धार्मिक

श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ पूर्व मंत्री रामपाल सिंह राजपूत ने लिया कथा व्यास से आशिर्वाद

चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्म वामन अवतार व गजेंद्र मोक्ष की कथाओं से भक्त भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
सिलवानी। नगर के माँ कर्मा ग्राउंड, सरस्वती शिशु मंदिर रोड पर 1 से 7 फरवरी तक आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। कथा व्यास पं. सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज के श्रीमुख से संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का रसपान श्रद्धालुओं को हो रहा है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो रहे हैं दिन
बुधवार को  पूर्व मंत्री रामपाल सिंह राजपूत कथा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कथा व्यास पं. सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज को तिलक लगाकर शाल व श्रीफल भेंट किया तथा पुष्पमाला पहनाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान से क्षेत्र में सुख-शांति समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कथा आयोजन के दौरान नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विभोर जैन भाजपा मंडल अध्यक्ष श्याम साहू, वरिष्ठ भाजपा नेता गिरजीश चौरसिया सहित अनेक जनप्रतिनिधि समाजसेवी एवं श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति से कथा स्थल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पं. सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म पूतना वध वामन अवतार, गजेंद्र मोक्ष एवं समुद्र मंथन जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की लीलाओं को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।कथा में वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर बलि राजा से तीन पग भूमि मांगकर सम्पूर्ण ब्रह्मांड को नाप लिया जिससे अहंकार के त्याग और समर्पण का संदेश मिलता है। वहीं कथा व्यास ने गजेंद्र मोक्ष की कथा के माध्यम से यह बताया गया कि सच्ची पुकार पर भगवान स्वयं भक्त की रक्षा के लिए आते हैं। समुद्र मंथन प्रसंग में अमृत और हलाहल की कथा सुनाते हुए धर्म, संयम और त्याग का महत्व समझाया गया।
*संस्कार, शिक्षा और गौ सेवा पर दिया विशेष संदेश* कथा के दौरान कथा व्यास ने बेटियों की शिक्षा व संस्कार पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शिक्षित और संस्कारित समाज ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करता है। साथ ही गौ सेवा एवं गायत्री मंत्र के जाप को अत्यंत पुण्यकारी बताते हुए इसे 33 करोड़ देवी-देवताओं की सेवा के समान बताया गया। कथा के चौथे दिन भक्तों ने भक्ति समर्पण और सेवा के भाव से प्रेरणा प्राप्त की। संगीतमय भजनों और जयकारों से कथा स्थल गूंज उठा।

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