ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 19 जून 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 19 जून 2023

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
👣 आप सभी भाई-बहनों को आषाढ़ मास गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 11:25 AM तक उपरांत द्वितीया
✏️ तिथि के स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र आद्रा 08:10 PM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी राहु है। तथा इस राशि के स्वामी ग्रह बुध का प्रभाव भी रहता है।
📣 योग : वृद्धि योग 01:15 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
प्रथम करण : बव – 11:25 ए एम तक
द्वितीय करण : बालव – 12:13 ए एम, जून 20 तक
🔥 गुलिक काल : – सोमवार का शुभ (गुलिक काल) दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह -7:30 से 9:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00 A.M
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00 P.M
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🎇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:50 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:20 पी एम से 07:40 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:21 पी एम से 08:22 पी एम
💧 अमृत काल : 09:19 ए एम से 11:03 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, जून 20 से 12:43 ए एम, जून 20
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मंदिर में चांदी से बनी श्रंगार सामग्री चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ/ आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रारम्भ/ चन्द्र दर्शन/ महाकवि कालिदास दिवस/ मनोरथ द्वितीय व्रत (बंगाल)/ राहुल गांधी जन्मोत्सव, चिकित्सक प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी’ सुभाष मुखोपाध्याय पुण्य तिथि, संघर्ष में यौन हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, पूर्व राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल जन्म दिवस, विश्व सिकल सेल दिवस, विश्व एथनिक दिवस, फादर्स डे (History of Father’s Day )
✍🏼 विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
गृह निर्माण के शुभ मुहूर्त,
जबकि माघ, ज्येष्ठ, भाद्रपद एवं मार्गशीर्ष महीने को मध्यम श्रेणी में रखा गया हैं।
लेकिन चैत्र, आषाढ़, आश्विन तथा कार्तिक मास उपरोक्त शुभ कार्य की शुरुआत के लिए वर्जित कहे गए है। इन महीनों में गृह निर्माण प्रारंभ करने से धन यश की हानि होती है एवं घर परिवार के सदस्यों की आयु भी कम होती है।
भवन बनाना शुरू करने से पहले हमें शुभ वार का अवश्य ही चयन करना चाहिए । भवन निर्माण के लिए सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार , शुक्रवार तथा शनिवार सबसे शुभ दिन माने गए हैं।
लेकिन मंगलवार और रविवार को भवन सम्बन्धी कोई भी कार्य जैसे भूमिपूजन, गृह निर्माण का प्रारम्भ , गृह का शिलान्यास या गृह प्रवेश को बिलकुल भी नहीं करना चाहिए।
भवन सम्बन्धी कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ तिथि का चयन करना भी अति आवश्यक होता है । गृह निर्माण हेतु सर्वाधिक शुभ तिथियाँ द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी एवं त्रयोदशी तिथियाँ मानी गयी है ।
इन तिथियाँ में गृह निर्माण करने से किसी भी प्रकार की अड़चने नहीं आती है जबकि अष्टमी तिथि को मध्यम माना गया है।
लेकिन शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष की तीनों रिक्त तिथियाँ अशुभ होती हैं। ये रिक्ता तिथियाँ हैं- चतुर्थी, नवमी एवं चतुर्दशी। इन तीनों तिथियों में गृह निर्माण सम्बन्धी कोई भी कदापि कार्य शुरू नहीं करने चाहिए ।
इसके अतिरिक्त प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या को भी गृह निर्माण सम्बन्धी कोई भी कार्य शुरू नहीं करना चाहिए अन्यथा इसके अशुभ परिणाम भोगने पड़ सकते है ।
➡️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
यदि पिता की और से नाराजगी है तो पुत्र / पुत्री रविवार को सवा किलो गुड़ बहते हुए पानी में प्रवाहित करे …उसे ऐसा लगातार तीन रविवार को करना है । पिता की नाराज़गी जल्दी दूर हो जाएगी ।
पुत्र / पुत्री को नियमित रूप से गुड़,लाल फूल मिलाकर जल सूर्य देव को अर्पित करना चाहिए। पिता का स्नेह पुन: पुत्र / पुत्री पर बन जायेगा ।
रविवार को पुत्र / पुत्री यदि अपने पिता को कोई भी लाल रंग का उपहार दे तो अति शीघ्र पिता का पुत्र / पुत्री से विरोध ख़त्म हो जायेगा ।
