कृषि

बादलों ने रोकी किसानों की मेहनत कटाई-गहाई ठप, फसल पर संकट के बादल

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
जबेरा । जिले में मौसम के फिर करवट बदलते ही किसान एक बार फिर चिंता में पड़ गए हैं। शनिवार और रविवार को बांदकपुर, बनवार, बीजडोंगरी, सिग्रामपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में कहीं मध्यम तो कहीं हल्की बूंदाबांदी देखने को मिली। सुबह से लेकर देर शाम तक आसमान में बादल छाए रहे। इस बेमौसम बारिश ने खेतों में पककर तैयार धान की फसल पर प्रतिकूल असर डाल दिया है और किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
जबेरा विकासखंड के अंतर्गत करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल बोई गई थी। दीपावली के बाद से किसानों ने कटाई-गहाई के काम में तेजी ला दी थी, लेकिन सप्ताहांत में बदले मौसम ने मेहनत पर ब्रेक लगा दिया। खेतों में कटकर पड़े धान के कड़पे अब भीगने लगे हैं, जिससे फसल खराब होने का डर बढ़ गया है। किसानों ने आनन-फानन में खेतों से धान के पुंज उठाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन लगातार हो रही नमी और बारिश के कारण खलिहान बनाकर खरही तैयार नहीं की जा सकी।
किसानों का कहना है कि पहले ही इस वर्ष फसल पर इल्ली और अन्य कीटों का प्रकोप देखने को मिला था और अब बेमौसम बारिश ने मुसीबत बढ़ा दी है। पककर तैयार फसल में पानी का रिसाव हो जाने से बीज की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और दाने में कालापन आने का खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में किसानों को समर्थन मूल्य पर भी उचित दाम मिलने में दिक्कत होगी क्योंकि खरीदी केंद्रों पर एफएक्यू मापदंडों के अनुसार ही फसल स्वीकार की जाती है।
मौसम विभाग ने आने वाले दो से तीन दिनों तक हल्की बारिश की संभावना जताई है। किसानों के अनुसार इस समय हल्की प्रजाति की धान की कटाई और गहाई का समय चल रहा है, ऐसे में मौसम का यह मिजाज उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गया है। खेतों में नमी के कारण गहाई का काम पूरी तरह ठप है और धान की फसल के पुंज खेतों में ही पड़े हैं जिन्हें सड़ने से बचाने के लिए किसान दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
पहले कीटों का हमला और अब बारिश की मार ने किसानों की मेहनत पर सवाल खड़ा कर दिया है। तैयार फसल खेत में है लेकिन मौसम ने रास्ता रोक रखा है। किसान अब बस यही उम्मीद कर रहे हैं कि आसमान से उतरते बादल थम जाएं ताकि वे अपनी मेहनत को संभाल सकें और घर तक अन्न का दाना पहुंचा सकें।

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