे तो यह पेट में एसिडिक सिक्रीशन बढ़ा देता है। जिसकी वजह से पेट में दर्द होने लगता है। सिर्फ इतना ही नहीं इसकी वजह से उल्टी, पेट झड़ने की प्रॉब्लम शुरू हो सकती है।
कमजोर दांत और छाले: नींबू में पाया जाने वाले साइट्रिक एसिड ओरल टिश्यूज में सूजन पैदा करता है, जिस वजह से मुंह में छाले होने लगते हैं। साथ ही ज़्यादा नीम्बू पानी पीने से आपके दांत भी कमजोर हो सकते हैं।
डिहाइड्रेशन: गर्मियों के मौसम में नींबू पानी पीने की सलाह दी जाती है। लेकिन ज्यादा नींबू पानी डिहाइड्रेशन की वजह बन सकता है। इसका ज्यादा सेवन करने से बार-बार पेशाब लग सकती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आज बासन्तीय नवरात्रा की नवमी तिथि है और माता सिद्धिदात्री का दिन है। यही माता सभी सिद्धियों की स्वामिनी हैं और इनकी पूजा से ही भक्तों को इन सिद्धियों की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। माता दुर्गा की नवम शक्ति का ही नाम सिद्धिदात्री है और यही माता अपने उपासकों को सहज ही सम्पूर्ण सिद्धियों को देनेवाली हैं। सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली माता इन्हीं को माना गया है।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व इन आठ सिद्धियों को भगवान शिव ने इन्हीं माता की कृपा से प्राप्त किया था। इन्हीं की अनुकम्पा से भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर बने थे। इसी कारण भगवान शिव संसार में अर्द्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए। माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं और इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर आसीन होती हैं।
इनकी दाहिनी नीचे वाली भुजा में चक्र, ऊपर वाली भुजा में गदा और बांयी तरफ नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प शोभायमान होता है। नवरात्रि पूजन के नवें दिन इनकी पूजा की जाती है। आज के दिन भगवती माता सिद्धिदात्री का ध्यान-पूजन-अर्चन और बन्दन करने से भक्त का “निर्वाण चक्र” जाग्रत हो जाता है।
मां दुर्गा शेरावाली मईया जगत के कल्याण हेतु नव रूपों में प्रकट हुई और इन नव रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का। यह देवी प्रसन्न होने पर सम्पूर्ण जगत की रिद्धि-सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है देवी ने सिद्धिदात्री का यह रूप भक्तों पर अपनी कृपा बरसाने के लिए धारण किया था। देवता, ऋषि-मुनि, असुर, नाग और मनुष्य सभी मां के भक्त हैं।
इनकी भक्ति जो भी हृदय से करता है मां उसी पर अपना नेह लुटाती हैं। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं उन्हें नवमी के दिन निर्वाण चक्र का भेदन करना चाहिए। दुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष रूप से नवरात्री उपवास और पूजन के सम्पूर्ण फल की प्राप्ति के उद्देश्य से हवन किया जाता है। हवन से पूर्व सभी देवी दवाताओं एवं माता की पूजा करनी चाहिए।
हवन करते समय सभी देवी दवताओं के नाम से हवि अर्थात आहुति देनी चाहिए। सभी आवाहित देवी-देवताओं की आहुति के बाद माता के नाम अथवा नवार्ण मन्त्र से आहुति देनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप हैं अत: आप सप्तशती के सभी श्लोकों से आहुति दे सकते हैं। समयाभाव में आप देवी के बीज मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” से कम से कम 108 बार हवन कर सकते हैं।
जिस प्रकार पूजा के क्रम में भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा सबसे अंत में होती है उसी प्रकार अंत में इनके नाम से आहुति देकर सपरिवार आरती एवं क्षमा प्रार्थना करें। हवन में जो भी प्रसाद आपने चढ़ाया है उसे बाटें और जब हवन की अग्नि ठंढ़ी हो जाए तो इसे पवित्र जल में विसर्जित कर दें। यह भष्म रोग, संताप एवं ग्रह बाधा से आपकी रक्षा करता है एवं मन से सभी भयों को दूर कर देता है।
जैसा कि पहले भी हमने बताया है, कि नवरात्रि के इन दिनों में माँ दुर्गा, माँ शारदा एवं माता महालक्ष्मी जी की पूजा बड़े धूम-धाम से पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इन दिनों में लगभग सभी सनातनी लोग देवी माँ का उपवास रखते हैं और विधिपूर्वक ढंग से आराधना एवं पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी माँ कि प्रशन्नता प्राप्त करने के लिए उपवास रखें जाते हैं।
इससे देवी माँ की कृपा सदा ही बनी रहती है और आदि शक्ति की कृपा से ही इस संसार रूपी भव सागर को पार किया जा सकता है। सात दिनों तक उपवास रख कर आठवें दिन अष्टमी को कन्याओं का भोज करवाया जाता है। कई लोग नवमी पर भी कन्याओं को भोजन करवाते हैं क्योंकि दुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है। जिन्हें शतावरी या नारायणी भी कहा जाता है और नव दिनों की तपस्या का सम्पूर्ण फल भी यही देती हैं।
शतावरी बल बुद्धि एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि मानी जाती है और इस औषधि को हृदय की गति तेज करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान कर माता भक्तों को को निहाल कर देती हैं। आज के पहले माता के अन्य अष्ट स्वरूपों की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना करते हैं।
इन सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक-पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। माता सिद्धिदात्री की सेवा जो मनुष्य नियमपूर्वक करता है, उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। संसार के दु:खों से पीड़ित व्यक्ति को आज माता सिद्धिदात्री देवी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।
नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।

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