Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 16 फरवरी 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 16 फरवरी 2023
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
🚩 16 फरवरी 2023 दिन गुरुवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष कि विजया नाम का एकादशी व्रत सबके लिए है। आप सभी एकादशी व्रतियों को विजया एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें। शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक व्यक्ति को अवश्य करना चाहिये।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – उत्तरायण
🌦️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन माह
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – एकादशी 22:14 PM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी – एकादशी तिथि के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु हैं। यह आनन्दप्रदा अर्थात सुख देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – मूल 18:44 PM तक उपरान्त पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी – मूल नक्षत्र का स्वामी केतु है और राशि स्वामी गुरु है।
🔊 योग – वज्र 24:05 PM तक उपरान्त सिद्धि योग है।
⚡ प्रथम करण : बव – 04:15 पी एम तक
✨ द्वितीय करण – बालव – 02:49 ए एम, फरवरी 17 तक
⚜️ दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : गुरुवार का (अशुभ ) काल 09:47 ए एम से 11:11 ए एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:24:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:36:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:17 ए एम से 06:08 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:42 ए एम से 06:59 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:58 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:27 पी एम से 03:12 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:09 पी एम से 06:35 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:12 पी एम से 07:28 पी एम
💧 अमृत काल : 04:59 पी एम से 06:27 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 17 से 01:00 ए एम, फरवरी 17
☄️ व्याघात योग- आज सुबह 10 बजकर 1 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विप्र को स्वर्ण भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विजया एकादशी व्रत(स्मार्त/वैष्णव)/ दादा साहब फाल्के पुण्य तिथि, मराठा सामाज्य के चौथे पेशवा थोरले माधवराव जन्म दिवस, अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध चित्रकार गुलाम मोहम्मद शेख़ जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी साधु वासवानी स्मृति दिवस, वैज्ञानिक मेघनाद साहा पुण्य तिथि, शरत चंद्र चट्टोपाध्याय जन्म दिवस, उत्पादकता सप्ताह, मूल समाप्त
✍🏼 विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।
🏘️ Vastu tips ⛲
जानिए वास्तु से जुड़े नियम— वास्तुशास्त्र के अनुसार रसोई और बाथरूम हमेशा ही घर की पश्चिम दिशा में होना चाहिए इस स्थान पर इनका होना शुभ माना जाता है मगर इस बात का भी ध्यान रखें कि रसोई और बाथरूम आमने सामने न हो इसे अच्छा नहीं माना जाता है वास्तु की मानें तो घर के खिड़की और दरवाजे हमेशा ही उत्तर दिशा में होने चाहिए इसके अलावा घर की बालकनी, वॉश बेसिन भी आप इसी दिशा में रख सकते है इसे शुभ माना जाता है घर का मेन गेट हमेशा ही उत्तर दिशा में होना चाहिए इस दिशा को मुख्य द्वार के लिए शुभ माना जाता है।
घर में पूजा का स्थान हमेशा ही उत्तर पूर्व यानी की ईशान कोण में होना चाहिए इस दिशा को जल का स्थान भी माना जाता है आप इस दिशा में बोरिंग, स्वीमिंग पूल और पूजन का मंदिर भी बना सकते है घर का मुख्य द्वार आप पूर्व दिशा में कर सकते है इस दिशा को सकारात्मकता का संचार करने वाला माना जाता है अगर आप इस दिशा में द्वार नहीं बना सकते है तो खिड़की जरूर लगवाएं। वही आप उत्तर पश्चिम दिशा में बेडरूम, गैरेज, गौशाला आदि बनवा सकते है इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सपने में खुद की बारात देखना सपने में खुद की बारात देखना भी बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा सपना बताता है कि समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ने वाला है। आने वाले समय में आपके सोशल नेटवर्क का दायरा बढ़ेगा, जिसके कारण आपको आने वाले समय में लाभ मिलेगा। वहीं यदि सपने देखने वाला एक पहले से शादीशुदा है तो यह अशुभ संकेत हो सकता है।
