Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 18 दिसम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 18 दिसम्बर 2023
18 दिसम्बर 2023 दिन सोमवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष कि षष्ठी तिथि है। आज स्कन्दषष्ठी का परम पावन व्रत है। इस षष्ठी तिथि को चम्पा षष्ठी भी कहा जाता है। भारतवर्ष के महाराष्ट्र प्रदेश में यह बहुत ही प्रचलित एवं प्रसिद्ध व्रत माना जाता है। पौराणिक आख्यान के अनुसार आज ही के दिन स्वामी कार्तिकेय ने तारकासूर का वध किया था। उसके उपरान्त ही स्वामी कार्तिकेय का राज्याभिषेक हुआ था। आप सभी सनातनियों को “स्कन्दषष्ठी के परम पावन व्रत” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष दिन सोमवार षष्ठी तिथि 03:14 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथि स्वामी – षष्ठी तिथि के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र शतभिषा 01:21 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुणदेव और स्वामी ग्रह राहु है.और यह कुंभ राशि के अंतर्गत आता है।
📢 योग – वज्र योग 09:31 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 03:13 पी एम तक
✨ द्वितीय करण – गर – 02:08 ए एम, दिसम्बर 19 तक
🔥 गुलिक काल : सोमवार का शुभ गुलिक काल दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजे तक गुलिक काल रहेगा
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:58 बजे से 09:31 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:56 ए एम से 05:48 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:22 ए एम से 06:40 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:35 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:04 पी एम से 02:48 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:43 पी एम से 06:09 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:45 पी एम से 07:03 पी एम
💧 अमृत काल : 06:37 पी एम से 08:07 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:47 पी एम से 12:39 ए एम, दिसम्बर 19
❄️ रवि योग : 06:40 ए एम से 01:22 ए एम, दिसम्बर 19
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिव मंदिर में छैने से बनी मिठाई चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – चम्पा षष्ठी/रवियोग/ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पुण्य तिथि, राजनीतिज्ञ सदस्य मुकुट बिहारी लाल भार्गव स्मृति दिवस, राजनीतिज्ञ सदस्य मुकुट बिहारी लाल भार्गव स्मृति दिवस, भारतीय व्यवसायी विजय माल्या जन्म दिवस, राष्ट्रीय धातुविज्ञान दिवस, कतर राष्ट्रीय दिवस, विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस, अरबी भाषा दिवस, मद्य निषेध दिवस, मदनमोहन मालवीय जयंती, अंतर्राष्ट्रीय घुमंतु दिवस, गुरु घासीदास जयंती (छत्तीसगढ़), अंतरराष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस
✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🌹 Vastu Tips 🌸
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए कलाई में पहनी जाने वाली घड़ी के बारे में। आमतौर पर देखा गया है कि लोग अपने हाथ में पहनी जाने वाली घड़ी को सोते समय अपने तकिये के नीचे रखकर सोते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घड़ी को कभी भी तकिये के नीचे रखकर नहीं सोना चाहिए।
तकिये के नीचे घड़ी रखकर सोने से उसकी आवाज नींद में खलल तो डालती ही है, साथ ही उससे निकलने वाली इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगें हमारे दिमाग और हृदय पर बुरा प्रभाव भी डालती हैं। इन तरंगों के चलते पूरे कमरे में नेगेटिव ऊर्जा पैदा हो जाती है जो आपकी मन की शांति को भंग कर देती है। साथ ही आपकी विचारधारा को नकरात्मक बना देती है।
वास्तु के अनुसार को कभी भी बिना फिटिंग वाली घड़ी यानि ढीले पट्टे वाली घड़ी नहीं पहननी चाहिए। इससे आपका ध्यान भटक सकता है। साथ ही आपको किसी भी काम में सफलता मिलने में दिक्कत आएगी। वहीं, वास्तु के अनुसार, गोल्डन और सिल्वर रंग की घड़ी बेहद शुभ मानी जाती हैं। यदि आप किसी जरूरी काम के लिए बाहर जा रहे हैं तो गोल्डन या सिल्वर रंग की घड़ी ही पहनें। इससे आपको सफलता मिलेगी।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
प्रतिदिन करने बाले कुछ काम जो बहुत जरूरी है।
रोज सुबह खाली पेट आंवले का जूस पीना
कम से कम रोज 20 मिनट तक दौड़ना
कम से कम रोज 20 मिनट तक वर्कआउट करें
