मध्य प्रदेश

राजमार्गो व मुख्य सड़कों में घूमने वाले पशुओं के पशुपालकों के विरूद्ध एफआईआर कराने का हुआ निर्णय

कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समिति की बैठक संपन्न
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । कलेक्टर दिलीप कुमार यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समिति की बैठक मे राजमार्गो व मुख्य सड़कों में घूमने वाले पशुओं के पशुपालकों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ संतोष डेहरिया, डीएसपी आजक प्रभात शुक्ला, उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ आर.के.सिंह, नगर निगम उपायुक्त पवन कुमार अहिरवार सहित श्री दयोदय पशु सेवा केन्द्र केलवारा, मॉ शारदा गौशाला एवं पर्यावरण समिति जमुआनी कला विजयराघवगढ़ और श्री नंद गौशाला समिति ताली रोहनिया कुठिया महगवां बरही के संचालकगण व एसडीओ वन सुरेश बरोले और समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
बैठक मे राजमार्गो और सड़कों पर बारिश के मौसम मे गौ-वंश के बैठे और खड़े रहने से दुर्घटना की लगातार संभावना पर चिंता व्यक्त करते हुए समिति के सदस्यों ने हाल ही में 23 अगस्त को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी दिलीप कुमार यादव द्वारा जारी किये गये प्रतिबंधात्मक आदेश के तहत कार्यवाही करने पर सदस्यों ने बैठक में सहमति दी। सदस्यों ने कहा कि पशुओं के सड़क दुर्धटना में मृत होने और घायल होने के मामलो पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाये जाने चाहिए।
सड़कों में विचरण करते गौ-वंशों को गौशालाओं और अस्थाई गौ- आश्रय स्थलों में रखने के निर्देश देते हुए कलेक्टर यादव ने कहा कि यह सुनिश्चित हो कि प्रत्येक गौशालाओं में नियमित प्रतिदिन पशु चिकित्सक पहुंचें और बीमार वृद्ध व घायल पशुओं का उपचार करें। साथ ही मृत पशुओं का नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के सहयोग से निष्पादन की कार्यवाही की जाये।
बैठक में कलेक्टर दिलीप यादव ने निर्देशित किया कि पशुपालकों द्वारा आवारा छोड़ दिए गए पशुओं को चिन्हित कर पशुपालकों के विरुध्द एफआईआर नगरीय क्षेत्र में नगर निगम द्वारा कराया जाय। ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत के निर्देशन मे ग्राम पंचायतों द्वारा एफआईआर दर्ज कराई जाये। बैठक में उपसंचालक डॉ आर.के.सिह ने बताया कि अधिकांश पशुओं में पहचान हेतु टैग लगे हुए है, नगर निगम क्षेत्र एवं ग्राम पंचायत क्षेत्र में सड़कों पर आवारा पकड़े गए पशु जिनमे टैग लगे है, उनके टैग नंबर क्षेत्र में पदस्थ पशुपालन विभाग के चिकित्सक को उपलब्ध कराने पर पशुपालक की जानकारी प्राप्त हो जावेगी। जिससे ’पशुपालक के विरुध्द नगरीय निकाय एवं जनपद पंचायत के निर्देशन मे संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा एफआईआर दर्ज कराई जा सकेगी।

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