ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 04 दिसम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 04 दिसम्बर 2023

04 दिसम्बर 2023 दिन सोमवार को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज सप्तमी तिथि सोमवार की है साथ ही भद्रा भी सुबह 07:44 बजे तक है। परन्तु रवियोग भी है रात्रि 12:12 बजे तक है। इसलिए आज एक विशिष्ट योग बन रहा है, जिसे दोष संघविनाशकौ अर्थात आज भगवान शिव के लिंग पर एक लोटा जल भी यदि श्रद्धा से अर्पित करते हैं, तो आपके जीवन के सभी दोषों का समूह जो बाकि होता है उसका भी नाश हो जाता है। आप सभी सनातनियों को “दोष संघविनाशकौ योग” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मार्गशीर्ष माह कृष्ण पक्ष दिन वार सोमवार सप्तमी तिथि 09:59 PM तक उपरांत अष्टमी |
✏️ तिथि स्वामी : सप्तमी तिथि के देवता हैं चित्रभानु। तथा सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मघा 12:35 AM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – मघा नक्षत्र सूर्य की सिंह राशि में आता है। नक्षत्र स्वामी केतु है।
🔕 योग – वैधृति योग 09:47 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : विष्टि – 08:41 ए एम तक
द्वितीय करण : बव – 09:59 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : सोमवार का शुभ गुलिक काल दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजे तक गुलिक काल रहेगा
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:58 बजे से 09:31 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:44:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:16:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:49 ए एम से 05:40 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:15 ए एम से 06:32 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:29 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:58 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:38 पी एम से 06:04 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:41 पी एम से 06:58 पी एम
💧 अमृत काल : 09:53 पी एम से 11:41 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:32 ए एम, दिसम्बर 05
❄️ रवि योग : 06:32 ए एम से 12:35 ए एम, दिसम्बर 05
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-बहते जल में 250 ग्राम बताशे प्रवाहित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल जन्म दिवस, भौतिक वैज्ञानिक श्रीनिवास कृष्णन जन्म दिवस, इतिहासकार रमेश चंद्र मजूमदार जन्म दिवस, अभिनेता शशि कपूर पुण्य तिथि, रासायनिक दुर्घटनाओं रोकथाम दिवस, बैंकों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, भारतीय नौसेना दिवस, मूल समाप्त
👉🏽 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗽 Vastu tips 🗺️
स्नान घर तथा शौचालय राहु और चंद्रमा का स्थान बताया गया है। चंद्रमा के दूषित होते ही कई प्रकार के दोष उत्पन्न होने लगते हैं। मानसिक कलह बढ़ जाती है।
चंद्रमा मन तथा जल का कारक है और राहु विष का। इसका प्रभाव व्यक्ति के मन और शरीर पर पड़ता है। ऐसे में परिवार में सामंजस्य का अभाव होने की संभावना रहती है।
लोगों में सहनशीलता की कमी आती है। मन में एक-दूसरे के प्रति राग-द्वेष की भावना बढ़ती है। इसलिए शौचालय व स्नान घर एक साथ होने पर परिवार में अनबन शुरू हो जाती है।
टॉयलेट में स्नान और टॉयलेट सीट के मध्य एक पर्दा या पार्टीशन लगा देना चाहिए।
👉🏽 क्या करें उपाय-
नेगेटिविटी को दूर करने के लिए आप कांच के कटोरे में खड़ा नमक व सैंधा नमक रखें। हर 15 दिन में नमक को बदलते रहें। नमक व कांच राहु से संबंधित हैं, ये दोनों चीजें राहु के अशुभ प्रभाव को दूर करती हैं।
स्नान घर का इस्तेमाल करने के बाद गंदा नहीं छोड़ना चाहिए। बाथरूम हमेशा सूखा व साफ रखें।
