मध्य प्रदेश

वर्षो से जमे पुलिस कर्मियों की वजह से, पाटन थाना क्षेत्र में बढ़ी अवैध गतिविधियां ?

आरक्षक कविता शर्मा के स्थांतरण पर जवाबदार बने मौन
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर जिले की पाटन तहसील अंतर्गत आने वाले पाटन थाना क्षेत्र में लगातार अपराध बढ़ने से आमजनता काफ़ी परेशान है। इसका मुख्य कारण लम्बे समय से एक ही जगह थाने में पुलिस कर्मी की पोस्टिंग से अवैध कार्यों में लिप्त लोगों से पुलिस की निकटता हो जाना है जिसके कारण अपराधियों के हौसले अधिक बुलंद हो जाते है। कोर्ट में चालान देर से पहुँचने से अधिक समय से जमे पुलिस कर्मी अपराधियों तथा आपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोगों से अपने आला अधिकारियों के लिए वसूली करके उनकी जेब गर्म करने का काम करते है। यही प्रमुख वजह है जिसके कारण दसको से जमे पुलिस कर्मी का ट्रांसफर नहीं हो पाता है। इस क्रम में पाटन थाना क्षेत्र में अवैध शराब,सट्टा का कारोबार अपने चरम पर है। इस पर अंकुश लगाना इन पुलिस कर्मियों के बस की बात नहीं है।
पाटन में लगभग एक दशक से जमी हुई आरक्षक:-एसडीओपी कार्यालय में वर्तमान पदस्य आरक्षक कविता शर्मा पति सौरभ शर्मा लगभग 9 वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी पाटन मुख्यालय में अंगद के पैर की तरह जमी हुई है। जब इनकी पदस्थापना की जानकारी एकत्रित की गई तो पता चला कि ये दिनांक 19 सितंबर 2014 से 30 मई 2019 तक पाटन थाने में पदस्त रही । व अल्प समय के लिए विजय नगर थाने में पोस्टिंग कराकर पुन: पुलिस एसडीओपी कार्यालय पाटन में अंगद के पांव की तरह आ कर जम गई । जो आज दिनांक तक जमी है। आरक्षक ने पाटन मुख्यालय में अपनी गहरी जड़ें जमा ली है।
सूत्रो से मिली जानकारी अनुसार रिपोर्ट पर कार्यवाही के नाम पर वसूली, रेत माफिया,शराब माफिया, सट्टा खिलाने वालो से अवैध वसूली, बैंक के लोन सेटलमेंट के नाम पर पाटन नगर में कई लोगो को ठगी का शिकार आरक्षक एवं उसका पति बना चुका है। चुकी महिला पुलिस कर्मी अपनी काली कमाई का कुछ हिस्सा अपने आला अधिकारियों की जेब गर्म करने में खर्च करती है । जिसकी वजह से इस पर कोई कार्यवाही नहीं होती है।आरक्षक के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। अपने ही विभाग के पुलिस अधिकारियों कर्मचारी को अपने पति की धोस दिखाकर डराने धमकाने का काम करती हैं । इनको कई बार देखा गया है यदि किसी ने इनका विरोध किया तो मीडिया में खबर चलाने की धमकी देना इनके लिए आम बात हो गई है। आखिर क्या वजह है जो एक दशक से पाटन मुख्यालय में जमी है। आखिर किसके बल, संरक्षण व आशीर्वाद की वजह से अभी तक यहाँ पर जमी हुई हैं । यह दंपति पाटन से टस की मस होने तैयार नहीं, इतना ही नहीं बल्कि आरक्षक के द्वारा सार्वजनिक तौर पर कहते सुना गया हैं कि हमें पाटन से कोई माई का लाल नहीं हिला सकता है। पाटन में एक दशक से पोस्टिंग एवं आरक्षक कविता शर्मा का ट्रांसफर नहीं होना एक विचारणीय प्रश्न है। अब देखना होगा जिले के आला अधिकारी क्या कार्यवाही करते है या उक्त ट्रांसफर के मामले को ठंडे बस्ते में डाल कर आगे एक दशक और पाटन में जमे रहने का वरदान फिर से देगें ये समय आने पर ही पता चल पायेगा ।

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