भगवान शिव का अर्थ ही कल्याणकारी है : शास्त्री
सिलवानी। ग्राम मुआर में सात दिवसीय शिव महापुराण के समापन अवसर पर शिवपुराण की कथा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है, द्वादश ज्योतिर्लिंग का प्रतिपादन करते हुए कथा व्यास पंडित राजेंद्र प्रसाद शास्त्री ने कहा कि संपूर्ण पृथ्वी में भारत भूमि वह पुण्य भूमि है, जहां पर भगवान शिव द्वादश ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए हैं। सनातन धर्म को मानने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने जीवन काल में इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों का दर्शन अनिवार्य रूप से करें। द्वादश ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही विघ्न भय बाधाओं का निराकरण भगवान शिव की कृपा से हो जाता है। आगे पंडित शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव मृत्यु के देवता हैं वह अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति प्रदान करते हैं। इसके लिए व्यक्ति को चाहिए कि वह भगवान शिव के अमोघ पंचाक्षर मंत्र का जाप करे। संसार में पंचाक्षर मंत्र से अधिक प्रभावशाली दूसरा मंत्र नहीं है। शीघ्र ही भगवान शिव इस मंत्र के साधक के ऊपर कृपा करके उसका कल्याण कर देते हैं । जीवन में जीवन जीते हुए व्यक्ति को अपने आत्म जागरण का प्रयास अनिवार्य रूप से कर लेना चाहिए। आत्म जागरण के लिए कल्याणकारी भगवान शिव का अनुग्रह ही सर्वोपरि है। शिव ही व्यक्ति के जीवन में अपनी दया का समावेश करके उसका उद्धार कर देते हैं। शिव महापुराण भगवान शिव का साहित्यिक विग्रह स्वरूप है इसकी कथा श्रवण करने का प्रतिफल भगवान शिव की कृपा के रूप में प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त हो जाता है। आगे शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव का अर्थ ही कल्याणकारी है वह अपने आप शरण में आए हुए व्यक्ति का कल्याण कर देते हैं। अतः कल्याण चाहने वाले व्यक्ति को भगवान शिव की शरण का आश्रय अनिवार्य रूप से ग्रहण कर लेना चाहिए। कथा समापन के अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया एवं आयोजन समिति एवं समस्त ग्राम वासियों ने आगंतुक श्रोता सज्जनों माताओं बहनों का आभार व्यक्त किया एवं व्यासपीठ का पूजन करके कथा व्यास पंडित शास्त्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।


