
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• *_जय श्री हरि_* •••✦
🧾 *आज का पंचाग_* 🧾
*शुक्रवार 22 मई 2026*
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥_*
🌌 *_दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
*_शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*_शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
*_शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन – उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – अधिमास ज्यैष्ठ मास_*
🌓 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष_*
📆 *_तिथि – शुक्रवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 06:24 AM तक उपरांत सप्तमी तिथि 05:04 AM तक उपरांत अष्टमी_*
🖍️ *_तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र आश्लेषा 02:08 AM तक उपरांत मघा_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। तथा अश्लेषा नक्षत्र के देवता नाग (सर्प) देवता है।_*
⚜️ *_योग – वृद्धि योग 08:18 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग_*
⚡ *_प्रथम करण : तैतिल 06:25 AM तक, बाद गर 05:39 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : वणिज 05:04 AM तक, बाद विष्टि_*
🔥 *_गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक।_*
⚜️ *_दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ।_*
🤖 *_राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए|_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:26:06_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:09:05_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:04 ए एम से 04:46 ए एम_*
🌇 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:25 ए एम से 05:27 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:51 ए एम से 12:45 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:35 पी एम से 03:30 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : संध्या काल 07:08 पी एम से 07:28 पी एम_*
🌃 *_सायाह्न सन्ध्या संध्या काल 07:09 पी एम से 08:11 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : रात्रि काल 12:34 ए एम, मई 23 से 02:08 ए एम, मई 23_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, मई 23_*
🚓 *_यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।_*
🤷🏻♀️ *_आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ गण्ड मूल/ आडल योग/जरथोस्तनो दिसो/ शाबुओथ (ज्यु – यहूदी)/ महान योद्धा शेर शाह सूरी स्मृति दिवस, ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय जयन्ती, अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, राष्ट्रीय समुद्री दिवस, विश्व गोथ दिवस, राज्यसभा के सदस्य देवदास गांधी जन्म दिवस, वेतुरी सुंदरराम मूर्ति स्मृति दिवस, श्रीपाद अमृत डांगे स्मृति दिवस, जम्मू और कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जन्म दिवस, गामा पहलवान जन्म दिवस, प्रसिद्ध भारतीय व्यवसायी सोहराब फिरोजशाह गोदरेज पुण्य तिथि, अजय आहूजा जन्म दिवस, अरुण कुमार अरविंद जयन्ती
✍🏼 *_तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🗼 *_Vastu tips_* 🗽
वास्तु में स्वच्छता को सकारात्मक ऊर्जा का आधार माना गया है। किराए के घर में रहने से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करना जरूरी माना जाता है। घर में बेकार और टूटी-फूटी चीजें जमा नहीं करनी चाहिए। अव्यवस्था और गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है, जिससे मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
