धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 26 मई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 26 मई 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – वैशाख मास
🌑 पक्ष – ज्यैष्ठ पक्ष
📆 तिथि – सोमवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 12:12 PM तक उपरांत अमावस्या
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र भरणी 08:23 AM तक उपरांत कृत्तिका 05:32 AM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – भरणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है. भरणी नक्षत्र के देवता यमदेव हैं, जो मृत्यु के देवता माने जाते हैं।
⚜️ योग – अतिगण्ड योग 02:54 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
प्रथम करण : शकुनि – 12:11 पी एम तक
द्वितीय करण : चतुष्पाद – 10:21 पी एम तक नाग
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:18:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:42:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:44 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:24 ए एम से 05:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:46 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:36 पी एम से 03:31 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:10 पी एम से 07:31 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:11 पी एम से 08:13 पी एम
💧 अमृत काल : 03:25 ए एम, मई 27 से 04:50 ए एम, मई 27
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:58 पी एम से 12:39 ए एम, मई 27
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को श्वेत वस्त्रों सहित आमान्न (सीदा) दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दर्श अमावस्या/ शनेश्चर जयन्ती/ भावुका अमावस्या/ फलहारिनी कालिका पूजा/ सोमवती अमावस्या दोपहर 12.12 से प्रारम्भ/ वट सावित्री व्रत/ मासिक कार्तिगाई/ राष्ट्रीय पेपर एयरप्लेन दिवस, राजलक्ष्मी देवी पुण्य तिथि, शांति स्मृति दिवस, राष्ट्रीय कागज़ हवाई जहाज़ दिवस, जॉर्जिया स्वतंत्रता दिवस, गुयाना स्वतंत्रता दिवस, प्रसिद्ध क्रांतिकारी छगनराज चौपासनी वाला जयन्ती, अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक मुक्त दिवस, राष्ट्रीय क्षमा दिवस (National Sorry Day)
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।
🗼 Vastu tips 🗽
गृह प्रवेश के लिए शुभ दिन (वार/दिवस):
गृह प्रवेश के लिए कुछ वार (दिन) विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:
सोमवार (चंद्रमा): यह दिन स्थिरता, शांति और मानसिक संतोष का प्रतीक है। गृह प्रवेश के लिए इसे मध्यम शुभ माना जाता है, खासकर यदि घर में सुख-शांति की प्रबल इच्छा हो।
बुधवार (बुध): यह दिन ज्ञान, बुद्धि और व्यवसाय में वृद्धि के लिए उत्तम है। इसे भी गृह प्रवेश के लिए शुभ माना जाता है।
गुरुवार (बृहस्पति): यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है! देव गुरु बृहस्पति सभी प्रकार के मंगल कार्यों, ज्ञान, धन और संतान के कारक हैं। गुरुवार को गृह प्रवेश करने से घर में समृद्धि, ज्ञान और सकारात्मकता आती है। यह गृह प्रवेश के लिए सबसे उत्तम दिनों में से एक है।
शुक्रवार (शुक्र): यह दिन माता लक्ष्मी और धन-समृद्धि का कारक है। शुक्रवार को गृह प्रवेश करने से घर में धन, वैभव और ऐश्वर्य का वास होता है। यह भी गृह प्रवेश के लिए अत्यंत शुभ दिन माना जाता है।
