मध्य प्रदेश

सिहोरा नगर की अर्थ व्यवस्था, सड़के, नाली टूटी पड़ी तो वहीं सालों से शीशी सड़कों में पनप रहे मच्छर

इंजीनियर, अधिकारी का नहीं हैं इस ओर ध्यान, मोटा वेतन लेकर लूट रहे वाहवाही
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर जिले की निकायो में जहां साफ सफाई स्वच्छता व्यवस्था की भर मार मची हुई हैं वहीं दूसरी ओर वार्डो में बनीं हुई लाखों रुपयों की लागत राशि से सी सी सड़के टूटी फूटी के साथ साथ कई सालों से इन सीमेंट की सड़कों में पानी भराव के चलते गंदगी, मच्छरों का पनपना अधिक हो गया हैं। जिनसे डेंगू, मलेरिया, पीलिया सहित वायु प्रदूषण जैसे हालत इन दिनों नगर पालिका परिषद सिहोरा के वार्डों में देखने मिल रहे हैं। आज दैनिक अर्थ व्यवस्था एवं नगर की उचित व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन इंजीनियर एवं अधिकारीयों को सौंपी गई है। वे महीने भर में कुछ ही दिन ऑफीस में नजर आते हैं बाकी दिनों में जबलपुर की मीटिंग या फिर फील्ड का बहाना बताते हुए पल्ला झाड़ देते। लेकिन आज नगर के इन 18 वार्डों की दुर्दशा की जिम्मेदारी इन अधिकारी के कारण बनी हुई हैं। महीने के 10 दिन छुट्टी अवकाश रहता है। बाकी 20 दिनों में मीटिंग एवं वीडियो कॉन्फेंस में समय निकल जाता है। जिससे इन कर्मचारियों अधिकारियों के वजह से नगर पालिका सिहोरा क्षेत्रों में कार्य तो दूर की बात इंजीनियर अधिकारी वार्डो में गम्भीर समस्याओं को लेकर भ्रमण तक नहीं करते।
आज सबसे ज्यादा समस्याओं को लेकर सीएम 81 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज तो हैं। लेकिन उनका निराकरण हो गया। पर वास्तविकता कुछ और बया कर रही हैं।
नगर की व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी – सिहोरा नगर की अर्थ व्यवस्था, सड़के, नाली टूटी पड़ी तो वहीं सालों शीशी सड़कों में पनप रहे मच्छर, इंजीनियर, अधिकारी का नहीं हैं इस ओर ध्यान, मोटा वेतन लेकर लूट रहे वाही वाही। जहां वार्ड प्रतिनिधि से लेकर वार्ड प्रभारी इंजीनियर, सफाई कर्मचारी के साथ अन्य पेय जल व्यवस्था की अर्थ व्यवस्था बनी हुई हैं। पर इस ओर किसी का ध्यान तक दूर की बात ये वार्डो में झांकने तक नहीं जाते।
नगर पालिका परिषद सिहोरा – 18 वार्डों की विभिन्न नल जल अव्यवस्था, टूटी नाली, सड़कों को लेकर वार्ड वासियों ने सीएमओ से लेकर इंजीनियर तक इनकी समस्या बताई लेकिन व्यवस्था जस की तास।
वार्डवासियों ने लगाए आरोप – वार्डो की दुर्दशा और मन मर्जी के साथ हो रहे नगरीय निकाय सिहोरा नगर पालिका में कार्य। न कोई सुनने को तैयार न कोई देखने वाला। इसको लेकर सीधे वार्डवासी ने आरोप लगाते हुए मीडिया को बताया कि जब हम सीएम 81हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करते हैं तो कुछ समय के बाद दबाव बना कर शिकायत वापिस लेने के लिए कह दिया जाता है। और वार्डो की समस्याओं का निदान अपने ही तरीके से करते हैं।
नहीं मिलते ऑफिस में इंजीनियर – ज्यादा तर देखा गया हैं कि पीडब्ल्यूडी इंजीनियर गौरव चौधरी,एवं उपयंत्री नमन श्रीवास्तव इनके जेम्बर में ताला ही लगा हुआ मिलता है। वहीं शासन प्रशासन के द्वारा इनको मोटा मोटा वेतन तो देती है पर इनसे फीड बैंक समय पर नहीं ले पाती हैं। जिससे कि नगर की आम जनता अपने अधिकारों से वंचित रह जाती हैं। वहीं
राज्य शासन के निर्देश हैं कि सभी अधिकारी कर्मचारीगण मुख्यालय में रह कर कार्य करें। लेकिन इनके सभी के द्वारा जबलपुर से आप डाउन किया जाता हैं जिसे समय एवं शासन के पैसों का दुर उपयोग किया जा रहा हैं।
स्थानीय लोगों ने उच्च अधिकारियों के मांग की है कि ऐसे लोगों के ऊपर उचित कार्यवाही करें। आम जनों को उचित सुविधाओं का लाभ समय पर मिल सकें।

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