मध्य प्रदेश

स्कूल भवन हुआ जर्जर, डर और दहशत के बीच कर रहे पढ़ाई

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद,
बेगमगंज । तहसील में जहां सीएम राइज स्कूल, के साथ ही 4 पीएम श्री स्कूल खुलने की सौगात मिलने से लोग खुशी का इजहार कर रहे हैं वहीं क्षेत्र में कुछ स्कूल ऐसी हैं जिनके भवन जर्जर हो गए हैं जिनका सुधार नहीं होने से लोग गम और गुस्से का इजहार कर रहे हैं।
स्कूल भवन की छत से गिट्टी और सीमेंट रेट गिरती रहती है और जरा सी बारिश में छत से पानी टपकने लगता है। छत की सीमेंट झड़कर अध्ययनरत बच्चों के ऊपर गिरती है जिससे पढ़ने वाले बच्चे डर और दहशत के बीच स्कूल में बैठते हैं। अतिरिक्त कक्ष का निर्माण 8 साल से अधूरा डाला है शिक्षा के कणधारों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद आज तक नवीन भवन की स्वीकृति नहीं कराई गई है। और अधूरे ढले अतिरिक्त कक्ष भवन को भी तैयार नहीं करवाया गया है।
स्कूल प्रबंधन द्वारा कई बार लिखित में आवेदन दिए गए पर कोई सुनवाई नहीं, यदि यही स्थिति रही तो कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा अब तो पालक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने में सोचा बिचारी करने लगे हैं जहां एक और शासन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रयत्न कर रही है वही संचालित स्कूल की बिल्डिंग के सुधार की तरफ या नवीन भवन बनवाने के लिए कोई योजना तैयार नहीं की है।
‌ हम बात कर रहे हैं
मरखंडी के हाई स्कूल की जिसमें कक्षा 6 से 10 तक 192 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। पूरे स्कूल भवन की छत से लोहे के सरीऐ दिखाई दे रहे हैं जरा सी बारिश में पढ़ाई प्रभावित होती है बारिश के समय छत पर पॉलिथीन बांधी जाती है और जगह- जगह बाल्टी रखकर पानी फैलने से रोका जाता है। तेज हवा चलने या जरा सी धमस से लगने से छत की गिट्टियां और सीमेंट गिरने लगती है। क्योंकि छत पर प्लास्टर किया ही नहीं गया था इसलिए छत का ही मटेरियल गिरता है। कुछ दिन पहले कक्षा आठवीं की क्लास चल रही थी। पढ़ाई के दौरान छत के एक हिस्से का सीमेंट गिट्टी का बेस का टुकड़ा गिरा बच्चे डर गए कोई अनहोनी घटना नहीं हो पाई पर समय-समय पर वह गिरता रहता है।
अधूरा कक्ष भी लोगों को 8 साल से मुंह चिढ़ा रहा है लेकिन उसको पूरा कराने की तरफ विभाग के इंजीनियर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इस संबंध में संस्था प्रमुख जसवंत सिंह ठाकुर का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है।

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