Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 26 सितम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 26 सितम्बर 2023
26 सितम्बर 2023 दिन मंगलवार को ही भादपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज प्रातः 06:44 AM बजे के बाद से पंचक (पचखा) आरंभ हो जाएगा। आज प्रातः 07:33 AM बजे से ही एकादशी व्रत के पारण का मुहूर्त है। आज की द्वादशी को श्रवण द्वादशी भी कहा जाता है। आज वामन भगवान का अवतरण दिवस है। अर्थात आज वामन द्वादशी भी है। आज दोपहर ठीक 12:00 बजे भगवान वामन का बटुक रूप में अवतार हुआ था। इसीलिए आज मध्यन्ह काल में भगवान वामन की जन्म जयन्ती मनायी जाएगी। आज से दूध के त्याग का व्रत और दही के दान का व्रत आरंभ हो जाता है। आज विष्णुशृंखलयोग एवं मंगलवार होने से भौम-जया सिद्धयोग भी है। आप सभी सनातनियों को भगवान वामन के जन्म जयन्ती की हार्दिक शुभकामनायें।।
🌧️ भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पद्मा अथवा कर्मा एकादशी व्रत तारीख 25 सितम्बर 2023 को प्रातः 04:57 AM बजे से शुरू होकर 26 सितम्बर 2023 को सुबह 02:57 AM बजे तक ही थी। इसलिए आज 26 सितम्बर 2023 को पारण का समय सुबह 07:33 AM से 09:53 AM तक है। इसी समय के बीच में कर्मा एकादशी व्रत का पारण कर लेना चाहिए।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 01:45 AM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी इस तिथि के स्वामी श्री हरि विष्णु जी हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र श्रवण 09:41 AM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी : श्रवण नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। देवता विष्णु और सरस्वती जी है।
🔕 योग – सुकर्मा योग 11:45 AM तक, उसके बाद धृति योग
⚡ प्रथम करण : बव – 03:25 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 01:45 ए एम, सितम्बर 27 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:21 पी एम से 01:58 पी एम
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : मंगलवार का राहुकाल 03:35 पी एम से 05:11 पी एम राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:01ɉ:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:59:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:36 ए एम से 05:23 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:00 ए एम से 06:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:36 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:13 पी एम से 03:01 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:13 पी एम से 06:37 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:13 पी एम से 07:25 पी एम
💧 अमृत काल : 09:52 पी एम से 11:18 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:49 पी एम से 12:37 ए एम, सितम्बर 27
🌸 द्विपुष्कर योग : 09:42 ए एम से 01:45 ए एम, सितम्बर 27
🚕 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – पद्मा एकादशी व्रत (निम्बार्क)/ वामन भगवान अवतरण दिवस/ द्विपुष्कर योग/ सी.एस.आई.आर. स्थापना दिवस, विश्व मूक बधिर दिवस, विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस, फ़िल्म अभिनेता देव आनंद जन्म दिवस, परमवीर चक्र सम्मानित सूबेदार जोगिन्दर सिंह जयन्ती, स्वतंत्रता सेनानी ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जयन्ती, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह जन्मोत्सव, परमाणु हथियारों के कुल उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, अंतरराष्ट्रीय लाल पांडा दिवस, पंचक प्रारंभ
✍🏼 विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना निषिद्ध है। द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है। द्वादशी के दिन मसूर का सेवन वर्जित है।
🏡 Vastu tips 🏚️
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, हल्के फर्नीचर को हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए जबकि भारी फर्नीचर को दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना सबसे अच्छा रहता है। इन दिशाओं के अनुसार फर्नीचर रखने से घर-परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहती है। वहीं इसके विपरित आपको पैसों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा फर्नीचर के लिये खरीदी गई लकड़ी के लिये उत्तर दिशा, पूर्व दिशा या उत्तर पूर्व दिशा के कोने का चुनाव करना चाहिए। इससे घर व दुकान का मनी फ्लो बढ़ता है।
इस दिन नहीं खरीदना चाहिए फर्नीचर
मंगलवार, शनिवार और अमावस्या के दिन फर्नीचर या लकड़ी न खरीदें। दिनों छोड़कर आप किसी भी दिन फर्नीचर खरीद सकते हैं। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि वह फर्नीचर किस पेड़ की लकड़ी का बना हुआ है। वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी सकारात्मक ऊर्जा वाले पेड़ की लकड़ी ही उपयोग में लानी चाहिए। जैसे- शीशम, चंदन, नीम, अशोक, सागवान, साल व अर्जुन, ये सभी शुभ फल देने वाले होते हैं।
➡️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
स्किन पिगमेंटेशन के लिए तेजपत्ता के फायदे स्किन पिगमेंटेशन कम करने में मददगार
तेज पत्ता स्किन पिगमेंटेशन को कम करने में मददगार है। ये स्किन के डार्क पिगमेंट मेलानिन उत्पन्न करने वाले टायरोसिनेस एंजाइम की क्रियाओं को रोकता है और त्वचा को पिगमेंटेशन से बचाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स फाइन रेडिकल्स को कम करते हैं और त्वचा को इनके नुकसानों से बचाते हैं। इसके अलावा ये स्किन में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं जिससे स्किन व्हाइटनिंग में मदद मिलती है।
एक्ने से बचाव में मददगार तेज पत्ता एंटीबैक्टीरियल गुणों से भी भरपूर है जो कि त्वचा में एक्ने की समस्या को कम करता है और इसके संक्रमण को फैलने से रोकता है। इसके अलावा तेल पत्ता एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भी भरपूर है जो कि त्वचा में सूजन को कम करता है और स्किन पिगमेंटेशन में कमी लाता है। साथ ही ये एग्जिमा की समस्या को भी कम करने में मददगार है।
💉 आरोग्य संजीवनी 💊
लौंग खाने के क्या क्या फायदे हैं, कोनसे टाइम खाना चाहिए?