अगर स्नान घर व शौचालय एक साथ बने हुए हैं तो दोनों के बीच एक पर्दा लगा दें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गेंदे के फूल का पौधा, जिसे अंग्रेजी में मैरीगोल्ड कहते हैं, सालभर खूबसूरत फूल देता है। इसके फूलों में मच्छरों को दूर भगाने की क्षमता होती है। इस पौधे को गमले में आसानी से उगाया जा सकता है। अगर आपको सब्जियों उगाने का शौक है और कीड़े परेशान कर रहे हैं, तो उनके पास गेंदे का पौधा लगा दें।
नीम का पौधा मच्छर, मक्खी और दूसरी तरह के कीड़ों को दूर करने के लिए नीम का पौधा लगाना काफी लाभदायक होता है। अगर आपके घर में गार्डन है तो आप वहां नीम का पेड़ लगा सकते हैं इससे मच्छर वहां बिल्कुल नहीं भटकेंगे।
तुलसी का पौधा भारतीय तुलसी या तुलसी का पौधा भी भारतीय परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। औषधीय गुणों के अलावा, पौधे की तेज़ सुगंध मच्छरों को दूर भगाने के लिए जानी जाती है । तुलसी का पौधा मच्छरों के लार्वा को मारने और मच्छरों को दूर रखने में कारगर है।
💉 आरोग्य संजीवनी 💊
आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं
सुबह-शाम 30 मिनट प्राणायाम करें
अनुलोम-विलोम करें
7 बार भ्रामरी करें
‘महात्रिफला घृत’ पीएं
1 चम्मच दूध के साथ लें
दिन में दो बार खाने के बाद लें
एलोवेरा-आंवला का जूस पीएं
आंवला से आंखें तेज होती हैं
गुलाब जल में त्रिफला का पानी मिलाएं
मुंह में नॉर्मल पानी भरें
त्रिफला-गुलाब जल से आंखें धोएं
किशमिश और अंजीर खाएं
7-8 बादाम पानी में भिगोकर खाएं
गाजर, पालक, ब्रोकली, स्ट्रॉबेरी और शकरकंद खाएं
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आदमी को परखने के बारे में, जीवन में क्या करें, क्या नहीं और पैसा कैसे कमाएं इन तमाम सारे आम जनमान के मुद्दों पर उन्होंने अपनी नीति में खूब विस्तार से बताया है। आज हम आपको उनकी जो नीति बताने जा रहे हैं। हमने पौसों से जुड़ी एक बात बताई है। जिसमें उन्होंने ने निवेश, धन व्यय और पैसों की वृद्धि कैसे करें उसके बारे में सलाह दी है।
उपार्जितानां वित्तानां त्याग एव हि रक्षणाम्।
तडागोदरसंस्थानां परीस्रव इवाम्भसाम्।।
आचार्य श्री गोपी राम ने अपनी इस नीति में कहते हैं कि धन उपयोग करने की चीज हैं और इसका का समय-समय पर व्यय करना चाहिए। धन का संतुलित मात्रा में व्यय करना ही धन की रक्षा है। वो कहते हैं जिस प्रकार किसी पात्र में रखा जल अगर प्रयोग में न लाया जाए तो वह खराब हो जाता है। ठीक उसी प्रकार अगर धन को रखे रहेंगे और उसका प्रयोग नहीं करेंगे तो उसकी कीमत खत्म हो जाएगी। उनका कहना है कि अवश्यकता से ज्यादा पैसा बचा कर रखना लाभकरी नहीं होता है। यदि आपके पास धन है तो उसे सही चीजों में व्यय करें और दान-पुण्य के कार्यों में उसका प्रयोग करें।
धन दान-पुण्य में खर्च करने से बढ़ता है आचार्य श्री गोपी राम आगे कहते है कि पैसा अच्छो कार्य में निवेश करना चाहिए। दान-दक्षिणा, कर्मकांड, यज्ञ, हवन आदि कार्यों में धन खर्च करना चाहिए। इन कार्यों में खर्च किया धन निवेश ही है। क्योंकि आपके कर्म ही आपको महान बनाते हैं और उसी से आपके भाग्य का निर्माण होता है। यही धन की रक्षा करने जैसा है न की धन को रख कर उसकी रक्षा होती है। क्योंकि आप धन को रखे हुए हैं और महंगाई बड़ गई तो आपके रखें हुए धन की कीमत घट जाएगी और न हीं आपका कोई कर्म आपके प्रारब्ध को बनाएगा। क्योंकि आपने धन से कोई भी धार्मिक कार्य किया ही नहीं।
धन की तुलना की पानी से आचार्य श्री गोपी राम ने पैसे की तुलना जल से करते हुए कहा कि जिस तरह तलाब का पानी प्रयोग न होने के कारण उसमें काई जमने लगती है और उसमें से दुर्गंध आने लगती है तो व्यक्ति चाहते हुए भी उस पानी का प्रयोग नहीं कर सकता ठी उसी प्रकार रखे हुए धन का भी यही हाल होता है।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।

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