ग्राम पंचायत धरवारा में भृष्टाचार चरम सीमा पर, सरपंच, सचिव, उपसरपंच पर लगाए आरोप

ग्राम पंचायत में किए गए निर्माण कार्यों की होनी चाहिए जांच तभी खुलेगी पोल
जनसुनवाई में लगाई जांच की गुहार
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान | जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत धरवारा में सरपंच, सचिव, उपसरपंच के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं । ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार की घटनाएं आम होती जा रही हैं । ऐसे मामलों में कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में अनियमितताएं करते हैं, जिससे जनता को मिलने वाले लाभ में कटौती हो जाती है। विकासखंड ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत धरवारा में उपसरपंच अमित गर्ग, सरपंच और पंचायत सचिव पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं । शिकायतकर्ता मोहन दुबे ने जनसुनवाई कटनी में लिखित शिकायत देकर इनके ऊपर अतिक्रमण, सरकारी फंड के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप लगाए हैं । शिकायतकर्ता मोहन दुबे द्वारा प्रस्तुत शिकायत पत्र में 7 बिंदुओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों का संबंध मुख्य रूप से भूमि विवाद, नियमों का उल्लंघन कर किए गए निर्माण कार्य, सरकारी संपत्ति की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से है।
*क्या कहता हैं अनुच्छेद 300(A)*
मोहन दुबे का आरोप है कि उनकी निजी भूमि पर पंचायत द्वारा मुक्तिधाम ( श्मशान घाट ) का निर्माण जबरदस्ती किया जा रहा है । भूमि अधिग्रहण का कोई वैध दस्तावेज या सरकारी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है । यह संविधान के अनुच्छेद 300(A) का उल्लंघन है, जो कहता है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी भी नागरिक की भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता । अनावश्यक सड़क निर्माण ( सीसी सड़क ) पहले से निर्मित सड़क को फिर से बिना किसी ठोस कारण के दोबारा बनाया जा रहा है । यह कार्य सरपंच, सचिव और उपसरपंच की मिलीभगत से कराया जा रहा है । इससे पंचायत के सरकारी फंड का ग़लत इस्तेमाल हुआ है, जबकि पंचायत के अन्य हिस्सों में नई सड़क की ज़रूरत है।
*कज़लहाई तलैया की पिचिंग में अनियमितता*
2007-08 में पंचायत के फंड से कज़लहाई तलैया का निर्माण किया गया था। इस पर 7 लाख रुपये की लागत से पिचिंग ( तलैया को पत्थरों से मजबूत करना ) कराई गई थी। वर्तमान सरपंच, सचिव और उपसरपंच द्वारा इस पिचिंग को तोड़कर पत्थर बेच दिए गए, जिससे सरकारी संपत्ति को हानि हुई । पंचायत द्वारा रंगमंच सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया । इसमें घटिया सामग्री का उपयोग कर गुणवत्ता से समझौता किया गया । निर्माण लागत अधिक दिखाकर सरकारी फंड में हेरफेर की गई । ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण की योजना चलाई गई थी । कई जगह शौचालय निर्माण के पैसे निकाले गए, लेकिन मौके पर शौचालय बने ही नहीं। कई जगह आधे-अधूरे निर्माण को पूर्ण बताया गया और पैसों की बंदरबांट की गई। ग्रामीण विकास योजनाओं के अंतर्गत आने वाली मनरेगा योजनाओं में पैसों का ग़लत उपयोग किया गया । लेकिन हकीकत में कोई काम नहीं हुआ।
*पंचायत के अन्य विकास कार्यों में भ्रष्टाचार*
गांव में तालाब खुदाई, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्यों में भी घोटाले की शिकायत की गई है । सरकारी नियमों का पालन न करते हुए मनमानी तरीके से फंड का दुरुपयोग किया गया । शिकायत के बाद जब यह मामला उठा, तो जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के सीईओ यजुर्वेद कोरी ने स्पष्ट किया कि अब तक यह शिकायत जिला कलेक्टर कार्यालय से नहीं पहुंची है। लेकिन यदि औपचारिक शिकायत आती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
*धरवारा पंचायत में भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत*
धरवारा पंचायत में इस प्रकार की गड़बड़ियां पहली बार सामने नहीं आई हैं। पंचायत स्तर पर सरपंच – सचिव की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं को लाभार्थियों तक सही तरीके से नहीं पहुंचाया जा रहा है। पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों पर उच्च स्तर से दबाव बनाया जाता है कि वे ठेकेदारों को लाभ पहुंचाएं । जब प्रशासन जांच नहीं करता, तो भ्रष्टाचार बढ़ता जाता है। ग्रामीण जनता को पूरी जानकारी नहीं होती कि उनके लिए कितनी धनराशि स्वीकृत हुई है और इसका सही उपयोग कैसे हो रहा है । मिलीभगत सरपंच, सचिव, उपसरपंच और स्थानीय ठेकेदार मिलकर भ्रष्टाचार को अंजाम देते हैं। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि यदि भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं, तो सरपंच, सचिव और उपसरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए । मनरेगा और अन्य योजनाओं में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए ऑडिट अनिवार्य किया जाए । ग्राम पंचायत के हर कार्य की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए । ग्रामीणों को जागरूक किया जाए कि वे आरटीआई ( सूचना का अधिकार ) के तहत पंचायत की सभी वित्तीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हर सरकारी योजना की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचे, जिससे वे इसे सही तरीके से लागू करा सकें । धरवारा पंचायत में उपसरपंच, सरपंच और सचिव के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर हैं । सरकारी धन का दुरुपयोग, निजी भूमि पर जबरन निर्माण, सार्वजनिक संपत्ति की चोरी, और विकास योजनाओं में अनियमितता दर्शाती है कि पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। प्रशासन को इस मामले में जल्द से जल्द संज्ञान लेना चाहिए । निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में पंचायत स्तर पर इस तरह के भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।



