Aaj ka Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 22 सितम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 22 सितम्बर 2023
22 सितम्बर 2023 दिन शुक्रवार को भादपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज संतान सप्तमी व्रत है। आज राधाष्टमी व्रत है। वृन्दावन में आज राधा रानी का महाभिषेक किया जाता है। आज अपराजिता पूजा एवं फल सप्तमी भी है। बंगाल में इसे ललिता सप्तमी के नाम से मनाया जाता है। दुबड़ी सप्तमी भी इसे कहा जाता है। महालक्ष्मी स्थापना व्रत एवं पूजन आज आरम्भ हो जाता है। मध्यान्ह में ज्येष्ठा नक्षत्र में ज्येष्ठा देवी का पूजन किया जाता है। आप सभी सनातनियों को सन्तान सप्तमी एवं राधाष्टमी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : भाद्रपद शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 01:35 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि के स्वामी – सप्तमी के स्वामी भगवान सूर्य देव हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र ज्येष्ठा 03:34 PM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी : ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। तथा नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं।
🔊 योग : आयुष्मान योग 11:52 PM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 01:35 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 01:01 ए एम, सितम्बर 23 तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:28:00 AM
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:33:23 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:35 ए एम से 05:22 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:58 ए एम से 06:09 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:49 ए एम से 12:38 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:15 पी एम से 03:04 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:18 पी एम से 06:42 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:18 पी एम से 07:29 पी एम
💧 अमृत काल : 06:47 ए एम से 08:23 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:50 पी एम से 12:38 ए एम, सितम्बर 23
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-श्री राधा मंदिर में चुनरी सहित चांदी की श्रंगार सामग्री चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – राधाष्टमी/महालक्ष्मी व्रतारंभ/ ललिता। सप्तमी (बंगाल उड़ीसा), विश्व राइनो दिवस, भारतीय समाचार वक्ता रोहित सरदाना जन्म दिवस, समाज सुधारक वी. एस. श्रीनिवास शास्त्री जयन्ती, गुरु नानक देव पुण्य दिवस, बुल्गारिया स्वतंत्रता दिवस, गुलाब दिवस (कैंसर के रोगियों के कल्याण), माली स्वतंत्रता दिवस, रसासनशास्त्री माइकल फैराडे पुण्य तिथि, पटौदी के नवाब मंसूर अली खान पटौदी स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗽 Vastu tips 🗺️
पेड़ों का काटने का सही नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, नक्षत्रों के हिसाब से मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, हस्त, मूल, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, स्वाति और श्रवण नक्षत्र में वृक्षों को काटा जाना अच्छा होता है। इसके अलावा किसी भी वृक्ष को काटने के लिए पहले उसका पूजन भी करना चाहिए। सबसे पहले गन्ध, पुष्प और नैवेद्य से वृक्ष की पूजा करें। फिर उसके तने को साफ वस्त्र से ढक्कर, उस पर सफेद रंग का सूत लपेट दें। फिर वृक्ष से प्रार्थना करें कि इस वृक्ष पर जो प्राणी वास करते हैं, उनका कल्याण हो, उन्हें मेरा नमस्कार है। आप मेरे दिए हुए उपहार को ग्रहण कर, अपने वास स्थान को किसी अन्य जगह पर ले जाएं।
