धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 04 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 04 अक्टूबर 2025
04 अक्टूबर 2025 दिन शनिवार को अश्र्विन मास के शुक्ल पक्ष कि द्वादशी तिथि है। आज शनिवार को शनि प्रदोष व्रत भी है, एवं जिन दम्पतियों को पुत्र न हो वो आज किसी शिव मन्दिर मैं रुद्राभिषेक करवायें पुत्र प्राप्ति के निमित्त संकल्प करवाकर। यह शनिवार का प्रदोष अर्थात शनि प्रदोष काल व्रत संतान प्राप्ति हेतु बड़ा ही उपयुक्त मुहूर्त माना जाता है। आप पद्मनाभ द्वादशी का व्रत भी है। आज से ही दाल नहीं खाना चाहिए अर्थात दाल का परित्याग का व्रत (कार्तिके द्विदलं त्यजेत) आज से ही आरंभ होता है। आप सभी सनातनियों को “पद्मनाभ द्वादशी एवं शनि प्रदोष व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_

🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 05:09 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 09:09 AM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है और इसके देवता वसु हैं।
⚜️ योग – शूल योग 07:26 PM तक, उसके बाद गण्ड योग
प्रथम करण : बालव – 05:09 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 04:11 ए एम, अक्टूबर 05 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:16:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:03:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:38 ए एम से 05:27 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:16 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:46 ए एम से 12:33 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:08 पी एम से 02:55 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:03 पी एम से 06:28 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:03 पी एम से 07:17 पी एम
💧 अमृत काल : 01:09 ए एम, अक्टूबर 05 से 02:41 ए एम, अक्टूबर 05
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:45 पी एम से 12:34 ए एम, अक्टूबर 05
🌸 द्विपुष्कर योग : 06:16 ए एम से 09:09 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – द्विपुष्कर योग/ शनि प्रदोष/ पंचक जारी/ भारतीय कवयित्री कस्तूरी बाई पुण्य तिथि, भूतपूर्व भारतीय प्रधानमंत्री शक्ति सिन्हा स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा जयन्ती, भूतपूर्व राज्यपाल सरला ग्रेवाल जन्म दिवस, राष्ट्रीय अखंडता दिवस, विश्व अंतरिक्ष सप्ताह, विश्व पशु दिवस, खलीफा अल-आदिल स्मृति दिवस, साहित्य इतिहासकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल जन्म दिवस, भारतीय सैनिक बाबा हरभजन सिंह स्मृति दिवस, विश्व पशु कल्याण दिवस, राष्ट्रीय अखंडता दिवस, वन्यजीव सप्ताह (2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर)
✍🏼 तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।
🏘️ Vastu tips_ 🏚️
वास्तु शास्त्र की मानें तो मोगरा ऐसा पौधा है जिसकी खुशबू मन को सुकून देती है। साथ ही आसपास की नकारात्मकता भी दूर कर देती है और घर का माहौल ठीक हो जाता है। वास्तु शास्त्र में मोगरे के पौधे को सौभाग्य बढ़ाने वाला माना गया है। यह पौधा घर की सुंदरता तो बढ़ाता ही है साथ घर में पॉजिटिव एनर्जी भी लाता है। मोगरे का संबंध शुक्र और चंद्रमा से है। चूंकि शुक्र प्रेम, आर्कषण और ऐश्वर्य का प्रतीका है और चंद्रमा मन और शांति का प्रतीक होता है। यही कारण है कि इस पौधे से घर में प्रेम बढ़ता है और मन शांत रहता है।
किस दिशा में लगाना चाहिए? वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि मोगरे के पौधे को अगर सही दिशा में लगाए जाए तो ज्यादा प्रभावी होता है। इसलिए इस पौधे को उत्तर-पश्चिम में लगाना बेहद शुभ है। इस दिशा को घर में तालमेल के संबंध से जोड़ा जाता है। अगर घर में यह दिशा नहीं समझ आ रहा तो आप इसे घर के मुख्य द्वार पर भी लगा सकते हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आयुर्वेद में यह ज्वर (बुखार) के लिए उपयुक्त बताई गई है | संशमनी वटी (गिलोय घनवटी) विभिन्न ज्वर के लिए प्रसिद्ध योग है |
गठिया, बुखार के बाद कमजोरी, भूख न लगना, इम्युनिटी कमजोर होना आदि के लिए उपाय के रूप में।
गिलोय एसिडिटी, सर्दी, खाँसी, अपचन, गठिया, लिवर के रोग, डायबीटिज, त्वचा विकार, शरीर में जलन, दुर्बलता में उपयुक्त है |
