ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 24 सितम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 24 सितम्बर 2023

24 सितम्बर 2023 दिन रविवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष कि नवमी तिथि है। आज दशावतार व्रत है। आज महारविवार व्रत जिसका इंतजार सभी व्रतियों को रहता है, आज ही मनाया जाएगा। आप सभी सनातनियों को “दशावतार व्रत एवं महारविवार व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – भाद्रपद शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 10:23 AM तक उपरांत दशमी
🖍️ तिथि स्वामी – नवमी तिथि की स्वामी देवी दुर्गा हैं ऎसे में जातक को दुर्गा की उपासना अवश्य करनी चाहिए.
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 01:41 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी शुक है तो राशि स्वामी शुक्र।
📣 योग – शोभन योग 06:39 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
प्रथम करण : कौलव – 10:23 ए एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 09:13 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : रविवार का शुभ (गलिक काल) 03:37 पी एम से 05:16 पी एम
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:00:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:00:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:35 ए एम से 05:23 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:59 ए एम से 06:10 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:49 ए एम से 12:37 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:14 पी एम से 03:02 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:16 पी एम से 06:40 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:16 पी एम से 07:27 पी एम
💧 अमृत काल : 09:08 ए एम से 10:40 ए एम 05:59 ए एम, सितम्बर 25 से 07:28 ए एम, सितम्बर 25
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:49 पी एम से 12:37 ए एम, सितम्बर 25
❄️ रवि योग : पूरे दिन
सर्वार्थ सिद्धि योग : 01:42 पी एम से 06:11 ए एम, सितम्बर 25
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में ताम्र पात्र चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/अदुख नवमी / दशावतार व्रत/ महारविवार व्रत”/गिनी-बिसाऊ का पुर्तगाल से स्वतंत्रता दिवस, एस.जी. माल्शे, लेखक जन्म दिवस, विश्व सफाई दिवस, मैडम भीकाजी कामा जन्म दिवस, औतार सिंग पैंटल जयन्ती, भारतीय, चिकित्साशास्त्र मोहिन्दर अमरनाथ जन्म दिवस, भूतपूर्व प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी पंकज पचौरी जन्मोत्सव, विश्व बधिर दिवस, बधिरों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस,
✍🏼 विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🧹 Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे झाड़ू के बारे में अन्य महत्वपूर्ण बातों पर बातों पर। अगर आप झाड़ू टूट जाने के बाद भी उसे जोड़-तोड़ के अपने घर या ऑफिस में इस्तेमाल में ले रहे हैं, तो वास्तु की दृष्टि से यह बिल्कुल गलत है। दरअसल, अक्सर देखा जाता है कि लोग टूटी हुई झाड़ू का लगातार इस्तेमाल करते रहते हैं जिसे उनके आर्थिक और पारिवारिक जीवन में नुकसान होता है। इसके अलावा ये घर में कई समस्याओं को बुलावा देता है और आपको कई परेशानियों को बढ़ा सकता है। इसलिए आपको अपने घर या ऑफिस में टूटी हुई झाड़ू के इस्तेमाल से क्यों बचना चाहिए, जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से।
टूटी हुई झाड़ू का क्या करना चाहिए?
झाड़ू टूट जाने के तुरंत बाद ही उसे बदल देना चाहिए। टूटी हुई झाडू से घर की सफाई करना कई तरह की परेशानियों को बुलावा देने वाला होता है। झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए गलती से भी कभी झाड़ू को पैर न लगाएं। यह लक्ष्मी माता का अपमान माना जाता है और इससे घर में कई तरह की आर्थिक परेशानियां भी आ सकती हैं।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सादे जल के पीने से वात- पित्त- कफ कुपित नहीं होते। हमें केवल त्रिदोष रहित रहने का प्रयास करना चाहिए।
वात-पित्त-कफ का संतुलन बनाये रखने के लिए आयुर्वेद लाइफ स्टायल किताब का अध्ययन व अमल करें। यह सदैव स्वस्थ्य रखने में मदद करेगा। इस बुक से त्रिदोष में किसकी अधिकता है यह भी जान सकते हैं।
