ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 08 जनवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 08 जनवरी 2024

मित्रों, पौष मास के कृष्ण पक्ष की सफला एकादशी तारीख 07 जनवरी 2024 को प्रातः 00:42 AM बजे से शुरू होकर 08 जनवरी 2024 को सुबह 00:47 AM बजे तक थी। इसलिए आज 08 जनवरी 2024 को पारण का समय सुबह 07:15 AM से 09:27 AM तक है। इसलिए सभी सफला एकादशी व्रत के व्रतियों को इस निर्धारित समय में ही व्रत का पारण कर लेना चाहिए।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार पौष माह कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि 11:59 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी तिथि के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 10:03 PM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि के स्वामी मंगल हैं।
📢 योग – गण्ड योग 02:55 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग
प्रथम करण : कौलव – 12:28 पी एम तक
द्वितीय करण – तैतिल – 11:58 पी एम तक
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:45:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:15:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:26 ए एम से 06:21 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:54 ए एम से 07:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:07 पी एम से 12:48 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:12 पी एम से 02:54 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:38 पी एम से 06:05 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:40 पी एम से 07:02 पी एम
💧 अमृत काल : 11:41 ए एम से 01:17 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, जनवरी 09 से 12:55 ए एम, जनवरी 09
सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:15 ए एम से 10:03 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-मंदिर में सफेद तिल की मिठाई चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल प्रारंभ/रवियोग, अफ़्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस स्थापना दिवस, महात्मा गान्धी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय स्थापना दिवस, राष्ट्रीय जॉयजर्म दिवस, राष्ट्रीय कैरियर कोच दिवस, राष्ट्रीय बुलबुला स्नान दिवस, राष्ट्रीय जॉयजर्म दिवस, राष्ट्रीय अंग्रेजी टॉफ़ी दिवस, राष्ट्रीय शीतकालीन त्वचा राहत दिवस, राष्ट्रीय रविवार रात्रि भोज, राष्ट्रीय आर्गिल दिवस, परमाचार्य श्री. चंद्रशेखर सरस्वती स्मृति दिवस, भारतीय महिला पायलट सुषमा मुखोपाध्याय पुण्य तिथि, स्वतंत्रता सेनानी गीता मुखर्जी जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
पीपल का पेड़ घर में निकल आया है तो कैसे हटाएं
वैसे तो पीपल का पेड़ घर में नहीं लगाया जाता है इससे जुड़ी कई सारी मान्यताएं हैं। ये भी माना जाता है कि पीपल का वृक्ष बड़ा हो जाने के बाद उसकी जड़ें घर को काफी नुकसान पहुंचा देती है। इसी के साथ जिस पीपल के लगभग एक हजार पत्तियां हो जाती हैं उस वृक्ष को काटना या हटाना महापाप होता है। क्योंकि उस वृक्ष में साक्षात विष्णु जी का निवास होता है। यदि आपके घर में पीपल का वृक्ष बहुत छोटा सा निकल आया है और आप उसे हटाना चाहते हैं। तो शनिवार और गुरुवार का दिन छोड़ कर आप पीपल के वृक्ष की पूजा कर के और क्षमायाचना मांग कर उसे जड़ समेत निकालकर किसी अन्य स्थान में पुनः मिट्टी के अंदर बो दें। ऐसा करने से न तो आपको पाप लगेगा बल्कि पितृों सहित अन्य देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी मिलेगा।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अगर घर में मच्छरों के आतंक से परेशान हैं तो जहरीले मॉस्किटो कॉइल की जगह आप कुछ कुदरती चीजों से इन्हें भगा सकते हैं। ये उपाय आपके घर में ही मौजूद है।
