शिव पुत्र कार्तिकेय ने विदिशा रायसेन लोकसभा क्षेत्र में दिखाई सक्रियता लोकसभा चुनाव 2024 बनाए जा सकते हैं भाजपा प्रत्याशी
जिले की राजनैतिक डायरी
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले लोकसभा विदिशा रायसेन में इन दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे युवा भाजपा नेता कार्तिकेय चौहान ने सक्रियता बढ़ा दी है। चाहे सार्वजनिक कार्यक्रम हो या धार्मिक आयोजन और राजनीतिक कार्यक्रमों के बनने लगे हैं कार्तिकेय ने सीहोर से लेकर रायसेन, सांची, दीवानगंज, विदिशा, गंजबासौदा और भोपाल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा अब आम होने लगी है कि मोदी के आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी अपना उम्मीदवार बना सकती है। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक वैसे भी विदिशा रायसेन लोकसभा क्षेत्र भाजपा के अभेद गढ़ में गिना जाता है। सीएम शिवराज सिंह के पुत्र शायद इसी अपेक्षा से विदिशा लोकसभा क्षेत्र में अपनी गाहे-बगाहे उपस्थिति दर्ज कराने में जुटे हुए हैं वह युवा मोर्चा के कार्यक्रम रायसेन में और दीवानगंज, सांची सहित विदिशा और गंजबासौदा में शामिल हो चुके हैं उन्होंने भाजपा के उपचुनाव सांची विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी डॉ प्रभुराम चौधरी के पक्ष में चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी और श्रीराम परिसर में बनाए गए मंच से लच्छेदार भाषण भी दिए थे। इस पिक्चर की वजह से विधानसभा क्षेत्र से भाजपा लगभग 65000 से भी अधिक मतों से जीती थी।
उमाश्री भारती ने मध्यप्रदेश में शराबबंदी को लेकर दिखाए तीखे तेवर….
भाजपा की स्टार प्रचारक और पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमाश्री भारती ने मध्यप्रदेश में शराबबंदी को लेकर लगातार हिदायत दे रही हैं। जिससे मप्र की शिवराज सरकार की मुश्किलें बढ़ रही हैं । पिछले दिनों उमाश्री भारती दीपावली पर्व पर रामराजा मंदिर ओरछा पहुंची । यहां साध्वी उमाभारती ने प्रभु श्रीराम के दर्शन पूजन आरती के बाद उनकी वाहनों का काफिला वापस लौट रहा था। तभी बड़ी देशी शराब की दुकान देख कर उनके तेवर उग्र हो गए । वह बोली कमाई के लालच में सरकार शराब दुकान हटाने की वजह बढ़ा रही है ।लेकिन यह ठीक नहीं है । उन्होंने अयोध्या आंदोलन की यादें ताजा कर दीं। मालूम हो कि साध्वी उमाश्री भारती शुरू से ही मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी अन्य पवित्र नदियों के किनारे देशी अंग्रेजी शराब दुकानें नहीं खोलने और आबकारी महकमे की आबकारी नीति में बदलाव की पक्षधर रही हैं । शायद इसीलिए वह चाहे बरखेड़ा पठानी भोपाल के की शराब दुकान में हो या फिर राम राजा मंदिर ओरछा की शराब दुकान में वह गोबर फेंक चुकी हैं। । वह शराब दुकानों में और भोपाल की शराब दुकानों की पत्थर फेंक कर बोतलों की तोड़फोड़ कर चुकी हैं। उनके साथ भीड़ ने भी उनका समर्थन दिया था। उनके साथ महिलाएं भी सड़कों पर उतरीं और नारेबाजी करके मप्र में भी पंजाब गुजरात राज्यों की तरह शराबबंदी के तीखे तेवर दिखाए थे।
विघ्न संतोषियों की गुटबाजी बाणों से प्रभुराम की सेना में मची त्राहि-त्राहि…
सांची विधानसभा क्षेत्र में भाजपा में इन दिनों गुटबाजी चरम सीमा पर है। सांची विस् क्षेत्र में व्याप्त गुटबाजी अलग- अलग गुटों के झंडे थामे नेता कार्यकर्ताओं की चर्चाएं और पार्टी की अंतर्कलह की बातें यहां रायसेन शहर के चौक चौराहों पर आम हो चुकी हैँ।भाजपा सांची विधानसभा क्षेत्र में एक नहीं बल्कि 3 गुटों में विभाजित हो चुकी है । एक गुट बारला हाउस का हावी है तो दूसरा गुट कैबिनेट मंत्री और वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री का । वहीं तीसरा गुट जिले के प्रभारी मंत्री व सहकारिता मंत्री का बन चुका है ।इससे साफ़ जाहिर होने लगा कि भाजपा को मिशन 2023 विधानसभा चुनाव में जीत की राह आसान नहीं होगी । मालूम हो कि पहले भी भाजपा के निष्ठावान नेता और कार्यकर्ता भाजपा की बैठकों में नारेबाजी और गुटबाजी के तेवर दिखा चुके हैं । इन निष्ठावान कार्यकर्ताओं की पूछपरख बंद हो गई है और वह नाराज होकर घर बैठे गए हैं । भाजपा के जितने भी निष्ठावान नेता कार्यकर्ता हैं। वह बारला हाउस के गुट विशेष में शामिल हैं ।बताया जाता है कि स्वास्थ्य मंत्री के साथ उन नेताओं और कार्यकर्ताओं की फौज है जो स्वास्थ्य मंत्री के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे ।उनके ही कामकाज हो रहे हैं मंचों पर उनकी ही पूछपरख हो रही है । बाकी निष्ठावान नेता और सभी कार्यकर्ता पार्टी के आयोजनों में शामिल नहीं होते। जब कभी बैठक में पार्टी के आयोजन में जिले के प्रभारी व सहकारिता मंत्री आते हैं तो उनके गुट विशेष के नेता कार्यकर्ता मंच पर विराजमान होते हैं। बाकी दो गुट विशेष के लोग गायब रहते हैं। पिछले दिनों दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम में एक आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि व सांची जनपद पंचायत की अध्यक्ष अर्चना सुनील पोर्ते को मुख्यमंत्री के मंच पर चढ़ने नहीं दिया गया । जिससे आदिवासी जनप्रतिनिधि की उपेक्षा हुई। इसके किस्से भी रायसेन जिले में चल रहे हैं ।आदिवासियों को अपना और हितेषी बताने वाली भाजपा के दावे और वादे आखिर कहां चले गए । इन बातों को भी लोग चटखारे लेकर कर रहे हैं । इस गुटबाजी की शुरुआत नगरीय निकाय और ग्राम पंचायतों के चुनाव से बढ़ी हैं । नेताओं और कार्यकर्ताओं में मनमुटाव मतभेद और मनभेद भी बढे हैं । भाजपा की इस गुटबाजी को खत्म करने की तरफ ना तो सत्ता और संगठन के नेता पदाधिकारी आगे आए हैं और ना गुटबाजी खत्म करने की कोशिश की जा रही हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव 2023 में पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।



