Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 26 दिसम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 26 दिसम्बर 2023
26 दिसम्बर 2023 दिन मंगलवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। आज स्नान-दानादि की पुण्यतमा पूर्णिमा है। आज श्रीदत्त भगवान (दत्तात्रेय) की जन्म जयन्ती है। यह जयन्ती का कार्यक्रम यह उत्सव अथवा पूजा विधि सायंकालीन प्रदोष काल में ही मनाया जायेगा। आप सभी सनातनियों को “पूर्णिमा एवं श्रीदत्त भगवान अर्थात दत्तात्रेय जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌝 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष दिन मंगलवार पूर्णिमा तिथि 06:03 AM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ पूर्णिमा तिथि के देवता हैं चंद्रमा। इस तिथि में चंद्रदेव की पूजा करने से मनुष्य का सभी जगह आधिपत्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 10:21 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है।जो व्यक्ति मृगशिरा नक्षत्र में जन्म लेते हैं उनपर मंगल का प्रभाव देखा जाता है
🔊 योग – शुक्ल योग 03:21 AM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 05:51 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 06:02 ए एम, दिसम्बर 27 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:00 ए एम से 05:52 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:26 ए एम से 06:44 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:39 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:08 पी एम से 02:52 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:47 पी एम से 06:13 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:49 पी एम से 07:07 पी एम
💧 अमृत काल : 01:18 पी एम से 02:56 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:43 ए एम, दिसम्बर 27
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में शहद चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – व्रत पूर्णिमा/भद्रा/ श्री दत्त जयन्ती/ पूर्णिमा प्रारंभ सुबह 05.46/ वीर बाल दिवस, मुग़ल सम्राट बाबर स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद ऊधम सिंह जयन्ती, गुरु गाेविन्द सिंह जयन्ती, ‘गाँधी स्मारक निधि’ गोपी चन्द भार्गव स्मृति दिवस, स्लोवेनिया स्वतंत्रता और एकता दिवस, बॉक्सिंग डे’
✍🏼 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
मान लीजिये अगर आप घर में काले रंग का कुत्ता पालना चाहते हैं या आप उसके लिये एक छोटा-सा डॉग हॉऊस बनवाना चाहते हैं तो किधर बनावाएं। वास्तु शास्त्र के अनुसार काले रंग से संबंधित चीज़ों को घर की उत्तर दिशा में रखना चाहिए, लिहाजा काले कुत्त के लिये डॉग हॉऊस भी उत्तर दिशा में ही बनवाना चाहिए। उत्तर दिशा में काले रंग की चीज़ें रखने से किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता। कानों से जुड़ी तकलीफ दूर होती है। सुनने की क्षमता अच्छी होती है और मंझले पुत्र को फायदा होता है।
अगर आपके घर में काले रंग से जुड़ी कोई चीज़ उपलब्ध नहीं है तो आप उत्तर दिशा की दिवार पर नीचे की तरफ थोड़ा-सा काला रंग करवा सकते हैं, इससे आपको वास्तु के अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपको बता दूं कि काले रंग का संबंध जल से है और जल की दिशा भी उत्तर है। इसलिए और भी बेहतर परिणाम के लिये उत्तर दिशा में एक पानी का बर्तन जरूर रखना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए ताकि पाचन शक्ति बढ़े?
सुबह सुबह आपके ही सवालों के जवाब देने के पहले आपका हार्दिक अभिनंदन है जैसे कि आपका कहना है कि
सुबह-सुबह खाली पेट कोई भी वस्तु को खाना मना है और नीचे दिए नियमो का रोजाना पालन करना अनिवार्य है जो इस प्रकार है!
सूर्योदय से पहले उठना अनिवार्य है एवं उठने के बाद अपने अपने माँ और पिताजी एवं भगवान को रोजाना याद करना अनिवार्य है!
बासी (दांत को बगैर दातुन और ब्रश किए बिना) मुँह से एक लीटर गुन गुना पानी पीना जल अमृत के समान है एवं आयुर्वेद में जल को जीवन का अहम अंग माना गया है!
गुन गुना पानी पीने के एक घंटा के अंदर कुछ भी खाना मना है और एक घंटा के बाद चाय एवं नास्ता करना ही जायज है!
इस तरह से इस नियम को नब्बे दिन तक कायम रखना है और इसके बाद घर का बना भोजन जैसी इच्छा वैसा भोजन करना है!