सुबह जल्दी उठना। सुबह 5.30 बजे तक जागना।
भूख लगने पर भोजन करना और भूखे रहना नहीं
प्रोसेस्ड फूड को सीमित करना
बहार का खाना सीमित करना। मोर घर का खना
सप्ताह में दो बार अपने बालों को तेल लगाना
रात को सोने से पहले तलवों और हथेलियों में घी लगाना
रात को सोते समय अपने सिर को ढँक कर रखें, जिससे सिर पर अधिक मात्रा में सूती कपड़ा हो। यह ध्वनि नींद के लिए बहुत अच्छा है। कुछ इस तरह।
पूरे दिन सक्रिय रहना। चल कर चल
हर एक दिन ड्राई फ्रूट्स खाना
दिन भर में पर्याप्त पानी पीना
मौसमी फल और खाद्य पदार्थ खाना।
हर 15 दिन में एक बार चेहरा साफ करना।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
चादर और बिस्तर को साफ रखें- अस्थमा के मरीज को अपनी चादर, गद्दे और रजाई कंबल सभी साफ रखने चाहिए। इससे अस्थमा अटैक से बचा जा सकता है। आप इन्हें किसी माइल्ड सोप से गर्म पानी में वॉश करें। गद्दे और तकियों पर हमेशा कवर रखें जिससे धूल मिट्टी अंदर न जाने पाए।
सर्दियों में ऐसे रखें ख्याल- ज्यादा ठंड में बाहर न निकलें। घर से निकलने पर मास्क पहनकर ही निकलें। धूम्रपान वाली जगहों पर न जाएं। गर्म और ताजा खाना खाएं। गर्म कपड़ों से शरीर को कवर करके रखें। थोड़ी देर धूप में बैठें और गर्म पानी पिएं। आपको रोजाना पालक, चुकंदर, मसूर की दाल खानी चाहिए। रात में सोते वक्त हल्दी और काली मिर्च वाला दूध पिएं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
भगवान कार्तिकेय की साधना
भगवान कार्तिकेय, जिन्हें शणि और कुमार भी कहा जाता है,वह भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं और हिन्दू पौराणिक कथाओं में उन्हें बहुतायत में उपास्य देवता के रूप में वर्णित किया गया है। कार्तिकेय को स्वामी सुब्रह्मण्य, कुमारस्वामी, गुह, स्कंद आदि नामों से भी जाना जाता है।
कार्तिकेय का वाहन मोर होता है और उन्हें शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। वे सुंदरता, वीरता, और बुद्धिमानी के साथ भी जाने जाते हैं। उन्हें हिन्दू धर्म में ब्रह्मचारी स्वरूप के रूप में भी पूजा जाता हैं।
कार्तिकेय की कथाओं के अनुसार, उन्होंने देवासुर संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उन्हें शक्ति और सामर्थ्य के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। उनकी चित्रण में वे जघनपरिधान यज्ञोपवीत धारण करते हैं और हथ में तालवार लिए होते हैं। संगमार्ष के समय उन्होंने देवताओं की सेना का नेतृत्व किया था।
कार्तिकेय की पूजा का समय भगवान शिव के जन्मदिन की मनाई जाती है, जिसे मास स्कंद या कार्तिक कहा जाता है। इस दिन भक्त उनकी पूजा-अर्चना और व्रत-त्योहार करते हैं और इनके अच्छे आशीर्वाद की कामना करते हैं।
उनके पूजन उपासना के तरीके निम्नलिखित हैं:
ॐ सरवभोगिने नमः
ॐ शक्त्यै नमः
ॐ भद्रायै नमः
ॐ देवाय नमः
ॐ सर्वलोकाय नमः
इस मंत्र का जाप करने से भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त होती है और भक्त को संकटों से मुक्ति मिलती है।
कार्तिक मास में भगवान कार्तिकेय की पूजा का विशेष महत्व है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के सोमवार को उन्हें पूजना चाहिए।
उपासना के लिए भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र के सामने आसन बिछाएं और उन्हें चाँदी के कटोरे, फूल, फल, दीप आदि से सजाकर पूजन करें।
आप यह भी ध्यान रख सकते हैं कि कार्तिके मास के शुक्ल पक्ष में मंगलवार के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा भी कर सकते हैं, जो उनके भक्तों के लिए भले मानी जाती है।
कर्तिक मास में कार्तिके पूर्णिमा के दिन भी उनकी पूजा की जाती है जो कि मान्यता से तो भगवान कार्तिकेय के बराबर मानी जाती है।
भगवान कार्तिकेय की पूजा के दौरान आप उनके तीर्थयात्रा का भी आयोजन कर सकते हैं। रिवर, झील, कुंड, नद, समुद्र से सीरा पानी लेकर उन्हें अर्चना करें।
इसके अलावा, आप कार्तिकेय पूजा में उनके मंत्रों का जप कर सकते हैं, जैसे:
ॐ शांतं शांतं कर्तिकेय नमः
ॐ वल्ली देवसेना वाहनाय नमः
ॐ शारवणोद्भवाय नमः
इन मंत्रों का जप करते समय आपको ध्यान रखना चाहिए कि आप एकाग्रता से और शुद्ध दिल से जप करें।
इसके अतिरिक्त, भगवान कार्तिकेय की उपासना के दौरान आप पुश्प, दीप, धूप, नैवेद्य, खीर, जल, बिल्वपत्र, कुमकुम आदि से उनकी आराधना कर सकते हैं।
⚊⚊⚊✬✥ja sh.hari✥ ✬⚊⚊
⚜️ आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है। परन्तु ऐसे जातक छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।