किन दिनों में गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए (वर्जित वार/दिवस):
मंगलवार (मंगल): यह दिन उग्र स्वभाव का होता है, और इसे गृह प्रवेश जैसे शांतिपूर्ण कार्य के लिए अशुभ माना जाता है।
रविवार (सूर्य): रविवार को भी गृह प्रवेश के लिए शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि यह दिन कुछ हद तक उग्र होता है और स्थिरता के लिए अच्छा नहीं होता।
शनिवार (शनि): शनिवार को भी गृह प्रवेश के लिए अशुभ माना जाता है, क्योंकि शनि स्थायित्व और विलंब का कारक है, और कुछ मामलों में यह संघर्ष भी दे सकता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बैठकर पानी पिएं, खड़े होकर नहीं: क्यों? खड़े होकर पानी पीने से शरीर में पानी का प्रवाह सही से नहीं होता और यह घुटनों और जोड़ों पर बुरा असर डाल सकता है।
फायदा: बैठकर पानी पीने से शरीर आराम की स्थिति में होता है, जिससे पाचन तंत्र को सहायता मिलती है।
धीरे-धीरे पानी पिएं, एकदम से नहीं:क्यों? बहुत तेजी से पानी पीने से शरीर को झटका लगता है और यह गैस, ब्लोटिंग, या किडनी पर दबाव डाल सकता है।
फायदा: धीरे-धीरे पीने से शरीर को पानी को अवशोषित करने का समय मिलता है।
खाने के तुरंत पहले या तुरंत बाद अधिक पानी न पिएं:
क्यों? इससे पाचन रस पतले हो जाते हैं और पाचन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
फायदा: खाना खाने से 30 मिनट पहले या 1 घंटे बाद पानी पीना आदर्श माना जाता है।
सुबह उठते ही गुनगुना पानी पिएं: क्यों? यह शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
फायदा: मेटाबोलिज्म तेज होता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
तेल मालिश वात दोष के असंतुलन को ठीक करने के लिए शरीर पर गर्म तिल के तेल, सरसों के तेल या नारियल के तेल से मालिश करना बहुत फायदेमंद होता है। मालिश से शरीर में गर्माहट आती है और त्वचा की नमी बनी रहती है, जो वात दोष को कम करता है। इसे सप्ताह में कम से कम 2-3 बार करना चाहिए।
ध्यान ध्यान से मानसिक तनाव और बेचैनी कम होती है, जिससे वात दोष संतुलित होता है। रोज़ाना 10-15 मिनट ध्यान करने से मन को शांति मिलती है। इसके साथ ही ओम मंत्र का जाप भी वात दोष को शांत करने में सहायक होता है।
अच्छी नींद:वात दोष के असंतुलन को ठीक करने के लिए पर्याप्त और गहरी नींद लेना आवश्यक है। सोने का समय नियमित रखें और ठंडी जगहों पर न सोएं।
सोने से पहले गर्म दूध या हर्बल चाय (तुलसी, अदरक, शहद के साथ) पीना लाभकारी होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
श्रीमद् भगवद् गीता के अध्याय 9, श्लोक 25 में कहा गया है कि देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं, भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मेरा (श्री कृष्ण) पूजन करने वाले भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं।
इस श्लोक का अर्थ है कि व्यक्ति जिस भी देवता या शक्ति की पूजा करता है, उसके अनुसार ही उसे लोक में जाना होता है। देवताओं को पूजने से देवलोक में जाना, पितरों को पूजने से पितृलोक में जाना, भूतों को पूजने से भूत लोक में जाना, और भगवान कृष्ण की पूजा करने से भगवान कृष्ण के लोक में जाना। फिर भी लोग देवताओं की पूजा क्यों करते है। इसका जबाब भी हमें गीता का चौथे अध्याय का 12वा श्लोक पहले ही दे रहा है।
