चक्रवर्ती सम्राट भरत की दिग्विजय यात्रा निकाली
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । आठ दिवसीय समोसारण विधान के तहत चक्रवर्ती सम्राट भरत की दिग्विजय यात्रा कार्यक्रम स्थल नसिया जी से प्रारंभ होकर गम्भीरीया रोड होती हुई मैन सागर भोपाल रोड से नया बस स्टैंड, पुराना बस स्टैंड, गांधी बाजार, कबीट चौराहा से दिगंबर जैन मंदिर मार्ग से होती हुई फिर नसिया जी पहुंची जहां विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
यात्रा में आचार्य विद्या सागर महाराज के परम शिष्य मुनि 108 समता सागर महाराज, मुनि महा सागर महाराज, मुनि निष्कंप सागर महाराज, एलेक निश्चिय सागर महाराज साथ साथ चल रहे थे। जगह-जगह लोग मुनिवर का अभिवादन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे।
इस विधान महोत्सव के तहत सुबह छ: बजे से मंगलाष्टक अभिषेक, शांतिधारा पूजन के पश्चात्य सात बजे से विधान प्रारंभ, साढ़े नो बजे से मुनि संघ के मंगल प्रवचनों के उपरांत पुनः विधान प्रारंभ, रात्रि में महा आरती एवं धर्मोपदेश का आयोजन प्रतिदिन चल रहा है।
मंगलवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के पुत्र जिनके नाम पर देश का नाम भारत हुआ। उन्हीं चक्रवर्ती सम्राट भरत की भव्य दिग्विजय यात्रा नगर में पहली बार निकाली गई। यात्रा में चक्रवर्ती सम्राट भारत के पात्र ऐरावत (हाथी) पर सवार थे। उनके पीछे पीछे ताशे नगाड़े डीजे की धुन पर बग्गी गाड़ियों पर रथ पर सवार होकर पात्र चल रहे थे।
सौधर्म इंद्र के पात्र के रूप में, विनय जैन परिवार कुबेर इंद्र के पात्र के रूप में सचिन जैन रजपुरा परिवार, बाहुबली के पात्र के रूप में बग्गियों में सवार अक्षय जैन जो जैन समाज के अध्यक्ष है चल रहे थे । उनके साथ साथ ही जैन भजनों पर नृत्य करते एवं जयकारे लगाते हुए युवा चल रहे थे। भव्य दिग्विजय चक्रवर्ती यात्रा के जुलूस का संचालन नवयुवक जैन मंडल द्वारा किया गया मार्ग में जगह- जगह इस भव्य दिग्विजय यात्रा का स्वागत किया गया। चक्रवर्ती महाराज का जगह जगह तिलक किया विभिन्न स्थानों पर समाज बंधुओं ने जलपान शरबत आदि की व्यवस्था की थी जुलूस में शामिल महिला पुरुष युवाओं एवं कन्याओं ने जलपान शपथ ग्रहण किया । विभिन्न स्थानों पर समाजसेवी द्वारा यात्रा का स्वागत करते हुए स्वल्पाहार कराया गया। इस दिग्विजय यात्रा का समापन कार्यक्रम स्थल नसियां जी मैं हुआ
यहाँ एक धर्म सभा का आयोजन किया गया।
इसके बाद भरत चक्रवर्ती और बाहुबली के बीच युद्ध हुआ जिसमें बाहुबली जीत गए और धन दौलत मान अभियान छोड़ बैरागी हो गए।




