कृषिक्राइम

सेल्समैन दामोदर पटैल के विरुद्ध एफ.आई.आर. नहीं की गई, नियमों को दरकिनार करके किया गया कार्य

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान | सहकारी समिति मुरवारी के अंतर्गत आने वाली खरीदी केंद्र खाम्हा में सेल्समैन दामोदर पटैल के द्वारा खरीदी की गई थी। खरीदी के मानकों को दरकिनार करते हुए केंद्र में खरीदी की गई थी जिसमे धान उपार्जन वर्ष 2021 – 2022 में खरीदी में घटी 3885000 की निकली थी लेकिन दामोदर पटैल के द्वारा आज दिनांक तक घटी की राशि जमा नहीं की गई। जिसमें नियमों के तहत अगर राशि जमा नही की जाती तो संबंधित अधिकारी के द्वारा तत्काल एफ.आई.आर की कार्यवाही की जानी चाहिए । सहकारी समिति मुरवारी के अंतर्गत आने वाले खरीदी केंद्र खाम्हा में, वर्ष 2021-2022 के धान उपार्जन कार्य में एक गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है, जो न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इसके परिणामस्वरूप वित्तीय नुकसान भी हुआ है। इस कार्यवाही में दामोदर पटैल, जो कि उक्त केंद्र के सेल्समैन हैं, की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर कार्य किया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्ष 2021 – 2022 के दौरान खाम्हा केंद्र पर धान खरीदी के दौरान 38,85,000 रुपये की घटी राशि सामने आई थी। यह राशि जमा न होने से सरकार को लंबा चूना लगा है। ऐसे में, यह राशि केंद्र के सेल्समैन दामोदर पटैल के जिम्मे थी, जिन्हें यह राशि समय रहते जमा करनी थी। लेकिन अब तक दामोदर पटैल द्वारा यह घटी राशि जमा नहीं की गई है, जो कि एक बहुत ही गंभीर लापरवाही है । इस घटी राशि का जमा न होना न केवल वित्तीय गड़बड़ी का संकेत है, बल्कि यह उन किसानों के हक के साथ भी खिलवाड़ है, जिन्होंने अपनी मेहनत से फसल उगाई थी और उसे सही मूल्य पाने की उम्मीद के साथ सहकारी समिति में बेचा था। भारतीय सहकारी समितियों के तहत उपार्जन केंद्रों पर खरीदी का कार्य कुछ निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है। इन नियमों के तहत, किसी भी घटी राशि को तुरंत जमा करना अनिवार्य होता है । यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो संबंधित अधिकारी को तत्काल एफ.आई.आर. दर्ज करने की जिम्मेदारी होती है। दामोदर पटैल द्वारा घटी राशि जमा न किए जाने से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया। यह न केवल एक वित्तीय गड़बड़ी है, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी दृष्टिकोण से भी एक गंभीर उल्लंघन है। इस राशि का जमा न करना स्पष्ट रूप से एक आपराधिक कृत्य है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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