जिस तरह सेहत के लिए नीम के अपार फायदे हैं उसी तरह इससे मच्छरों को भी भगाया जा सकता है। इसके लिए नीम और नारियल के तेल को बराबर मात्रा में लेकर मिश्रण तैयार कर लें और इसे शरीर पर रगड़ें। इसका असर आठ घंटे तक रहता है।
कमरे में कॉइल की जगह कपूर जलाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। जब कमरे में वापस जाएंगे तो मच्छरों का नामो-निशान नहीं मिलेगा।
बराबर मात्रा में नींबू के तेल और नीलगिरी के तेल लेकर मिश्रण तैयार कर लें, अब इसे शरीर पर लगाएं। इसकी महक से मच्छर आपके आस-पास नहीं भटकेंगे।
तुलसी के पौधे को कमरे की खिड़की या दरवाजे के पास रखने से मच्छर भाग जाते हैं। तुलसी मच्छरों को घर में प्रवेश करने से रोकती है। तुलसी के अलावा आप नींबू और गेंदे का पौधा भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
त्वचा सम्बन्धी इलाजो में अरंडी का तेल (Arandi Ka Tel) सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता हैं। अरंडी को भारत में अलग अलग राज्यों में कई नामो से जाना जाता हैं जैसे, तमिल में अमानकु एनी, मराठी में इरांदेला टेला, बांग्ला में रिरिरा टेला और तेलुगु में अमुदामु कहा जाता हैं।
बहुत लम्बे आरसे से ही अरंडी का तेल घरेलु उपचारो में किया जाता आ हैं राहा हैं। इस तेल को तैयार करने के लिए इसके बीजों का पीसकर इससे तेल निकाला जाता हैं। इसका प्रयोग साबुन तैयार करने में तथा, मालिश के तेल, कॉस्मेटिक्स और त्वचा सम्बन्धी रोगो में इलाज किया जाता हैं, यहाँ तक की आँखों की समस्या, पिम्पल-मुहासे की समस्या में भी अरंडी का तेल का इस्तेमाल किया जाता हैं।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
महिलाओं में होने वाले मासिक धर्म अथवा पीरियड्स एक तरह का शरीर का excretory process होता है, जिसमे शरीर से अनवांछित गन्दगी शरीर बाहर निकल देता है। ऐसा न हो तो, अर्थात पीरियड्स न हो तो, यह बीमारी की जड़ बन सकते है, तथा शरीर में इन्फेक्शन आदि हो सकता है। यह एक biological process है, और आप इसके विषय में किसी डॉक्टर से भी पूछ सकते है।
कोई भी excretory process चाहे पुरुषों में हो या महिलाओं में, उस अवस्था को अशौच अवस्था कहा जाता है। जैसे अगर किसी पुरुष को loose motions है, तो उसे मंदिर में नहीं जाना चाहिए, और पूजा नहीं करनी चाहिए। इसी प्रकार महिलाओं में periods के दौरान लगातार होने वाले स्त्राव के कारण, उन्हें भी यही सलाह दी जाती है।
इसका एक और जरूरी वैज्ञानिक कारण है। वहः कारण है periods के दौरान रक्त स्त्राव के कारण महिलाओं के शरीर से जरूरी पोषक तत्व खासतौर से iron यानि हीमोग्लोबिन की कमी भी अक्सर देखि जाती है। भारत और बहुत से विकासशील देशों में यह आम बात है। ऐसे में उन्हें कमज़ोरी महसूस होती है। इन सब के दौरान उन्हें पूर्ण आराम मिले, तथा उनका शरीर जरूरी पोषक तत्व जुटा सके, इसलिए उन्हें घर गृहस्थी आदि के कार्यो से भी दूर रखा जाता है। यहाँ अशौच से कोई लेना देना नहीं, केवल उन्ही सेहत से है।
जिन घरों में केवल एक ही महिला होती है, वहां आपको ऐसे कोई बंधन देखने को नहीं मिलेंगे, परंतु जहाँ बाकी लोग उनका हाथ बँटा सकते है, चाहे महिला हो या पुरुष, वहाँ, उन्हें आराम की ही सलाह दी जाती है।
समाज के यह नियम किसी के जीवन में रोक टोक के लिए नहीं, अपितु एक स्वस्थ समाज, तथा वैज्ञानिक सोच से ही बनाये गए है।
आजकल टीवी के ads में आपको महिलाओं के लिए बने हुए health products में उनकी कमर का दर्द, घुटनो का दर्द, कैल्शियम की कमी आदि पर जोर शोर से बताया जाता है। परन्तु उनके आराम, और काम में उनके हाथ बटाने के लिए बने यह नियम समाज की पुरानी सोच के तहत दिखाये जाते है। शरीर का एक recovery process होता है, उसकी एक cycle होती है। उसमे पोषक तत्वों के साथ साथ, साफ़ सफाई का ध्यान जिससे इन्फेक्शन न हो, आराम जिससे हीमोग्लोबिन की कमी से थकान न हो आदि भी जरूरी है।
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

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