धार्मिक

घुघरी में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कृष्ण जन्म की अलौकिक लीला का हुआ भावपूर्ण वर्णन

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया

उमरियापान । घुघरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन (चढ़ावा दिवस) कथा व्यास महाराज बाल संत ब्रह्मानंद दास जी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य एवं अलौकिक लीला का भावपूर्ण वर्णन किया । कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति, उल्लास और आनंद से सराबोर हो गया।
महाराज जी ने बताया कि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ । जैसे ही कृष्ण जन्म का प्रसंग आया, पंडाल में “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे भजनों की गूंज उठी और नंदोत्सव की छटा सजीव हो उठी।
अवतरण का कारण: महाराज जी ने बताया कि अत्याचारी कंस के पापों का अंत करने और पृथ्वी पर धर्म की पुनः स्थापना हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया।
जन्मोत्सव का प्रसंग: कारागार में जन्म लेने के पश्चात वासुदेव जी बालकृष्ण को गोकुल में नंद बाबा एवं यशोदा मैया के यहां पहुँचा देते हैं, जिसके बाद गोकुल में आनंद और उत्सव का वातावरण बन जाता है। ।
भक्ति और समर्पण का संदेश: कथा का उद्देश्य केवल सुनना नहीं, बल्कि अपने मन रूपी कारागार में भगवान को प्रकट करना है—यही सच्ची भक्ति है ।
कथा समापन के पश्चात श्रद्धालुओं को पंजीरी, पंचामृत एवं माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया । बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने कृष्ण जन्मोत्सव की इस दिव्य अनुभूति को आत्मसात किया ।

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