भगवान शंकर की अमृत कथा का पान करने से राजा परीक्षित का उद्धार हुआ : पंडित अभिषेक शास्त्री

सिलवानी । नगर के वार्ड एक रानीपुरा रोड में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण के तृतीय दिवस में कथा व्यास अभिषेक शास्त्री ने बताया कि किस तरह से सृष्टि का विस्तार हुआ किस तरीके से परीक्षित जी महाराज का जन्म एरावती नाम की कन्या के साथ इनका विवाह हुआ जन्मे जय पुत्र हुए इन्हीं राजा परीक्षित ने सामीक ऋषिका अपमान किया इसी अपमान के कारण सामीक पुत्र श्रृंगी ऋषि ने अपने पिता का अपमान समझा कर राजा परीक्षित को श्राप दे दिया की है राजन जो मरा हुआ सर्प तुमने हमारे पिताजी के गले में डाला है आज से वही तक्षक रूपी सर्प सातवे दिन आएगा और तुमको डसेगा जिससे तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी जब राजा परीक्षित को पता चला की सातवें दिन हमको मरना है तो राजा परीक्षित ने अपना घर परिवार सब कुछ छोड़ दिया और गंगा तट पर जाकर 7 दिन तक भगवान की यही अमृत कथा को पान किया जिससे राजा परीक्षित का उद्धार हो गया आगे जाकर के भगवान शंकर का विवाह किया गया सभी नगर वासियों ने धूमधाम से भगवान का विवाह संपन्न किया।
कथा 17 जून 2024 सोमवार से प्रारंभ होकर 23 जून 2024 रविवार को समापन, पूर्णाहुति एवं प्रसादी वितरण होगा। कथा प्रतिदिन 1 बजे से 4 बजे तक कथा व्यास पंडित श्री अभिषेक शास्त्री श्रीधाम वृन्दावन सिलवानी वालो के मुखारविंद से हो रही है।
आयोजक सिंहवाहनी दरबार के पंडा विनोद वर्मा एवं मंदिर समिति ने अभी भक्तजनो से सहपरिवार पधार कर कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।