सावधान रहें- गर्म पानी का सेवन ग्रन्थिशोथ पैदा कर सकता है…
थायरॉइड (ग्रन्थिशोथ) जैसे वात रोग नहीं सताते। इसलिए सुबह उठते ही सादा जल पीना ही श्रेष्ठ रहता है।
मधुमेह से पीड़ित लोगों को सुबह सुबह कभी भी गर्म पानी नहीं पीना चाहिए, इससे पेट में खुश्की उत्पन्न होती है।
आयुर्वेद के अधिकांश ग्रंथों में लिखा है कि- प्रकृति ने हमें जैसा, जो दिया है, वही स्वास्थ्य के लिये लाभकारी है और जहां गर्म पानी की जरूरत है, वहां परमात्मा ने गर्म पानी दिया है।
जैसे-यमुनोत्री, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा तथा रोशनपुर गुरुद्वारा आदि स्थानों पर प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड हैं।
हिमाचल के मणि महेश शिवालय, पार्वती लेक, भृगु लेक में भी गर्म पानी का झरना है। कुछ नियम जिन्हें सहजता से अपनाया जा सकता है–
भरपूर पानी पिएं। गर्मियों के दिनों में दिन भर में कम से कम 5 से 7 लीटर और सर्दी में 4 से 5 लीटर पानी शरीर के लिए जरूरी है।
🍁 आरोग्य संजीवनी ☘️
सिर दर्द किस विटामिन की कमी से होता है-विटामिन डी की कमी सिरदर्द से जुड़ी हुई है क्योंकि यह सूजन और आपके न्यूरॉन्स के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकती है। इतना ही नहीं, विटामिन डी की कमी कई तरीकों से माइग्रेन और अन्य सिरदर्द का कारण बन सकती है क्योंकि ये पहले तो ब्रेन के अंदर एक सूजन पैदा करती है। इसके बाद ये कुछ न्यूरॉन्स को अधिक संवेदनशील बना देती है। साथ ही ये ब्रेन में कैमिकल्स के लेवल को प्रभावित कर सकती है।
इतना ही नहीं, विटामिन डी कमी नाइट्रिक ऑक्साइड को बढ़ाकर, नर्व इंपल्स को बढ़ा सकती है जिससे सिर में दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा ये मैग्नीशियम अवशोषण कम करके, मेलाटोनिन लेवल को भी कम करती है जिससे सिर दर्द लगातार होता रहता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हनुमान जी किसके भाई थे ?
हनुमानजी जन्‍म के विषय में व उनके माता-पिता के बारे में वाल्‍मीकि रामायण में पूरा उल्‍लेख है. वहीं, ‘ब्रह्मांडपुराण’ में हनुमानजी के भाइयों के बारे में बताया गया है.
हनुमान के 5 भाई थे. हनुमान इनमें सबसे बड़े और अविवाहित हैं. जबकि उनके पांचों भाई विवाहित थे.महावीर हनुमान अजर-अमर बताए गए हैं. पुराणों में उनके ब्रह्मचारी होने का उल्‍लेख है, वह अविवाहित हैं. क्‍या आप हनुमानजी के परिवार के बारे में जानते हैं? उनके कितने भाई हैं, उनके भाइयों के नाम क्‍या हैं..आदि बातें. आप शायद नहीं जानते होंगे. इसलिए आज यहां जानिए. वाल्‍मीकि रामायण में हनुमानजी जन्‍म के विषय में व उनके माता-पिता के बारे में पूरा उल्‍लेख है. वहीं हनुमानजी के भाइयों के बारे में ‘ब्रह्मांडपुराण’ में बताया गया है.हनुमानजी के पिता केसरी सुमेरू पर्वत पर रहते थे. हनुमानजी की मां अंजना थीं, जिनके गर्भ से वह वायुदेवता की कृपा से पैदा हुए थे. श्रीरामानंद सागर कृत धारावाहिक ‘रामायण’ में भी आपने देखा होगा कि जब वानरराज सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता होती है और उसके बाद समस्‍त वानरसेना रावण के खिलाफ लंका की ओर कूच करती है तो हनुमानजी के पिता केसरी कहते हैं कि मैं अपने सभी पुत्रों को भगवान श्रीराम की सेवा में लगाता हूं और स्‍वयं भी उपस्थित रहूंगा. इससे तात्पर्य है कि हनुमानजी के अलावा उनके भाइयों ने भी लंका के युद्ध में भाग लिया था.हनुमानजी के भाई और उनके नाम
ब्रह्मांडपुराण के अनुसार, हनुमान के 5 भाई थे, जिनके नाम हैं- मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान. हनुमानजी के ये पांचों भाई विवाहित थे और सभी संतान से युक्त थे. हनुमानजी इन सबमें बड़े थे. हनुमानजी को रुद्रावतार भी कहा जाता है, लोक-मान्‍यताएं हैं कि वह भगवान शिव का ही एक रूप हैं.जब भगवान ब्रह्मा ने देवतागणों से कहा था, ‘वे पृथ्वी पर ऐसी संतानें प्रकट करें, जो श्रीराम अवतार के लिए रावण से युद्ध करने में सहायक हों’, जिसके उपरांत देवराज इंद्र के अंश से बालि, सूर्य के अंश से सुग्रीव और वायु के अंश से हनुमान जन्‍मे. ‘ब्रह्मांडपुराण’ में लिखा है कि वानराज केसरी ने कुंजर की पुत्री अंजना से विवाह किया था. उन्‍होंने ही हनुमान को जन्‍मा था.
⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।
नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।

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