*_मुख्य द्वार वास्तु अनुसार घर का मुख्य दरवाजा ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है। इसलिए मुख्य द्वार को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे पर स्वास्तिक, ॐ या शुभ-लाभ जैसे शुभ चिन्ह लगाना अच्छा माना जाता है। साथ ही मुख्य दरवाजे के पास पर्याप्त रोशनी होना भी जरूरी बताया गया है।
*_पूजा स्थान किराए के घर में छोटा सा पूजा स्थान भी सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद करता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण पूजा के लिए शुभ माना गया है। पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना लाभकारी माना जाता है।
*_सोने की दिशा आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। इससे अच्छी नींद और मानसिक शांति बनी रहती है। वहीं उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से बचने की सलाह दी जाती है।
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*_यदि आप रोज शंख बजा सके, तो इससे फेफड़ो का संक्रमण कभी नहीं होता।
*_सुबह गर्म पानी पीने से फेफड़ों सिकुड़न पैदा होती है। अगर आप गर्म पानी पीना चाहें, तो खाने के एक घण्टे बाद ही पिये। इससे अनावश्यक चर्बी गल जाएगी। हमेशा गर्म पानी का सेवन कफ को सुखाता है।श्वांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
*_कफ की क्वाथ का काढ़ा बनाकर सुबह खाली पेट नियमित पियें।
*_अमृतम लोजेन्ज माल्ट भोजन पूर्व एक चम्मच गुनगुने दूध से लेवें।
*_रात में दही न खाएं।
*_नमकीन दही कभी न लेवें।
*_सुबह गर्म पानी न पिएं, केवल सादा जल ही लेवें।
*_उदर में कब्ज न पनपने दें।
*_कब्ज हो, तो अमृतम टेबलेट की 1 से 2 गोली रात को सोने से 30 मिनिट पहले सादे जल से 1 महीने तक लें।
🩸 *आरोग्य संजीवनी* 💊
लिवर और प्लीहा (Spleen) के लिए रामबाण: यह लिवर की सूजन, पीलिया और लिवर सिरोसिस जैसी समस्याओं में बहुत फायदेमंद है। इसे ‘प्लीहारी’ भी कहा जाता है क्योंकि यह तिल्ली के रोगों को दूर करती है।
*_पाचन तंत्र में सुधार: पेट की गैस, एसिडिटी, अपच और दस्त जैसी समस्याओं में इसका उपयोग किया जाता है।
*_रक्त शोधक: यह खून को साफ करती है, जिससे फोड़े-फुंसी और त्वचा के रोग ठीक होते हैं।
*_खांसी और अस्थमा: कफ, बलगम और सांस की नली की समस्याओं से राहत दिलाने में यह मददगार है।
*_घाव भरना: इसके पत्तों या जड़ को पीसकर लगाने से पुराने या न भरने वाले घाव जल्दी ठीक होते हैं।
*_उपयोग का तरीका: पाउडर/चूर्ण: चिकित्सक की सलाह के अनुसार इसके चूर्ण (लगभग 1-3 ग्राम) का शहद या गुनगुने पानी के साथ सेवन किया जाता है।
*_काढ़ा: इसके पूरे पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल, फल) को पानी में उबालकर काढ़ा बनवाकर पिया जाता है ।
📚 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार जब कुंडली मे ग्रह अशुभ प्रभाव युक्त हो दशा चक्र एवं गोचर प्रभाव मे कष्टदायक सिद्ध हो रहे हो तो उस ग्रह से संबंधित कारकत्व वाली वस्तुओ के दान का विधान वताये गये है जिसमे ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव का निस्तारण, कमी या न्यूनता आती है ।
*_इस संबंध मे ज्योतिर्विदाभरण ग्रन्थ मे लिखा है –
*_” खगेरिता साधुफलं जनेन
* *_तदर्चया यत्तदितं वरेण्यम्।
* *_सदौषधिस्नान विधानहोमा-
