मध्य प्रदेश

अकीदत से इबादत कर मनाई शब-ए-बारात

रात भर चलता रहा अल्लाह की इबादत का दौर
गुनाहों की माफी और अमनों अमान की दुआएं मांगी

रिपोर्टर : संजय द्विवेदी
गैरतगंज।
मुस्लिम समुदाय के पवित्र माह रमजान की शुरुआत से पहले शाबान महीने की पंद्रहवीं रात मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा रात भर अल्लाह की इबादत की जाती है। इस रात को शब-ए-बारात या शब-ए-कद्र कहा जाता है, शब-ए-बरात का मतलब यह है कि अल्लाह इस रात में अपने बंदों को जहन्नुम यानी नरक से आज़ाद करते हैं और तमाम गुनाहों की माफी अता फरमाते हैं। रहमतों की रात यानी शब-ए-बारात या शब ए कद्र इस वर्ष शुक्रवार को मनाई गई। मुस्लिम समुदाय के अनुयायियों का मानना है कि इस दिन अल्लाह की रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। अकीदतमंद अल्लाह की खुशी और अपने गुनाहों की तौबा करने के लिए पूरी रात इबादत में लगे रहे एवं अपने गुनाहों की माफी अल्लाह से मांगते रहे। लोगों ने रात भर अल्लाह की इबादत करते हुए अपने पुरखों की कब्रों पर जाकर मगफिरत की दुआएं मांगी और अपने रब से गुनाहों की माफी मांगी।
मुफ्ती मशकूर साहब ने बताया कि शब-ए-बरात अल्लाह का दुनिया वालों पर एक इनाम है, ये कोई त्यौहार या कोई रस्म नहीं है जिसको मनाया जाए या इसकी मुबारकबाद दी जाए। बल्कि ये तो अल्लाह की एक इबादत है जिसमें लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और उन्हें जहन्नुम से छुटकारा मिलता है एवं उनकी मगफिरत होती है। इस रात अल्लाह रहमत के दरवाजे खोल देता है और हर उस शख्स को बख्श देता है जो उसका जिक्र करने वाला हो।
मुस्लिम त्यौहार कमेटी के प्रदेश महासचिव मोहम्मद मुजीब अंसारी ने बताया कि अकीदतमंदो ने कल शब-ए-बारात के दिन और पूरी रात शहर की मस्जिदों में विशेष नमाज़ अदा की और कुरान की तिलावत कर अल्लाह की इबादत करते रहे। लोगों ने कब्रस्तान जाकर अपने बुजुर्गों की मगफिरत की दुआएं भी मांगी वहीं महिलाएं एवं बच्चे भी रातभर घरों में इबादत करते रहे।

Related Articles

Back to top button