Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 03 अगस्त 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 03 अगस्त 2023
03 अगस्त 2023 दिन गुरुवार को अधिक श्रावण मास के कृष्ण पक्ष कि द्वितीया तिथि है। आज अशुन्यशयन व्रत है (चन्द्रोदय रात्रि 08:17 बजे)। आज भगवान श्रीसूर्यनारायण पुष्य नक्षत्र को छोड़कर अश्लेशा नक्षत्र में (रात्रि: 04:37 मिनट पर) चले जायेंगे। स्त्री-पु., सूर्य-चन्द्र योग, महिष वाहन, जल नाड़ी, तदिशों बुधः अतः सुवृष्टि योग:। आप सभी सनातनियों को अश्लेशा नक्षत्र मे सूर्य देवता के प्रवेश होनेपर सुंदर वर्षा के योग की हार्दिक शुभकामनायें।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 04:17 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि का स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी और तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र धनिष्ठा 09:56 AM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल हैं और देवता वसु हैं। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देव अष्ट वसवाल हैं और राशि स्वामी शनि हैं।
🔕 योग : सौभाग्य योग 10:17 AM तक, उसके बाद शोभन योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 06:09 ए एम तक गर – 04:16 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 02:28 ए एम, अगस्त 04 तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:15:04
🌅 सूर्यास्त – सायं 19:13:09
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:19 ए एम से 05:01 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:40 ए एम से 05:43 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:11 पी एम से 07:32 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 07:11 पी एम से 08:14 पी एम
💧 अमृत काल : 12:46 ए एम, अगस्त 04 से 02:11 ए एम, अगस्त 04
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, अगस्त 04 से 12:49 ए एम, अगस्त 04
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में स्वर्ण का मोती चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अशुन्यशयन व्रत, शुक्रास्त (पश्चिम दिशा)/शुभ-मांगलिक कार्य वर्जित/ भारतीय क्रिकेटर बलविंदर संधू जन्मोत्सव, भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी श्रीप्रकाश जयन्ती, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जयन्ती, भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बनारसी दास पुण्य तिथि, श्रीलसनातन गोस्वामी का तिरोभाव दिवस, वायु-परीक्षा दिवस, तेरापंथ स्थापना दिवस (जैन), बौद्धों का धर्मचक्र-प्रवर्तन दिवस (सारनाथ), नाइजर स्वतंत्रता दिवस, मुक्ति दिवस, राष्ट्रीय तरबूज दिवस, विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह), हृदय प्रत्यारोपण दिवस (भारत)
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षणदोनों त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानीजाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी हैं। यह द्वितीया तिथि भद्रानाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्णपक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🌷 Vastu Tips 🌸
वास्तु शास्त्र के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक यानी बिजली से जुड़े सामान या गर्मी उत्पन्न करने वाले उपकरणों को उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से पुत्र पिता की आज्ञा नहीं मानता और उनका अपमान करता है। साथ ही बेडरूम में कभी भी कांच या मिरर ऐसी जगह पर न रखें जहां से बेड दिखता हो। इससे घर में निगेटिव एनर्जी फैलती है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी उत्पन्न होती हैं।
इसके अलावा यदि आपका प्लॉट उत्तर व दक्षिण दिशा की ओर से संकरा तथा पूर्व व पश्चिम दिशा में लंबा है तो ऐसी जगह को सूर्य़भेदी कहा जाता है। आपके प्लॉट या घर की यह बनावट भी पिता-पुत्र के संबंधों में अनबन की स्थिति पैदा करने वाली होती है।
उत्तर पूर्व दिशा में न रखें जूते-चप्पल
भूलकर भी घर की उत्तर पूर्व दिशा में न ही जूते-चप्पल रखने चाहिए और न ही जूते-चप्पल का स्थान बनाना चाहिए। इसके अलावा इस दिशा में गंदी चीजे या कूड़ादान भी नहीं रखना चाहिए। क्योंकि इस दिशा में गंदगी होने से यह दिशा दूषित हो जाती है, जिसके चलते आपके घर की आर्थिक स्थिति खराब होने लगती है।
उत्तर-पूर्व दिशा को न रखें गंदा