* *_पवर्जनेभ्योऽभ्युदयाय वा स्यात् ।
*_अर्थात ग्रहो के अनिष्ट फल शान्ति ग्रह पूजा , ओषधि- स्नान, होम एवं दान करने से होती है और मनुष्य का अभ्युदय होता है ।
*_नवग्रहो से सम्बंधित निम्नवत वस्तुओ के दान का प्रावधान बताए गये है जो इस प्रकार से हैं –
● *_सूर्य – सूर्य की अनिष्ट शान्ति के लिए केशर, जेठीमधु, कमलगट्टा ,इलायची, खस ,देवदारू, लाल पीले रंग से मिश्रित( नारंगी ) रंग के वस्त्र, गुड, ताम्र पात्र , माणिक्य , गेंहू , लाल कमल, बछडे वाली गौ, तथा मंसूर की दाल का दान करना चाहिए।
● *_चन्द्रमा – चन्द्रमा की अनुकूलता के लिए श्वेत चन्दन , घृत या घी , श्वेत वस्त्र, दही , दुग्ध , शंख , मोती, दूध से बने पदार्थ , रजत या चाँदी की वस्तुओ के दान का प्रावधान बताया गया है ।
● *_मंगल- मंगल ग्रह की शान्ति के लिए लाल पुष्प एवं पका हुआ भोजन दान, मूंगा ,गेंहू , मसूर की दाल, लाल रंग का बैल, कनेर पुष्प, लाल वस्त्र , गुड, ताम्र पात्र , रक्त चंदन के दान का विधान है ।
● *_बुध- जन्म कुंडली मे बुध अशुभ प्रभाव मे पीड़ा प्रदायक स्थिति मे होने पर हरी मूंग ,पन्ना , घी , कांस्य धातु के पात्र, हाथी दांत , भेड़ , हरे रंग की वस्तुऐ , गाय को चारा , पछीयो को दानापानी , पुष्प, हरे रंग के फल ,लता के दान बताया गया है ।
● *_गुरु – गुरु ग्रह की शान्ति के लिए अश्व , पीले रंग की धातु, मधु या शहद, पीले रंग के वस्त्र, पीला धान्य जैसे धान, चने की दाल आदि नमक , पीले पुष्प , शर्करा ( मीठा ) , हल्दी, ज्ञान वर्धक पुस्तके , पुखराज रत्न के दान का विधान बताया गया है ।
● *_शुक्र- शुक्र ग्रह दोष निवारण करने के लिए श्वेत अश्व , श्वेत वस्त्र, चित्रित चमकीले सुन्दर वस्त्र , चावल , घी , हीरा , सुगंधित पदार्थ, श्रंगार सामग्री , बछडे वाली श्वेत गौ, स्फटिक, कपूर, शर्करा, मिश्री, सफेद रंग की वस्तुऐ दान बताया गये है ।
● *_शनि – जन्मांक मे शनि अशुभ फल प्रदायक स्थिति मे हो तो काले रंग की गाय, सरसो के तैल का दान , नीलम, भैसा ,काले रंग के वस्त्र, लोहा ,जटा नारियल, उडद , काले तिल ,छाता , जूता एवं कम्बल का दान दक्षिणा के साथ करना चाहिए।
● *_राहु – राहु ग्रह के दोष निवारण के लिए खड्ग ( तलवार) , काली भेड़ , गोमेद, लोहा , कम्बल, नीले या काले रंग के वस्त्र, तिलपूर्ण खाद्य सामग्री , ताम्र पात्र का दान करने से राहु जनित दोष शान्त होते है ।
● *_केतु- जन्म कुंडली के अनुसार यदि केतु ग्रह दोषकारक हो तो छाग ( बकरी ) का दान, लहसुनिया, तैल युक्त वस्तुऐ , कस्तूरी , तिलयुक्त खाद्यपदार्थ, ऊनी वस्त्र, कम्बल, उड़द का दान करना चाहिए।
*_इस प्रकार से नवग्रहो हेतु विशिष्ट दान शास्त्रो मे बताए गए है योग्य दैवज्ञ के परामर्श से दान कार्य संपन्न करना चाहिए।
*_नवग्रहो के निमित्त दान सामान्य तया उस ग्रह के वार को किया जाता है सूर्य का दान रविवार को , चन्द्र का सोमवार को, मंगल का दान मंगलवार को , बुध का दान बुधवार को , गुरु का दान गुरुवार को , शुक्र का दान शुक्रवार को , शनिवार का दान शनिवार को , राहु एवं केतु का दान शुक्रवार या शनिवार को करना चाहिए साथ ही दान के समय ग्रह के होरा मे दान करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है ।
👉🏼 *_विशेष- ध्यान देने योग्य बात यह है जन्म कुंडली मे शुभ प्रभाव युक्त, बली ग्रह , हितकर , लाभदायक ग्रह का दान कदापि नही करना चाहिए ।
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⚜️ *_षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।