यदि पुत्र / पुत्री की पिता से न बन रही हो तो अमावस्या,या ग्रहण के दिन पुत्र / पुत्री पिता के जूतों से पुराने मोज़े निकाल कर उनमें बिलकुल नए मोज़े रख दे, ऐसा करने से दोनों के बीच चल रहा गतिरोध अवश्य ही दूर हो जाएगा।
यदि पुत्र / पुत्री रुष्ट है तो पिता प्रत्येक शनिवार को सुबह पीपल में मीठा जल एवं शाम को सरसों के तेल का दीपक जलायें या सरसों के तेल की धार अर्पित करें तो बहुत ही जल्दी पिता पुत्र / पुत्री के मध्य अवरोध ख़त्म हो जायेगा ।
शनिवार को पिता यदि अपने पुत्र / पुत्री को कोई भी नीले रंग का उपहार दे तो अति शीघ्र पुत्र / पुत्री का पिता से मतभेद समाप्त हो जाता है ।
🥤 आरोग्य संजीवनी 🍶
कील मुहाँसो, सौंदर्य संबंधी चेहरे की समस्याओं को दूर करने के लिए चंदन बहुत ही किफायती होता है। आप चंदन और हल्दी पाउडर दूध के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएंगे तो आपको त्वचा की जलन और मुंहासों से आराम मिलेगा।
एक्ने ( acne ) और पिंपल ( pimples ) के इलाज में पानी के साथ घिसा हुआ जायफल लगाने में कारगर होता है।
मुहाँसो के उपचार ( muhaso के उपचार ) में प्याज बहुत प्रभावी होता है | प्याज को काटकर तेल में पारदर्शी होने तक पकाए। ठंडी होने पर उसे मलमल के कपड़े में बांधकर चेहरे पर रगड़े,इससे मुँहासे दूर होते है ।
यदि चेहरे पर दाग, मुंहासे से बिगड़ गया हो तो रोजाना पुदीने का पेस्ट का लेप करें एक माह तक, चेहरा सुंदर हो जायेगा।
बेसन को छाछ में लेप बनाकर चेहरे पर लगाऐं।
👣 गुरु भक्ति योग 🕯️
गुप्त नवरात्रि कब है? इस प्रकार दस महाविद्याओं की साधना करें
मिथुन राशि में सूर्य के आगमन के साथ ही आषाढ़ मास की शुरुआत हो जाएगी। इसी माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ होता है। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 19 जून से शुरू हो रही है। आषाढ़ मास में आने वाली गुप्त नवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से काफी महत्व है। एक वर्ष में चार नवरात्रि आते हैं। जिसमें श्रद्धालु असो मास शारदी और चैत्री नवरात्रि को धूमधाम से मनाते हैं। जिसे प्राकट नवरात्रि कहा जाता है। जबकि माघ और आषाढ़ में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। क्योंकि यह आम तौर पर बहुत लोकप्रिय नहीं है। कारण यह है कि गुप्त नवरात्रि को सिद्धि और साधना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और तंत्र मंत्र साधक इस पर विशेष साधना करते हैं।
👸🏻 नवरात्रि का प्रकट और गुप्त रहस्य
मार्कंडेय पुराण में कहा गया है कि एक वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, जो ऋतुओं के परिवर्तन के साथ चार युगों का प्रतीक हैं। चारों नवरात्रि का हर युग में अपना-अपना महत्व है। सतयुग में चैत्र मास की नवरात्रि का अधिक प्रचलन है। त्रेता युग में आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि का अधिक प्रचलन है। द्वापर में माघ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रचलन है। जबकि कलयुग में लोग अश्विन की शरद नवरात्रि को धूमधाम से मनाते हैं।
💮 आषाढ़ गुप्त नवरात्रि रिद्धि से सिद्धि प्राप्त होगी
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि इस बार आर्द्रा नक्षत्र, राहु के नक्षत्र में शुरू हो रही है। तंत्र शास्त्र और धार्मिक ग्रंथ कहते हैं कि राहुकाल और राहु के नक्षत्र में देवी की पूजा और तंत्र मंत्र की सिद्धि अधिक फलदायी और लाभकारी होती है। संयोग से इस बार वृद्धि योग में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इस प्रकार गुप्त नवरात्रि में देवी की दस महाविद्याओं की पूजा करने वालों को भक्ति रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति होती है।
🌟 गुप्त नवरात्रि पर दस महाविद्याओं की पूजा का महत्व
नवरात्रि पूजा में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, चारों नवरात्रि में दोनों नवरात्र प्रकट होते हैं। जब गुप्त नवरात्रि में देवी की दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। देवी की ये दस महाविद्याएं बहुत शक्तिशाली हैं और धन्य भक्त के लिए दुनिया में कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता है। ये देवी की दस महाविद्या हैं- काली, तारा (देवी), छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी (त्रिपुर सुंदरी), धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला। गुप्त नवरात्रि में भक्त मनोकामना पूर्ति और सिद्धि के लिए तंत्र मंत्र की पूजा करते हैं।
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।

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