धार्मिक

Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 23 मार्च 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 23 मार्च 2023

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
👣 23 मार्च 2023 दिन गुरुवार को चैत्र मास के वासन्तीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। आप सभी सनातनी बंधुओं को वासन्तीय नवरात्रा के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – द्वितीया 20:03 PM बजे तक उपरान्त तृतीया तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा।तिथियों का क्षय और वृद्धि स्वयं सूर्यनारायण ही करते हैं। अत: वे सबके स्वामी माने जाते हैं।
💫 नक्षत्र – रेवती 15:45 PM तक उपरान्त अश्विनी नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है।नक्षत्र के प्रथम चरण के स्वामी गुरु हैं।
🔊 योग – ब्रह्म 07:45 AM तक उपरान्त ऐन्द्र योग है।
प्रथम करण : बालव – 07:16 ए एम तक कौलव – 06:20 पी एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 05:35 ए एम, मार्च 24 तक
⚜️ दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : गुरुवार का (अशुभ काल) 09:25 ए एम से 10:56 ए एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:59:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:01:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:48 ए एम से 05:35 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:11 ए एम से 06:22 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:04 पी एम से 12:52 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:33 पी एम से 06:56 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:34 पी एम से 07:44 पी एम
💧 अमृत काल : 11:53 ए एम से 01:23 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, मार्च 24 से 12:51 ए एम, मार्च 24
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को केसर भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/ (चैत्र, नवरात्रि शुक्ल द्वितीया), मत्स्य जयन्ती, स्वतंत्रता सेनानी राम मनोहर लोहिया जन्मोत्सव, अभिनेत्री कंगना राणावत जन्म दिवस, (स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी)डॉ राममनोहर लोहिया जन्म दिवस, स्वतंत्रता आंदोलन क्रांतिकारी भगत सिंह शहादत दिवस, राजगुरु और सुखदेव शहादत दिवस, नेशनल चिप एंड डिप डे, स्वतंत्रता सेनानी बसंती देवी जन्म दिवस, ब्रिगेडियर राय सिंह यादव (महावीर चक्र’ से सम्मानित भारतीय सेना अधिकारी) स्मृति दिवस, विश्व मौसम विज्ञान दिवस, शहीद दिवस, पंचक समाप्त
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी हैं। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
⚜️ नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। इससे ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तपस्या करने वाली। नवरात्रि में माँ दुर्गा पूजा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। मां ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है।
मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का है जो पूर्ण रूप से ज्योतिर्मय है। मां ब्रह्मचारिणी सदैव शांत और संसार से विरक्त होकर तपस्या में लीन रहती हैं। कठोर तप के कारण इनके मुख पर अद्भूत तेज और एक दिब्य आभामंडल विद्यमान रहता है। मां के हाथों अक्ष माला और कमंडल होता है। मां को साक्षात ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है और ये तपस्या की प्रतिमूर्ति हैं।
माताजी के इस ब्रह्मचारिणी स्वरूप की उपासना करके भक्त जन सहज की सिद्धि प्राप्त कर लेते हैं। मां ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारद जी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी।
🏘️ Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए दक्षिण-पश्चिम, यानी कि दिशा के बारे में। दक्षिण-पश्चिम दिशा को भारी सामान रखने के लिए सबसे उचित दिशा माना जाता है। घर बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि वहां के दक्षिण-पश्चिम हिस्से को ऊंचा रखना चाहिए। साथ ही इस दिशा की दिवारों को अन्य दिशाओं की दिवारों से मोटा बनाया जाना चाहिए। अगर आपके घर में सीढ़ियां बनायी जानी है, तो वो भी घर की इसी दिशा में बनवाएं। आप चाहें तो इस दिशा में एक स्टोर रूम भी बनवा सकते हैं, जिसे भारी सामान रखने के लिए उपयोग में लाना चाहिए।
