लोक अदालत ने मिलाया पति-पत्नि को, विभिन्न बैंकों ने बसूले 11 लाख
सिलवानी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रायसेन ओंकारनाथ के निर्देशन एवं तहसील विधिक सेवा समिति अध्यक्ष न्यायाधीश अतुल यादव की उपस्थिति में न्यायालय परिसर में लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रारंभ में न्यायाधीश अतुल यादव ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। न्यायालय परिसर में विभिन्न बैंकों तथा नगर परिषद के केम्प लगाए गए, जहां न्यायाधीश अतुल यादव ने पहुंचकर संबंधित शाखा प्रबंधक एवं उपस्थित पक्षकारों से आपसी राजीनामा के संबंध में चर्चा कर लोक अदालत के फायदे के बिंदुओं पर प्रकाश डाला। न्यायालय में प्रचलित पति-पत्नि के मामलें में क्रांति बाई-रामस्वरूप विगत तीन वर्षों से पति-पत्नि अलग-अलग रह रहे थे, आवेदिका तथा अनावेदक के तीन पुत्र है। न्यायाधीश अतुल यादव ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर संतानों के प्रति अपने दायित्वों व जिम्मेदारी के विषय में समझाया तथा बच्चों के भविष्य के बारे में बताया। दोनों पक्ष संतुष्ट हुए और खुशी खुशी साथ रहने का वचन देकर बच्चों के साथ रहने को राजी हुए। आवेदिका की ओर से अधिवक्ता सुनील श्रीवास्तव तथा अनावेदक की ओर से अधिवक्ता मनोज त्रिवेदी उपस्थित रहे। न्यायालय में प्रचलित 20 प्रकरणों का निराकरण आपसी सहमति के आधार पर किया गया। विभिन्न बैंक व नगर परिषद द्वारा लगभग 11 लाख रूपयों की बसूली कर 105 प्रकरणों का निराकरण किया गया।



