सीएम राइज स्कूल के लिए सरकार ने भेजी दो बसें, लेकिन भवन निर्माण शुरू नहीं होने से छात्रों में आक्रोश

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । सीएम राइज स्कूल में इस बार नए विद्यार्थियों द्वारा काफी संख्या में प्रवेश लिया गया है जिससे स्कूल में करीब 1700 से ऊपर विद्यार्थियों की संख्या हो गई हैं और एडमिशन के लिए 300 विद्यार्थियों के नाम अभी वेटिंग में है। क्योंकि स्कूल के सभी 17 कक्ष फुल हो चुके हैं। बच्चों को बिठाने के लिए जगह ही नहीं बची है।
पहले के वर्षों में देखने में आता था कि सरकारी स्कूल से नाम कटा कर बच्चे प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लेते थे लेकिन इस बार प्राइवेट स्कूलों से अधिकतर बच्चों ने नाम कटा कर सीएम राइज और पीएमश्री कन्या हायर सेकेंडरी में एडमिशन लिया है ऐसे छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग एक हजार है।
अब जबकि विद्यार्थियों के आवागमन के लिए सरकार ने नई दो बसें भेज दी हैं लेकिन कुछ लोगों के मैदान बचाने विरोध के चलते अभी तक भवन निर्माण की शुरुआत भी नहीं हो सका है।
नवीन भवन जब बनकर तैयार होगा तो 7000 विद्यार्थी एक साथ शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। इसके अलावा 2000 के बैठने के अतिरिक्त कक्ष भी होंगे। अभी तो बिल्डिंग के निर्माण के लिए ही करीब 45 करोड़ रुपए का बजट पास हुआ है इसके अलावा स्कूल की बाउंड्री कन्या और बालक छात्रावास दौड़ने के लिए ट्रेक आदि के लिए भी करीब इससे अधिक राशि का बजट आना शेष है करीब एक अरब की पूरी स्कीम है।
बेगमगंज में सीएम राइज स्कूल का भवन का निर्माण स्कूल मैदान के विवाद के कारण शुरू नहीं हो पाया है जबकि अन्य शहरों में भवन बनकर तैयार हो चुके हैं। वहां पर प्री नर्सरी से एडमिशन भी शुरू हो गए।
जहां आवागमन के लिए दो नई बसें देखकर विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी आई स्टाफ सहित विद्यार्थियों ने बसों का पूजन किया। और तत्कालीन जनप्रतिनिधियों की प्रति कृतकता प्रकट की। लेकिन वहीं स्कूल भवन का निर्माण नहीं हो पाने से वे आक्रोषित भी नजर आए की मैदान के चक्कर में उनका भवन नहीं बन पा रहा है।
आज स्कूल का पुराना भवन जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है कई कमरों से बारिश का पानी अंदर टपकता है। छप्पर कई जगह से खराब हो गया है। तो जहां पर सीमेंट की छत है वहां से प्लास्टर नीचे गिरने लगा है जो किसी दिन दुर्घटना का सवब बन सकता है।
विद्यार्थियों गोविंद सिंह, विनय कुमार, फैज खान, सुनील कुमार, प्रताप सिंह, सौरभ, मयंक, कार्तिक, रोहित, शैलेस, मोहित, कैलाश, कमल,राजू आदि का कहना है कि उनके लिए भवन जरूरी है मैदान तो उसके अंदर बन ही रहा है साढ़े तीन एकड़ में फिर क्यों लोग उक्त मैदान को बचाने पर तुले हुए हैं। यदि कुछ लोगों की हठधर्मिता के कारण एक अरब की लागत की सौगात की स्कीम फेल होती है तो ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं किया जाएगा
कुछ विद्यार्थियों ने तो यहां तक कहां के हमारे स्कूल की भूमि पर दूसरे लोग अपना हक क्यों जाता रहे हैं ऐसा लगता है कि इसमें उन लोगों का कुछ स्वार्थ छिपा है। यदि भवन निर्माण की रूकावटों को शीघ्र दूर नहीं किया गया तो हम छात्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।