उत्तर-पूर्व दिशा में बिल्कुल भी गंदगी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही धन का प्रवाह धीमा हो जाता है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
इन चीजों का दान आपको बना सकता है पाई-पाई का मोहताज बासी या खराब भोजन कभी किसी गरीब का दान में न दें। ऐसा करने से आपके परिवार का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। खराब भोजन का दान आपके घर में बीमारी ला सकता है।
हिंदू धर्म में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। तो झाड़ू का दान करने से आपके घर में आर्थिक संकट के बादल छा सकते हैं। प्लास्टिक, स्टील, कांच और एल्युमिनियम से बने बर्तनों का दान बिल्कुल भी न करें। इन बर्तनों को दान में देने से आपके कारोबार में घाटा हो सकता है। साथ ही परिवार की सुख-शांति छिन सकती है।
इस्तेमाल किया हुआ या खराब तेल का दान न करें। वरना आपको शनिदेन का प्रकोप झेलना पड़ सकता है।
कभी भी पहने गए या फटे हुए कपड़े किसी पंडित या महात्मा को दान में न दें। ऐसा करना शुभ नहीं होता है।हालांकि कोई जरूरतमंद है तो उसे पुराना या इस्तेमाल किया कपड़ा दान में दिया जा सकता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
वजन का कम होना वजन का कम होना एड्स की बीमारी का एक गंभीर लक्षण है। क्योंकि इम्यून सिस्टम सही से काम नहीं करता है तो, मेटाबोलिक प्रोसेस भी गड़बड़ रहता है और इससे खाना शरीर को नहीं लगता और वजन तेजी से कम होता है।
स्किन पर लाल चक्कतेदार दाने त्वचा पर लाल दाने या धब्बों का होना, एड्स के भी लक्षण हो सकते हैं। ये आपकी स्किन के नीचे, मुंह में नाक या पलकों के अंदर लाल, भूरे, गुलाबी या बैंगनी रंग के धब्बों के रूप में हो सकते हैं।
एक हफ्ते से ज्यादा रहने वाला डायरिया- एड्स की बीमारी में 1 हफ्ते से ज्यादा रहने वाला डायरिया, गंभीर लक्षण के रूप में उभर सकता है। दरअसल, जब शरीर में आपके इंफेक्शन हो, इम्यून सिस्टम हमला कर रहा हो तो मेटाबोलिक प्रोसेस भी डैमेज होगा और पेट खराब रह सकता है।
थकान और कमजोरी-थकान और कमजोरी, एड्स के गंभीर बीमारियों में से एक हो सकता है। क्योंकि शरीर न खाना सही से पचा रही होती है और न शरीर में कोई एनर्जी रहती है तो लंबे समय तक थकान और कमजोरी हो सकती है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
जिन दुर्वासा के क्रोध से सृष्टि के जिव कांपते थे वो ही तब अपनी पत्नी के क्रोध से कांपते थे, कांपते इसलिए थे की उन्होंने वरदान दे दिया था और वो कुछ नहीं कर सकते थे. आलम ये था की दुर्वासा ने 100 से ज्यादा गलतिया (पत्नी की) माफ़ की लेकिन एक दिन उनका पारा असहनीय हो गया और उन्होंने तब अपनी ही पत्नी कंदली को भस्म कर दिया.
तभी उनके ससुर आ पहुंचे और दुर्वासा की ये करनी देख उन्होंने उन्हें श्राप दे दिया और कहा की तुमसे सहन नहीं हुई तो उसका त्याग कर देना चाहिए था इसे मारा क्यों. इसी गलती के चलते दुर्वासा को अमरीश जी से बेइज्जत होना पड़ा था, अन्यथा रुद्रावतार का सुदर्शन क्या कर सकता था.
उस घटना के दिन से ही कंदली की राख कंदली जाती बन गई और आज भी वो जाती मौजूद है……. इसके आलावा श्री कृष्ण की वो बहिन (यशोदा की बेटी) जिसे कंस ने मारना चाहा था बाद में वासुदेव देवकी ने पाला और दुर्वासा से ही उनका तब विवाह हुआ था. उसका नाम था एकविंशा है न अद्भुद कथा…
कर्ण से प्रेरित दुर्योधन ने योजनाबद्ध तरीके से दुर्वासा ऋषि और उनके हजारो शिष्यों को वनवासी पांडवो के पास तब भेजा जब वो भोजन कर चुके थे. हालाँकि पांडवो के पास अक्षय पात्र था लेकिन जब तक द्रौपदी न खाली तब तक ही उसमे भोजन रहता था और द्रौपदी तब खा चुकी थी.
ऐसे में दुर्वासा पहुँच गए और स्नान के लिए नदी किनारे गए तो द्रौपदी ने श्री कृष्ण को याद किया, श्री कृष्ण उस समय भोजन की थाली पर बैठे थे और थाली छोड़ कर अपनी परम भक्त की मदद को पहुँच गए. श्री कृष्ण ने तब अक्षय पात्र में बचे तिनके को खाकर अपनी और समस्त संसार की भूख शांत कर दी जिसमे दुर्वासा जी भी शामिल थे.
लेकिन दुर्वासा जान गए थे श्री कृष्ण की ये करनी, तब दुर्वासा जी ने श्री कृष्ण से कहा की शास्त्रों का लेख है की परोसी हुई थाली नहीं छोड़नी चाहिए और किसी का झूठा नहीं खाना चाहिए. आपने ऐसा किया है इसलिए आप को मेरा श्राप है की भोजन केलिए लड़ते हुए ही आपका वंश नाश हो जायेगा और ऐसा ही हुआ था.
लेकिन श्री कृष्ण सशरीर ही गोलोक गए थे हालाँकि कई जगह उन्हें देह त्याग की भी बात लिखी गई है, इसलिए परोसी हुई थाली न छोड़े और किसी का जूठा भी न खाये.
इति समाप्ति्
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।
शास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।


