27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी, जानिए क्या है स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••जय श्री गणेश •••✦
🔮 27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी, जानिए क्या है स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त…..
🔘 HEADLINES
▪️ भाद्रपद महीने में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।
▪️ इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
▪️ भगवान गणेश की पूजा से सुखों में वृ्द्धि होती है।
🤷🏻♀️ वैसे तो रोजाना ही भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन भादों माह प्रभु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, जिसकी खुशी में देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दौरान भक्तजन घरों, दफ्तरों, दुकानों और मंदिरों में गणपति जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी विधिनुसार उपासना करते हैं। इसके अलावा प्रभु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए मोदक, मोतीचूर लड्डू, खीर और मालपुआ जैस भोग लगाए जाते हैं, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। इस वर्ष 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन गणपति जी की मूर्ति की स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, आइए आचार्य श्री गोपी राम से विस्तार से जानते हैं।
⚛️ गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
अमृत काल- 07:33 से सुबह 09:09
शुभ चौघड़िया- सुबह 10:46 AM से दोपहर 12:22 PM तक
गणेश जी की मूर्ति को घर में स्थापित करने का सबसे शुभ मुहूर्त- 11:05 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:40 तक
हालांकि 27 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से राहुकाल शुरू हो जाएगा, इसलिए भक्तों को इससे पहले ही घर में गणेश जी की मूर्ति को स्थापित कर देना चाहिए।
🧘🏻 गणपति प्रतिमा स्थापना मुहूर्त और प्राण प्रतिष्ठा पूजन मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार 27 अगस्त को गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस दौरान 12.30 से राहुकाल लग जाएगा। ऐसे में 11 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 30 तक का समय गणपति स्थापना और पूजन के लिए उत्तम रहेगा। ओम गं गणपतये नमः मंत्र से गणेशजी की स्थापना और पूजन करें।
🗺️ गणेश जी की मूर्ति घर में किस दिशा में स्थित करनी चाहिए
गणेश चतुर्थी के दिन कई लोग घर में गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं। वास्तु के अनुसार, गणेश जी की मूर्ति आपको ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करनी चाहिए। यह दिशा ईश्वर का स्थान कही जाती है। गणेश जी की प्रतिमा यहां स्थापित करने से आपको उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🙇🏻♀️ गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें।
एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर बप्पा की मूर्ति को रखें
पूजा में कलश, दीपक, फल, फूल दूर्वा, मोदक, नारियल, चावल, कपूर, अक्षत आदि सामग्री साथ लेकर बैठें।
सबसे पहले “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करते हुए भगवान को आमंत्रित करें।
फिर उन्हें फूल अर्पित करें।
गणपति बप्पा को गंगाजल या दूध से प्रतीकात्मक स्नान कराएं और फिर साफ जल से शुद्ध करें।
भगवान के माथे पर चंदन और रोली लगाएं और हल्दी-अक्षत चढ़ाएं।
कपूर और घी का दीप जलाकर उनकी आरती करें।
अंत में हाथ जोड़कर बप्पा से परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
🍱 गणेश चतुर्थी स्पेशल भोग
लड्डू – भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगाया जाता है। आप बेसन या बूंदी से बने लड्डू का भोग लगा सकते हैं।
मोदक- इसके अलावा बप्पा को मोदक बहुत ही पसंद माने जाते हैं। पुराणों में जिक्र का गया है कि गणेश जी बचपन में अपनी मां पार्वती के बनाए गए मोदक पलभर में चट कर जाते थे।
👀 चंद्र दर्शन निषेध (क्यों माना जाता है चंद्र दर्शन अशुभ?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन निषेध माना गया है। ऐसा करने से मिथ्या दोष (यानी झूठे आरोप लगने का भय) लगता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेश जी ने अधिक मिठाइयाँ खा लीं और उनका पेट बढ़ गया। चलते समय उन्हें ठोकर लगी और वे गिर पड़े। यह दृश्य देखकर चंद्रमा हँसने लगे और उपहास करने लगे।
गणेश जी क्रोधित हो गए और उन्होंने चंद्रमा को शाप दिया कि जो भी व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात तुम्हारा दर्शन करेगा, उस पर मिथ्या दोष (झूठा आरोप) लगेगा। तभी से इस दिन चंद्र दर्शन को अशुभ माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस समयावधि में चंद्रमा को देखने से बचें।