इसमे शाकाहारी व मांसाहारी भोजन का सेवन करना मना नहीं है लेकिन शर्त यह है कि घर का बना भोजन का सेवन करना स्वास्थ्य जीवन का मूलमंत्र है!
न इसमें दवा है और न ही दवाई है मात्र इसमें सुबह सुबह गुन गुना पानी पीना बहुत जरूरी है सुनने में बहुत ही आसान लगता है पर अमल करने के लिए कठिन काम से कम नहीं है!
🧫 आरोग्य संजीवनी 💊
गरम पानी पीने के क्या फायदे और नुकसान हैं?
गर्म पानी पीने के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। गर्म पानी के फायदे निम्नलिखित हैं-
रोज सुबह गर्म पानी के सेवन से कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।
गर्म पानी पीने से वजन घटाने में मदद मिलती है।
इससे पाचन शक्ति बेहतर होती है और खाना पचाने में सहायता मिलती है।
झुर्रियों, मुंहासे व अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं से राहत देने में भी गर्म पानी फायदेमंद होता है।
गर्म पानी पीने के नुकसान
जरूरत से ज्यादा अगर गर्म पानी का सेवन किया जाये तो इससे शरीर को नुकसान पहुँच सकता है, जैसे-
रात में गर्म पानी पीने से व्यक्ति की नींद उड़ सकती है।
ज्यादा मात्रा में गर्म पानी के सेवन से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
बार-बार गर्म पानी पीने के कारण दिमाग की नसों में सूजन आ सकती है और सिर में दर्द शुरू हो सकता है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
ब्रह्मा विष्णु महेश, महेश अर्थात शिव शंकर। ब्रह्मा, विष्णु और शिव परमात्मा के तीन प्रमुख रूप हैं। एक ही परमात्मा इन तीन अलग अलग रूपों को धारण करके रचना, संरक्षण और संहार का काम करते हैं। इन तीन रूपों की सहायता के लिए परमात्मा स्वयं तीन और रूप धारण करते हैं- सरस्वती, लक्ष्मी और भवानी, भवानी अर्थात पार्वती (दुर्गा)। इस प्रकार एक ही परमात्मा इतने सारे रूपों में विराजमान हैं। सरस्वती ज्ञान की देवी हैं, वे ब्रह्मा की सहायता करती हैं, ब्रह्मा के द्वारा कि गई रचना को ज्ञान प्रदान करती हैं वो। लक्ष्मी जी विष्णु जी की सहायता करती हैं संरक्षण में। पार्वती जी शिव जी की सहायता करती हैं संहार करने में। ज्ञान से ही हम रचना कर सकते हैं, धन से ही हम जीवन चला सकते हैं और शक्ति से ही हम बुराई का विनाश कर सकते हैं। इसलिए ब्रह्मा- सरस्वती, लक्ष्मी- नारायण और गौरी- शंकर, इस प्रकार से इनकी जोड़ी है। लेकिन अभी हम ब्रह्मा, विष्णु और शिव (त्रिदेव) की बात करेंगे त्रिदेवी नहीं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव.. ये तीनों वास्तव में अजन्मे हैं लेकिन कल्पों के अनुसार एक दूसरे के द्वारा उत्पन्न होते हैं। कभी शिव से ब्रह्मा और विष्णु उत्पन्न होंगे, कभी विष्णु से ब्रह्मा और शिव.. कई बार शक्ति से भी ये उत्पन्न होते हैं। वास्तव में ये अजन्मे में हैं। ये सब में वास करते हैं, जरूरी नहीं है साकार रूप से, निराकार रूप में ये सब में वास करते हैं। हमारे शरीर में कई लाखों करोड़ों cells बनते हैं (रचना), जो cells हमारे शरीर के लिए सही हैं वो हमारे शरीर में बने रहते हैं (संरक्षण) और जो cells हमारे शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं उनकाे नष्ट भी किया जाता है (विनाश)। शरीर में संतुलन के लिए विनाश आवश्यक है। तो रचना अर्थात ब्रह्मा, संरक्षण अर्थात विष्णु और संहार अर्थात रुद्र (शिव)। तो ये सिद्ध हो जाता है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं, वे कण कण में विराजमान हैं।
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज दत्तात्रेय भगवान जी की जन्म जयन्ती है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।
पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।