दूल्हे की ड्रेस यदि किसी जातक ने सपने में खुद को खुशहाल और खुशमिजाज शादी की पोशाक में देखा है तो यह आशावादी दृष्टिकोण को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यदि एक उदास है और सामान्य पोशाक के साथ खुद की शादी होते हुए देखता है तो किसी अशुभ घटना के संकेत भी हो सकते हैं।
खुद की शादी देखें तो रहें सावधान स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई ना कोई मतलब जरूर होता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में खुद की शादी होने का सपना शुभ नहीं होता है। खुद की शादी का सपना भविष्य में होने वाली किसी घटना की ओर संकेत करता है। ऐसे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
सपने में दोस्त की शादी देखना स्वप्न शास्त्र के मुताबिक सपने में यदि दोस्त की शादी देखते हैं तो यह भी शुभ नहीं होता है। ऐसा होने पर आपके किसी कार्य में बाधा आ सकती है।
शादी के जोड़े में किसी को देखना सपने किसी महिला को शादी के जोड़े में देखना शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि जल्द ही आपके जीवन में खुशियां आ सकती है और संतान पक्ष से भी कोई शुभ समाचार मिल सकता है।
🧉 आरोग्य संजीवनी 🥃
कैस्टर ऑइल है रामबाण एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर कैस्टर ऑइल हड्डियों के असहनीय दर्द को कम करने में बेहद मददगार हैं। कैस्टर ऑयल यानी अरंडी के तेल से बॉडी के जॉइंट्स पर मसाज कर पुराने से पुराने दर्द को कम किया जा सकता है। यदि इसका सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो अर्थराइटिस के दर्द से आसानी से छुटकारा मिल सकता है।
हफ्ते में ही दिखता है असर अगर आप 1 हफ्ते तक लगातार इस ऑइल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो अर्थराइटिस के दर्द से आसानी से छुटकारा मिल सकता है। जहां आपको बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है उस एरिया पर कैस्टर ऑइल को हल्का गुनगुना कर मसाज करें। इससे जोड़ों में होने वाली सूजन और अकड़न को भी ठीक किया जा सकता है। चार हफ्ते तक दिन में तीन बार मसाज करने से मांसपेशियों को दोबारा एक्टिव करने में मदद मिल सकती है।
मसाज के बाद करें सिकाई अर्थराइटिस का दर्द असहनीय होता है। कई बार ये इतना बढ़ जाता है कि लोगों का उठना-बैठना भी मुश्किल हो जाता है। जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए कैस्टर ऑयल से मसाज के बाद गर्म पानी की थैली से सिकाई की जा सकती है। मसाज के बाद सिकाई करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन में भी सुधार होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
इस धरती पर जिसने भी जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और यह कटु सत्य है इसको कोई भी मिटा नहीं सकता है लेकिन अगर व्यक्ति को जीवन के रहस्यों के बारे में जानना है तो उसे रोजाना एक नया जन्म लेना पड़ेगा।
कहने का अर्थ यह है कि मनुष्य को किसी न किसी रूप में अपना सुधार करने के लिए प्रतिदिन प्रयास करना जरूरी है, धार्मिक और आध्यात्मिक तौर पर जीवन और मृत्यु के विषय में जानने के लिए एक ही मार्ग है और वह ध्यान मार्ग है, तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा जीवन मृत्यु से जुड़े रहस्य के बारे में आचार्य श्री गोपी राम बता रहे है तो आइए जानते है।
आध्यात्मिक तौर पर देख जाए तो व्यक्ति जीवन और मृत्यु में निरंतर जन्म लेते रहते है, मृत्यु एक बहुत गलत प्रयुक्त नाम हे क्योंकि मृत्यु है ही नहीं, जब मनुष्य जीवन से थक जाता है तो वह अपने शरीर रूपी ऊपरी चोले को उतार कर सूक्ष्म जगत में वापस चले जाते है यह भी कहा जा सकता है कि मृत्यु से केवल भौतिक शरीर का अंत हो जाता है मगर अमर आत्मा मृत नहीं हो सकती है हर रात नींद में आत्मा भौतिक शरीर की चेतना के बिना रहती है लेकिन यह मृत नहीं मानी जाती है।
मृत्यु बस केवल एक लंबी निद्रा है जिसमें आत्मा भौतिक शरीर की चेतना के बिना, सूक्ष्म शरीर में वास करती है जब मनुष्य सोता है तो वह मरा नहीं होता है और न ही वह पूरी तरह से अचेत होता है क्योंकि जब मनुष्य जागता है तो उसे इस बात का ध्यान रहता है कि उसे अच्छी नींद आई है या नहीं। ठीक इसी तरह से मृत्यु के बाद की अवस्था में भी व्यक्ति मरता नहीं है बल्कि उसका शरीर नष्ट हो जाता है और आत्मा दूसरा शरीर धारण कर फिर इस जगत में जन्म लेती है और यही चक्र जीवन भर चलता रहता है।
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।