लौंग खाने के बहुत फायदे हैं इसमें कैल्शियम पोटेशियम फास्फोरस और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टी पाई जाती हैं आप इसको चाय,सब्जी और चबाने में भी प्रयोग कर सकते हैं इसकी तासीर गर्म होती है दिन में दो लौंग ले सकते हैं जो आपको दर्द, पाचनतंत्र, और आपके वात और कफ संतुलन में सहयोगी है लौंग का तेल भी उपयोगी होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
जाने की गणेश जी को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी
भगवान गणेश
भगवान गणेश की पुजा हर शुभ या मांगलिक कार्य शुरू होने से पहले की जाती है। ऐसा माना जाता है कि गणेश जी सभी के विघ्न हर लेते हैं। उन्हें पूजा में मोदक, रोली और सिंदूर आदि चीजें अर्पित की जाती हैं। लेकिन उन्हें कभी तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। आइए, जानतें है आचार्य श्री गोपी राम से इसके पीछे का इतिहास
तुलसी
हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत ही पवित्र माना जाता है। वहीं गणेश जी की पूजा के दौरान तुलसी को चढ़ाना अशुभ माना जाता है। जिसकी पीछे एक कारण है।
पौराणिक कथा के अनुसार
एक बार गणेश जी गंगा नदी के किनारे तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान तुलसी विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ पर निकली और गंगा तट पर पहुंची।
तुलसी ने रखा विवाह का प्रस्ताव
इस दौरान तुलसी भगवान गणेश को देखकर उन पर मोहित हो गईं। और उन्होंने गणेश जी से विवाह करने की इच्छा जागृत की लेकिन उनकी इस हरकत से गणेश जी का तप भंग हो गया और उन्होंने खुद को ब्रह्मचारी बताते हुए तुलसी का विवाह प्रस्ताव ठुकरा दिया।
गणेश जी ने दिया श्राप
इस पर तुलसी ने क्रोधित होकर गणेश जी को श्राप दे दिया कि उनकी दो दो शादियां होंगी। बदले में गणेश जी ने भी तुलसी को श्राप दे दिया कि तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा।
राक्षस से होगा विवाह
असुर से विवाह की बात सुनकर तुलसी घबरा गईं और वे गणपती जी से माफी मांगने लगीं। गणपती जी बोले तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण राक्षस से होगा।
यह है कारण
भगवान ने कहा कि भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को प्रिय होने के साथ ही कलयुग में जगत के लिए जीवन और मोक्ष देने वाली होगी। लेकिन मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाएगा। तब से ही भगवान गणेश को तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
गणेश जी को क्या न चढ़ाएं
तुलसी के अलावा गणेश जी की पूजा में सफेद चंदन, जनेऊ, सफेद फूल भी नहीं चढ़ाने चाहिए। क्योंकि गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप दिया था जिसकी वजह से उन्हें सफेद फूल या सफेद चीजें अर्पित नहीं की जाती हैं।
𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•𖡼🙏🏻𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•𖡼
⚜️ द्वादशी तिथि का नाम यशोबला भी है, क्योंकि इस दिन भगवान श्री विष्णु जी / भगवान श्रीकृष्ण जी का आंवले, इलाइची, पीले फूलो से पूजन करने से यश, बल और साहस की प्राप्ति होती है।
द्वादशी को श्री विष्णु जी की पूजा , अर्चना करने से मनुष्य को समस्त भौतिक सुखो और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है, उसे समाज में सर्वत्र आदर मिलता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं निश्चय ही पूर्ण होती है।
द्वादशी तिथि के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यन्त श्रेयकर होता है। द्वादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
भगवान विष्णु के भक्त बुध ग्रह का जन्म भी द्वादशी तिथि के दिन माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के पूजन से बुध ग्रह भी मजबूत होता है ।
यदि द्वादशी तिथि सोमवार और शुक्रवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। द्वादशी यदि रविवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, यह अशुभ माना जाता है, इसमें भी शुभ कार्य करना मना किया गया हैं।


