मध्य प्रदेश

नपा में ‘कमीशनराज’ का तांडव, 50% के फेर में फंसा विकास!

परासिया नपा अध्यक्ष विनोद मालवीय का नया ऑडियो वायरल 50%  कमीशन कि मांग
​परासिया। क्या नगर पालिका परिषद अब विकास का केंद्र नहीं, बल्कि ‘वसूली का अड्डा’ बन चुकी है? छिंदवाड़ा जिले के परासिया से वायरल हुए एक सनसनीखेज ऑडियो ने सत्ता के गलियारों में जो भूचाल लाया है, उसने ईमानदारी के नकाब को तार-तार कर दिया है। कथित तौर पर नगर पालिका अध्यक्ष विनोद मालवीय का यह ऑडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि परासिया की जनता की गाढ़ी कमाई अब सड़कों पर नहीं, बल्कि ‘आधे-आधे’ के बंदरबांट की भेंट चढ़ने वाली है।
*​विकास की ‘बली’ और 50% की ‘भली’*
​वायरल ऑडियो की रिकॉर्डिंग ने भ्रष्टाचार की उस सड़ांध को उजागर किया है, जिसकी कल्पना मात्र से जनता सिहर उठती है। टेंडरों और भुगतानों के बदले सीधे 50 प्रतिशत कमीशन की मांग करना न केवल अनैतिक है, बल्कि परासिया के भविष्य के साथ किया गया एक घिनौना अपराध है।
*​तीखे सवाल जो जवाब मांगते हैं:*
​गुणवत्ता का जनाज़ा: जब आधा पैसा अध्यक्ष की जेब में जाएगा, तो क्या सड़कें कागज की बनेंगी?
​जनता से गद्दारी: जिस हाथ ने वोट दिया, क्या उसी हाथ से विकास का हक छीनना ही ‘राजधर्म’ है?
​मौन प्रशासन: आखिर किसके वरदहस्त के नीचे भ्रष्टाचार का यह नंगा नाच चल रहा है?
​सत्ता के अहंकार पर जनता का प्रहार
​जैसे ही यह ‘ऑडियो बम’ फटा, समूचे क्षेत्र में जनाक्रोश की लहर दौड़ गई है। आम नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या नगर पालिका का काम सिर्फ रसूखदारों की तिजोरियां भरना रह गया है? सामाजिक गलियारों में चर्चा है कि यदि शीर्ष पर बैठा व्यक्ति ही ‘आधा हिस्सा’ मांगेगा, तो निचले स्तर पर लूट का आलम क्या होगा।
*​जांच का दिखावा या कड़ी कार्रवाई?*
​हालांकि मामला अब फॉरेंसिक जांच और उच्च स्तरीय जांच की ओर बढ़ रहा है, लेकिन सवाल वही है— क्या न्याय होगा? पूर्व में भी विवादों के साये में रहे मालवीय के लिए यह ऑडियो उनके राजनीतिक अंत की इबारत लिख सकता है।
*​”यह केवल भ्रष्टाचार नहीं,* परासिया की जनता के विश्वास की हत्या है। 50% कमीशन का मतलब है—50% घटिया निर्माण और 100% विश्वासघात।”
पूर्व में सत्ता पक्ष के ही २-३ पार्षद लगातार नगरपालिका के भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाते थे
आज वो भी चुप है या भ्रष्टाचारी को लगातार सत्ता का संरक्षण मिलने से मायूस हो गए या पार्टी के अनुशासन के डंडे ने मुंह पर पट्टी लगा दी क्या
विपक्ष के १० पार्षद जिनका तो काम ही है की कम से कम भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाए। पर उनका मौन तो अध्यक्ष और भ्रष्टाचार की चरण वंदना करता प्रतीत हो रहा है।
भर्ष्टाचार को सबका समर्थन या तो बटवारा करके दिया जा रहा होगा या डर से सब चुप है
पर इस मुद्दे पर परासिया की जनता चुप नहीं रहने वाली वो सड़को पर उतर कर विरोध करेगी आख़िर लोकतंत्र में जनता ही सिरमौर होती है
और वो सब खड़ी होती है तो अच्छे अच्छे सिरमौर धराशायी हो जाते है।

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