इस दिशा को भारी सामान रखने के लिये क्यों उपयोग में लाना चाहिए, इसके पीछे एक साइंटिफिक फैक्ट भी है। दरअसल पृथ्वी जब सूर्य की परिक्रमा दक्षिण दिशा में करती है तो पृथ्वी एक विशेष कोणीय स्थिति में होती है, लेकिन इस दिशा में भार रखने से वह संतुलन में आ जाती है। साथ ही इस दिशा में गर्मियों में ठंडक जबकि सर्दी के मौसम में गर्माहट रहती है, जिसके चलते भारी सामान की ऊर्जा में भी संतुलन बना रहता है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
चिंता, चिडचिडापन व तनाव कम करने हेतु
जो व्यक्ति स्नान करते समय पानी में ( 5 मि.ली.) गुलाबजल मिलाकर ‘ॐ ह्रीं गंगायै ॐ ह्रीं स्वाहा |’ यह मंत्र बोलते हुए सर पर जल डालता है, उसे गंगा-स्नान का पुण्य होता है तथा साथ ही मानसिक चिंताओं में कमी आती है और तनाव धीरे-धीरे दूर होने लगता है, विचारों का शोधन होने लगता है, चिडचिडापन कम होता है तथा वह अपने – आपको तरोताजा अनुभव करता है |
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
आंखों की जलन को दूर करेंगे ये उपाय
ठंडे पानी का इस्तेमाल: आंखों में अगर जलन या थकान हो तो आप आंखों में पानी के छींटे डालें। इससे आंखों में ठंडक पहुंचेगी और आप बेहतर महसूस करेंगे। आप हाइड्रेशन का भी ख्याल रखें और भरपूर पानी पिएं। इससे शरीर डिटॉक्‍स होगा और परेशानी घटेगी।
खीरा का इस्तेमाल: आप खीरे की मदद से भी आंखों की जलन और थकान को दूर कर सकते हैं। खीरे की पतली स्लाइस काट लें और इसे फ्रिज में रख दें। जब भी आंखों में जलन हो आप इन स्लाइस को आंखों के ऊपर रखें। 10 से 15 मिनट तक आंखों को बंद कर आराम करें। आंखों को ठंडक मिलती है।
आलू का इस्तेमाल: खीरे की तरह आलू की स्लाइस भी आंखों पर रखे जा सकते हैं और यह भी भरपूर आराम देगा। आलू के रस को आंख पर लगाया जा सकता है और इससे भी जलन और दर्द में राहत मिल सकती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हमने अपने ग्रंथों में कई बहुत ही साधारण लेकिन अत्यन्त महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। इन बातों को जीवन में उतार लिया जाए तो व्यक्ति को कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। जानिए आचार्य श्री गोपी राम की नीतियों में दी गई ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में
नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम् ।
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः ॥
आचार्य श्री गोपी राम कहते हैं कि व्यक्ति को अपने व्यवहार में बहुत ही भोला या सरल ह्रदय नहीं होना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को सदैव नुकसान होता है। ध्यान रहें कि जंगल में सीधे पेड़ पहले काटे जाते हैं, जबकि आड़े या तिरछे पेड बच जाते हैं।
कामधेनुगुना विद्या ह्यकाले फलदायिनी।
प्रवासे मातृसदृशी विद्या गुप्तं धनं स्मृतम्॥
अर्थात् विद्या कामधेनु गाय के समान है जो प्रत्येक परिस्थिति और मौसम में व्यक्ति को अमृत प्रदान करती है। वह व्यक्ति का माता के समान रक्षण करती है। अतः विद्या को गुप्त धन कहा गया है।
यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥
अर्थात् कभी भी निर्णय लेते समय सही और गलत की पहचान करना न भूलें। जो व्यक्ति निश्चित को गलत मान कर अनिश्चित पर दांव लगाता है, उसका सभी कुछ नष्ट हो जाता है। यानि व्यक्ति को बिना सोचे-समझे निर्णय नहीं लेना चाहिए।
आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ।
पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार किसी व्यक्ति को कितनी आयु, कर्म, धन तथा विद्या प्राप्त होगी, यह सब बातें उसकी माता के गर्भ में आने से पहले निश्चित हो जाती हैं। कोई व्यक्ति चाहकर भी इन्हें नहीं बदल सकता।
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🔱 प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।
ज्योतिषशास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।

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