साथ ही कहें- हे वृक्षों में श्रेष्ठ। आपका कल्याण हो। गृह और अन्य कार्यों के निमित्त मेरी यह पूजा स्वीकार करें। इस प्रकार पूजा आदि के बाद जल से वृक्ष को सींचकर मधु और घी लगे कुल्हाड़े से पूर्व से उत्तर दिशा की तरफ पेड़ के चारों ओर घूमने के क्रम में भली प्रकार उस वृक्ष को काटें। वृक्ष को गोलाई में काटना चाहिए और फिर उसके गिरने को देखना चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जापानी बुखार किस अंग को प्रभावित करता है जापानी इंसेफेलाइटिस सबसे पहले व्यक्ति के सेंट्रल ब्रेन को प्रभावित करता है और फिर बाकी शरीर के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। इसमें व्यक्ति को तेज बुखार आता है जिसे आम भाषा में जापानी बुखार कहते हैं। ये बुखार सिर पर चढ़ जाता है और फिर गर्दन में अकड़न, कोमा और न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं का कारण बन सकता है।
जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण-जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षणों में आप देख सकते हैं तेज बुखार, सिरदर्द और उल्टी। अगले कुछ दिनों में मानसिक स्थिति में बदलाव, तंत्रिका संबंधी लक्षण जैसे कमजोरी और चलने-फिरने में दिक्कत के रूप में सामने आ सकती है। खासकर बच्चों में इंसेफेलाइटिस ब्रेन में इंफेक्शन का कारण बन जाता है और इन बच्चों में से 20%-30% मामलों में मृत्यु भी हो सकती है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
बाहर की चीजों को खाना बंद करें बरसात के मौसम में वायरल फीवर आपको आसानी से हो सकता है। दरअसल, अगर आप बाहर का खाना खा रहे हैं या फिर आप कहीं भी कुछ भी खा-पी रहे हैं तो, ऐसे में इंफेक्शन का आसानी से शिकार हो सकते हैं। इसलिए इस मौसम में बाहर का खाना खाना बंद करें और घर में बनाया हुआ ताजा और गर्म खाना खाएं। साथ ही कोशिक करें कि पानी घर का फिल्टर किया हुआ ही पिएं और अपने बॉटल को बाकी लोगों के साथ शेयर न करें।
लौंग और तुलसी की चाय 1 बार जरूर लें लौंग और तुलसी असल में एंटीवायरल गुणों से भरपूर हैं और इसलिए इस मौसम में इन दोनों से बनी चाय को पीना आपको कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा ये चाय आपको कोल्ड और कफ की समस्या से बचा सकती है और सिर दर्द को कम कर सकती है। इसके अलावा ये एंटी इंफ्लेमेटरी भी है जो कि आपकी इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद कर सकती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
क्या कोई जीते जी भगवान से मिला है?
भगवान के साक्षात दर्शन करने हैं तो, अयोध्या के जंगल जाएं।
आज हम आप लोगों को #त्रेतायुग ले चलते हैं जो आज से #*1296000(बारह लाख छियानबे हजार साल पहले का समय है वह पेड़ भी है, जिस की जड़े, ऊपर की ओर है।
एक बार जब, हनुमान जी ने जब भरत को तपस्या करते हुए पेड़ के नीचे देखा तो वह नहीं पहचान नहीं पाए और उनसे उलझ गए ।
और वहां उस पेड़ को ऊपर उखाड़ ने की कोशिश की, उससे पहले ही भरत जी ने उसको अपने हथेलियों से रोक दिया तो उसके जड़े नीचे से ऊपर की ओर हो गई हैं।
भरतजी के द्वारा यह कूप बनाया गया है जो अपने लिए प्यास लगने पर बनाया था।
जंगल का वह स्थान, जहां से शहर के बाहर जंगल शुरू होता है,पल
भरत जी ने श्रीराम का इंतजार करते हुए 14 साल निकाल दिए और
इसी जगह बैठ कर तप किया।
भगवान श्री राम जी के भाई भारत ने भी 14 साल तक अपना घर नहीं देखा।
अयोध्या के दरवाजे पर जो जंगल की तरफ जाने वाला मार्ग है वहीं पर 14 साल तक उन्होंने राम की प्रतीक्षा की भरत जी की पत्नी रात में छत पर डालती थी तो 1 दिन कौशल्या माता ने उनको छत पर टहलते हुए देखा उन्होंने उनसे पूछा कि बेटा तुम यहां क्यों टहल रही हो कौशल्या माता से भरत जी की पत्नी ने कहा कि यहां से दिखाई पड़ रहा है कि वहां पर अभी उनकी कुटिया में उजाला है जब वह विश्राम करने जाएंगे तो मैं भी विश्राम करूंगी।
यह वह बरगद का वृक्ष है जिसके नीचे बैठकर तप किया।
यह स्थान त्रेतायुग का है। श्री राम जी ने त्रेता में चरण कमलों से और अपनी लीला से पृथ्वीलोक को पवित्र किया।
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⚜️ सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।