भगवान कृपा वत्सल तो है पिता समान हैं लेकिन व्यक्ति कामनाओं के अधीन है वह रजो गुण प्रधान है। इसलिये वह देवताओं से पहले कामना करता है। वह फल जल्दी चाहता है। देवता दुकानदार की तरह तुरंत फल देते है। देवताओं का यज्ञ विधिपूर्वक किया जाए तो वह उसका भौतिक फल देने को बाध्य है। उस भौतिक कामनाओं से हमारा कल्याण होगा या नही यह सोचना देवताओं का कार्य नही है जबकि कृष्ण पिता स्वरूप है वह जानते हैं कि प्राणी का सही कल्याण किसमे है। इसलिये भगवान मनुष्य को समझाते है कि देवताओं को पूजने से तेरी भौतिक कामना तो पूरी हो जाएगी लेकिन कल्याण नही होगा। हालांकि देवता भी भगवान से ही लेकर भौतिक वस्तु देते है।
व्यक्ति कर्मफल के अधीन है। व्यक्ति का कल्याण तो निष्काम कर्म से ही होगा। अच्छे कर्मों से स्वर्ग और बुरे कर्म से नर्क के भोग तो मिल जाएंगे लेकिन उन भोगों के बाद फिर संसार सागर में जीव को आना पड़ेगा। यानी फिर 84 लाख योनियों का चक्कर।
अतः सच्चा सुख चाहिए तो सांसारिक कामनाओं से और इनके देवताओं की तरफ मुंह न ले जा कर एक श्री कृष्ण यानी एक व्रह्म की तरफ ध्यान लगा लें। इसके लिये व्यक्ति कर्म तो करें क्योंकि बगैर कर्म किये तो कोई प्राणी रह ही नही सकता और आहार, निंद्रा, भय, मैथुन तो पशुओं में भी है। मनुष्य को भगवान ने इसके अलावा विवेक और कार्य करने की स्वतंत्रता दी है जिससे वह मनुष्य जन्म में भगवतधाम को जाने का कार्य कर सके।
अतः व्यक्ति को कर्म तो करना है लेकिन उसमे आशक्ति न करें। यानी अपना कर्तापन का त्याग कर दें। एक बार अहम चला गया तो भगवान कहते है कि उस प्राणी का योगक्षेम में खुद वहन करता हूँ। कामना रहित कर्म जो वर्णआश्रम अनुसार किये जायेंगे तो व्यक्ति को पाप और पुण्य का फल भी नही लगता। अर्जुन को यही भगवान ने कहा कि तू क्षत्रिय है तेरा कर्तव्य शत्रुओं को मारना है इससे तुझे पाप और पुण्य का भागी नही होगा। एक राजा भी भोग के बीच योगी हो सकता है अगर वह राजा जनक की तरह भोग के बीच में योगी बन जाये।
अतः हमें अपने नित्य कर्म करते हुए भी अपने कर्म में कर्तापन नही लाएंगे तो हम भी भगवद कृपा के अधिकारी हो जाएंगे। इसके लिये, क्योंकि, मनुष्य राजसी अधिक है अतः ज्ञान और वैराग्य योग की जगह भक्ति योग से प्रभु के अधिक करीब पहुंच सकता है। कलयुग केवल नाम अधारा।
ज्ञान योग में तीब्र वैराग्य की जरूरत है जो मनुष्य के लिये लाना वहूत मुश्किल है। इसीलिये भगवान सगुन उपासना को अधिक जोर देते है। हालांकि सगुन और निर्गुण में कोई भेद नही है।
कर्म, अकर्म और विकर्म का मतलब ।जो भी हो रहा हैं या किया जा रहा है वो क्रिया (activity) है
क्रिया दो तरह की होती हैं शास्त्र सम्मत (जिसको करने की शास्त्र कहते है)
शास्त्र निषिद्ध (जिसके लिये शास्त्र मना करते है)
कर्म- शास्त्र सम्मत क्रिया में सकाम भाव यानि कामना, फलेच्छा है
अकर्म- शास्त्र सम्मत क्रिया में निष्काम भाव, कर्म और कर्मफल से सम्बन्ध नहीं है।
अकर्म में कर्म शून्यता (Inactive, Idle) शामिल नहीं होता है।
विकर्म- शास्त्र निषिद्ध क्रिया में स्वार्थ , दूसरो का अहित होता हो, मनमाना आचरण आदि है
कर्म बन्धन में डालते है जबकि अकर्म बंधनकारी नहीं होते हैं ●•●•●•●•●•●•●•●•●•●•●•●
⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।।

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