यह मानसिक तनाव और चिंता को दूर करने के लिए उपयोग अत्यधिक लाभकारी है।
गिलोय में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसमें ग्लूकोसाइड, फास्फोरस, तांबा, कैल्शियम, जस्ता और मैग्नीशियम जैसे खनिज भी होते हैं। ये तत्व आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। जो आपके इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में मदद करता है।
रसायन होने से यह शरीर और दिमाग पर बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करता है। इन्हीं अनगिनत गुणों के कारण गिलोय को अमृता कहा जाता हैं |
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
बवासीर के लिए नागदोन के फायदे जिन्हें बवासीर की समस्या है, वे नागदोन का उपयोग कर सकते हैं. इस स्थिति में नागदोन के 2-3 पत्तों को सुबह खाली पेट चबाना चाहिए. दरअसल, इसमें कुछ खास औषधीय गुण होते हैं, जो बवासीर के कारण होने वाले रक्त के बहाव को कम करने और उससे होने वाले दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
सूजन के लिए नागदोन के फायदे अगर किसी के शरीर में सूजन हो गई है, तो सूजन को कम करने के लिए भी नागदोन का उपयोग कर सकते हैं, इससे संबंधित एक रिसर्च पेपर में दिया गया है कि नागदोन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं,ये गुण सूजन को कम कर सकता है, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया से संबंधी सूजन से भी राहत दिला सकता है, ऐसे में सूजन कि समस्या से पीड़ित मरीज इसके चूर्ण या रस का सेवन कर सकते हैं, साथ ही इसके पत्ते को पीसकर भी सूजन वाली जगह पर लगाया जा सकता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हनुमान जी जिनसे सभी बल, बुद्धि, विद्या देने की कामना करते हैं। लेकिन मां को तो हर बात का ध्यान रखना होता है ना इसलिए हनुमान जी की शिक्षा के लिए उनकी माता बड़ी चिंतित थी
सन्तान के चरित्र-निर्माण में माता की भूमिका आधारशिलास्वरूप होती है इसीलिए महीयसी “माता को प्रथम गुरु” का सम्मान दिया गया है।
अंजनादेवी परम सदाचारिणी, तपस्विनी एवं सद्गुण-सम्पन्न आदर्श माता थीं। वे अपने पुत्र श्रीहनुमानजी को श्लाघनीय तत्परता से आदर्श बालक का स्वरूम प्रदान करने की दिशा में सतत जगत और सचेष्ट रहती थीं।
पूजनोपरान्त और रात्रि में शयन के पूर्व वे अपने प्राणाधिक प्रिय पुत्र को पुराणों की प्रेरणाप्रद कथाएं सुनाया करतीं थीं। वे आदर्श पुरुषों के चरित्र श्रीहनुमानजी को पुनः-पुनः सुनातीं और अपने पुत्र का ध्यान उनकी ओर आकृष्ट करती रहतीं।
माता अंजनादेवी जब भगवान् श्रीरामजी के अवतार की कथा सुनाना प्रारम्भ करतीं, तब बालक श्रीहनुमानजी का सम्पूर्ण ध्यान उक्त कथा में ही केन्द्रित हो जाता। निद्रा एवं क्षुधा उनके लिए कोई अर्थ नहीं रखतीं। सहजानुराग से श्रीहनुमानजी पुनः-पुनः श्रीराम-कथा का श्रवण करते और खो जाते।
माता को चिंता सताने लगी। श्री हनुमानजी की आयु भी विद्याध्ययन के योग्य हो गई थी। माता अंजनीदेवी एवं वानरराज केसरी ने विचार किया- ‘अब हनुमान को विद्यार्जन के निमित्त किसी योग्य गुरु के हाथ सौंपना ही होगा। अतएव माता अंजना और कपीश्वर केसरी ने श्रीहनुमानजी को ज्ञानोपलब्धि के लिए गुरु-गृह भेजने का निर्णय किया।
अपार उल्लास के साथ माता-पिता ने अपने प्रिय श्रीहनुमानजी का उपनयन-संस्कार कराया और उन्हें विद्यार्जन के लिए गुरु-चरणों की शरण में जाने का स्नेहिल आदेश किया, पर समस्या यह थी कि श्रीहनुमानजी किस सर्वगुण-सम्पन्न आदर्श गुरु का शिष्यत्व अंगीकृत करें।
माता अंजना ने प्रेमल स्वर में कहा- ‘‘पुत्र ! सभी देवताओं में आदि देव भगवान् भास्कर को ही कहा जाता है और फिर, सकलशास्त्र मर्मज्ञ भगवान् सूर्यदेव तुम्हें समय पर विद्याध्ययन कराने का कृपापूर्ण आश्वासन भी तो दे चुके हैं। अतएव, तुम उन्हीं के शरणागत होकर श्रद्धा-भक्तिपूर्वक शिक्षार्जन करो।’’
श्रीहनुमान जी माता-पिता के श्रीचरणों में अपने सादर प्रणाम निवेदित कर आकाश में उछले तो सामने “सूर्यदेव के सारथि अरुण” मिले। श्रीहनुमानजी ने पिता का नाम लेकर अपना परिचय दिया और अरुण ने उन्हें अंशुमाली के पास जाने को कहा। आंजनेय ने अतीव श्रद्धापूर्वक भगवान् सूर्यदेव के चरणों का स्पर्श करते हुए उन्हें अपना हार्दिक नमन निवेदित किया।
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⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।

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