कृषिमध्य प्रदेश

गेहूं की नई किस्म तैयार, ज्यादा गर्मी में भी समय पूर्व नहीं पकेगी, पैदावार बढ़ेगी

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन।
मप्र के नर्मदापुरम के पंवारखेड़ा गेहूं अनुसंधान केंद्र में 3 साल चली रिसर्च।
बदलते मौसम को देखते हुए मध्य प्रदेश में नए किस्म का गेहूं तैयार किया गया है। नर्मदापुरम, इंदौर, जबलपुर और सागर के अनुसंधान केंद्रों पर तीन साल चली रिसर्च के बाद गेहूं की नई किस्म 1634 और 1636 आम किसानों के लिए रिलीज कर दी गई है। रबी सीजन में इसका सर्टिफाइड बीज बाजार में मिलने लगेगा।दोनों नई किस्मों का गेहूं ज्यादा तापमान में भी समय से पहले नहीं पकेगा। इससे पैदावार नहीं घटेगी। दरअसल पुरानी किस्म का गेहूं फरवरी और मार्च में तापमान ज्यादा होने पर समय से पहले पकने लगा है। अनुसंधान के दौरान पाया गया कि 20 फीसदी तक पैदावार घट रही है। इसके चलते नई किस्म तैयार की गई।
पहले साल इंदौर में और अगले दो साल इंदौर सहित नर्मदापुरम, जबलपुर और सागर के अनुसंधान केंद्रों पर भी प्लाॅट डाल कर रिसर्च की गई। रिसर्च में पाया गया कि अधिक तापमान में भी यह गेहूं समय से पहले नहीं पका पुरानी किस्मों में जो औसत पैदावार 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से घटकर 55 क्विंटल रह गई थी। वह इस नई किस्म में 65 क्विंटल ही रही। 1634 की फसल 110 और 1636 की 115 दिन में तैयार हुई। तापमान ज्यादा ना होने पर पैदावार 70 क्विंटल तक चली गई।
नर्मदापुरम सेंटर से गेहूं की अब तक 53 किस्में रिलीज….
गेहूं अनुसंधान केंद्र में अब तक गेहूं की 53 किस्में तैयार कर भारत सरकार की ओर से रिलीज की जा चुकी है। यहां 6 हजार जर्म प्लाज्म की लाइन है। छह हजार एंट्री से अलग-अलग गुणाें के आधार पर पेरेंट का सिलेक्शन करते हैं। पहले साल उसकी क्रशिंग करते हैं। 7 साल तक लगातार सिंगल प्लांट का चयन करते हैं। सबसे ज्यादा उत्पादन वाली किस्माें से उन्हें कंपेयर किया जाता है।

गर्मी का फसल पर कोई असर नहीं और स्वाद भी बेहतर…..
अनुसंधान केंद्र पर प्लॉट के अलावा कुछ किसानों के खेतों पर भी सैंपलिंग की गई। ऐसे देवास जिले के किसान याेगेंद्र सिंह पवार ने बताया हमने दो नई समेत चार किस्माें के गेहूं लगाए थे। दाेनाें नई किस्माें पर तेज गर्मी का असर नहीं पड़ा। पैदावार 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के लगभग आई।नकतरा कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ स्वप्निल दुबे ने बताया कि रायसेन जिले में भी गेंहू की नई किस्म की बुआई कर नया तरीका किसान इस बार ईजाद करेंगे।

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